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97 हजार केंद्रों में ‘विद्यारंभ’ उत्सव, 10 लाख बच्चों को मिला स्कूल की ओर पहला कदम सब-हेडलाइन
भोपाल (म.प्र.)
मंत्री निर्मला भूरिया बोलीं—आंगनवाड़ी बच्चों की पहली पाठशाला, पोषण और शिक्षा का समन्वय
मध्य प्रदेश में प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब प्रदेश के 97 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘विद्यारंभ’ उत्सव आयोजित किया गया। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत करीब 10 लाख बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ देकर औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर उनके पहले कदम का सम्मान किया गया।
राजधानी भोपाल के नेहरू नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री Nirmala Bhuria ने बच्चों और उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला हैं, जहां पोषण और शिक्षा दोनों का समग्र ध्यान रखा जाता है।
मंत्री ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का समन्वित मंच हैं। गर्भावस्था से लेकर छह वर्ष की आयु तक बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से बच्चों को खेल-आधारित शिक्षा दी जाती है।
उन्होंने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के विकास का सबसे संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान दी गई शिक्षा और पोषण उन्हें आगे की विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार करता है। भारत सरकार के निर्देशानुसार अब आंगनवाड़ी में तीन वर्ष की प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने वाले बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ दिया जा रहा है, जिससे उनकी शिक्षा को औपचारिक मान्यता मिल सके।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव G V Rashmi ने कहा कि यह प्रमाणपत्र केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा यात्रा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी से स्कूल तक के संक्रमण को सहज और आनंददायक बनाना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों के विकास में माता-पिता, विशेषकर पिता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय ECCE नीति 2013 और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करना है। इससे न केवल बच्चों की स्कूल में प्रवेश दर बढ़ेगी, बल्कि उनकी पढ़ाई में निरंतरता भी बनी रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, वहीं अभिभावकों ने भी आंगनवाड़ी से बच्चों में आए सकारात्मक बदलाव साझा किए।
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रयास बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने के साथ-साथ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाएंगे।
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97 हजार केंद्रों में ‘विद्यारंभ’ उत्सव, 10 लाख बच्चों को मिला स्कूल की ओर पहला कदम सब-हेडलाइन
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब प्रदेश के 97 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘विद्यारंभ’ उत्सव आयोजित किया गया। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत करीब 10 लाख बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ देकर औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर उनके पहले कदम का सम्मान किया गया।
राजधानी भोपाल के नेहरू नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री Nirmala Bhuria ने बच्चों और उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला हैं, जहां पोषण और शिक्षा दोनों का समग्र ध्यान रखा जाता है।
मंत्री ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का समन्वित मंच हैं। गर्भावस्था से लेकर छह वर्ष की आयु तक बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से बच्चों को खेल-आधारित शिक्षा दी जाती है।
उन्होंने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के विकास का सबसे संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान दी गई शिक्षा और पोषण उन्हें आगे की विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार करता है। भारत सरकार के निर्देशानुसार अब आंगनवाड़ी में तीन वर्ष की प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने वाले बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ दिया जा रहा है, जिससे उनकी शिक्षा को औपचारिक मान्यता मिल सके।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव G V Rashmi ने कहा कि यह प्रमाणपत्र केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा यात्रा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी से स्कूल तक के संक्रमण को सहज और आनंददायक बनाना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों के विकास में माता-पिता, विशेषकर पिता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय ECCE नीति 2013 और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करना है। इससे न केवल बच्चों की स्कूल में प्रवेश दर बढ़ेगी, बल्कि उनकी पढ़ाई में निरंतरता भी बनी रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, वहीं अभिभावकों ने भी आंगनवाड़ी से बच्चों में आए सकारात्मक बदलाव साझा किए।
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रयास बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने के साथ-साथ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाएंगे।
