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स्कूल छोड़ने वाले स्टूडेंट फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई, एमपी सरकार ला रही है ‘शिक्षा घर योजना’
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में ‘शिक्षा घर योजना’ मंजूर। ड्रॉपआउट छात्रों को फिर से स्कूल से जोड़ा जाएगा, CM मोहन यादव ने दी सैद्धांतिक मंजूरी।
मध्य प्रदेश की सरकार ने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा में शामिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में ‘शिक्षा घर योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य उन बच्चों और युवाओं को पढ़ाई में वापस लाना है, जिन्होंने किसी वजह से स्कूल छोड़ दिया था। अब स्कूल शिक्षा विभाग इस योजना को इसी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारियों में जुट गया है।
यह निर्णय मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में चल रहे कार्यक्रमों और उनकी प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्होंने कक्षा 8 या उससे ऊपर की पढ़ाई में फेल होने या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़ दी थी। अब इन छात्रों को फिर से शिक्षा का हिस्सा बनाना मुख्य फोकस होगा, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे के अवसरों से वंचित न रहें।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य में ड्रॉपआउट दर को कम करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है। कई क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में छात्र स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है। इस नई पहल के जरिए शिक्षा विभाग ऐसे छात्रों की पहचान करेगा और फिर से उन्हें स्कूलों या वैकल्पिक शिक्षा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। योजना की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि इससे छात्रों को इतिहास और संस्कृति की बेहतर समझ मिलेगी। अधिकारियों को यह प्रक्रिया जल्द समाप्त करने के लिए कहा गया है ताकि इसे अगले शैक्षणिक सत्र में लागू किया जा सके।
बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग की 14 योजनाओं को जारी रखने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और बिना किसी लापरवाही के होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आंशिक रूप से जर्जर स्कूलों की तत्काल मरम्मत के निर्देश भी दिए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा प्रणाली सरकार की प्राथमिकता हैं।
फिलहाल, विभाग अब ‘शिक्षा घर योजना’ के क्रियान्वयन मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है और उम्मीद है कि इसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
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स्कूल छोड़ने वाले स्टूडेंट फिर से शुरू कर सकेंगे पढ़ाई, एमपी सरकार ला रही है ‘शिक्षा घर योजना’
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश की सरकार ने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा में शामिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में ‘शिक्षा घर योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य उन बच्चों और युवाओं को पढ़ाई में वापस लाना है, जिन्होंने किसी वजह से स्कूल छोड़ दिया था। अब स्कूल शिक्षा विभाग इस योजना को इसी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारियों में जुट गया है।
यह निर्णय मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में चल रहे कार्यक्रमों और उनकी प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्होंने कक्षा 8 या उससे ऊपर की पढ़ाई में फेल होने या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़ दी थी। अब इन छात्रों को फिर से शिक्षा का हिस्सा बनाना मुख्य फोकस होगा, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे के अवसरों से वंचित न रहें।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य में ड्रॉपआउट दर को कम करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है। कई क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में छात्र स्कूल छोड़ देते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है। इस नई पहल के जरिए शिक्षा विभाग ऐसे छात्रों की पहचान करेगा और फिर से उन्हें स्कूलों या वैकल्पिक शिक्षा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। योजना की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि इससे छात्रों को इतिहास और संस्कृति की बेहतर समझ मिलेगी। अधिकारियों को यह प्रक्रिया जल्द समाप्त करने के लिए कहा गया है ताकि इसे अगले शैक्षणिक सत्र में लागू किया जा सके।
बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग की 14 योजनाओं को जारी रखने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और बिना किसी लापरवाही के होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने स्कूल भवनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आंशिक रूप से जर्जर स्कूलों की तत्काल मरम्मत के निर्देश भी दिए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा प्रणाली सरकार की प्राथमिकता हैं।
फिलहाल, विभाग अब ‘शिक्षा घर योजना’ के क्रियान्वयन मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है और उम्मीद है कि इसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
