सतना कलेक्ट्रेट परिसर से लिपिक की स्कूटी चोरी, सीसीटीवी में कैद हुआ संदिग्ध

रीवा,(म.प्र.)

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संयुक्त कलेक्ट्रेट की पार्किंग से दिनदहाड़े स्कूटी गायब, दूसरी बार हुई ऐसी घटना; सुरक्षा व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन पर उठे सवाल।

सतना जिले के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर से एक बार फिर चोरी की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार को रघुराजनगर ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में पदस्थ एक लिपिक की स्कूटी कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग से चोरी हो गई। खास बात यह है कि पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। सरकारी कार्यालय परिसर से वाहन चोरी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक कर्मचारी की स्कूटी इसी परिसर से चोरी हो चुकी है, जिसके बाद अब सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार रघुराजनगर ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक शिवांक त्रिपाठी बुधवार सुबह अपनी स्कूटी क्रमांक एमपी-19-एमजे-9952 से कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने रोज की तरह अपनी स्कूटी संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग में खड़ी कर दी और कार्यालय के कामकाज में व्यस्त हो गए। कुछ समय बाद जब वह कार्यालय से बाहर निकले तो पार्किंग में उनकी स्कूटी नहीं थी। पहले उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन वाहन का कोई पता नहीं चला। इसके बाद मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक संदिग्ध व्यक्ति स्कूटी लेकर परिसर से बाहर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही उसे पकड़ने की उम्मीद है।

इस घटना ने कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त कलेक्ट्रेट जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक आते-जाते हैं। परिसर में सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात रहते हैं और लगभग हर हिस्से में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद दिनदहाड़े वाहन चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सबसे सुरक्षित सरकारी परिसर में ही वाहन सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। स्थानीय कर्मचारियों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब कलेक्ट्रेट परिसर से किसी कर्मचारी का वाहन चोरी हुआ हो। इससे पहले भी एक कर्मचारी की स्कूटी इसी परिसर से चोरी हो चुकी है। उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई थी, लेकिन हालिया घटना से लगता है कि सुरक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद कर्मचारियों में चिंता का माहौल है और वे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद पार्किंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग का संचालन ठेके के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि जब पार्किंग के लिए अलग से व्यवस्था और कर्मचारी मौजूद हैं, तो वाहन चोरी जैसी घटनाओं पर नजर क्यों नहीं रखी जा सकी। पार्किंग में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी उठने लगी है। कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि पार्किंग शुल्क लिया जाता है तो वाहन सुरक्षा की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

जानकारों का कहना है कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि प्रवेश और निकास द्वारों पर प्रभावी निगरानी होती तो संभव है कि आरोपी वाहन लेकर आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। यही वजह है कि अब कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज के अलावा आसपास के अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी जा रही है ताकि आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। साथ ही वाहन चोरी के पुराने मामलों से भी इस घटना का मिलान किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। उधर, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस घटना को केवल एक सामान्य चोरी मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यदि प्रशासनिक कार्यालय परिसर में लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहीं तो इससे सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। कर्मचारियों ने मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जाए, सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाए और परिसर में प्रवेश करने वाले हर वाहन और व्यक्ति का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था लागू की जाए।

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09 Jul 2026 By Vaishnavi.J

सतना कलेक्ट्रेट परिसर से लिपिक की स्कूटी चोरी, सीसीटीवी में कैद हुआ संदिग्ध

रीवा,(म.प्र.)

सतना जिले के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर से एक बार फिर चोरी की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार को रघुराजनगर ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में पदस्थ एक लिपिक की स्कूटी कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग से चोरी हो गई। खास बात यह है कि पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। सरकारी कार्यालय परिसर से वाहन चोरी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक कर्मचारी की स्कूटी इसी परिसर से चोरी हो चुकी है, जिसके बाद अब सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार रघुराजनगर ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक शिवांक त्रिपाठी बुधवार सुबह अपनी स्कूटी क्रमांक एमपी-19-एमजे-9952 से कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने रोज की तरह अपनी स्कूटी संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग में खड़ी कर दी और कार्यालय के कामकाज में व्यस्त हो गए। कुछ समय बाद जब वह कार्यालय से बाहर निकले तो पार्किंग में उनकी स्कूटी नहीं थी। पहले उन्होंने आसपास तलाश की, लेकिन वाहन का कोई पता नहीं चला। इसके बाद मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक संदिग्ध व्यक्ति स्कूटी लेकर परिसर से बाहर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है और जल्द ही उसे पकड़ने की उम्मीद है।

इस घटना ने कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त कलेक्ट्रेट जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक आते-जाते हैं। परिसर में सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात रहते हैं और लगभग हर हिस्से में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद दिनदहाड़े वाहन चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सबसे सुरक्षित सरकारी परिसर में ही वाहन सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। स्थानीय कर्मचारियों के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब कलेक्ट्रेट परिसर से किसी कर्मचारी का वाहन चोरी हुआ हो। इससे पहले भी एक कर्मचारी की स्कूटी इसी परिसर से चोरी हो चुकी है। उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई थी, लेकिन हालिया घटना से लगता है कि सुरक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद कर्मचारियों में चिंता का माहौल है और वे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद पार्किंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग का संचालन ठेके के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि जब पार्किंग के लिए अलग से व्यवस्था और कर्मचारी मौजूद हैं, तो वाहन चोरी जैसी घटनाओं पर नजर क्यों नहीं रखी जा सकी। पार्किंग में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी उठने लगी है। कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि पार्किंग शुल्क लिया जाता है तो वाहन सुरक्षा की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

जानकारों का कहना है कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि प्रवेश और निकास द्वारों पर प्रभावी निगरानी होती तो संभव है कि आरोपी वाहन लेकर आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। यही वजह है कि अब कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज के अलावा आसपास के अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी जा रही है ताकि आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। साथ ही वाहन चोरी के पुराने मामलों से भी इस घटना का मिलान किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। उधर, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस घटना को केवल एक सामान्य चोरी मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यदि प्रशासनिक कार्यालय परिसर में लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहीं तो इससे सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। कर्मचारियों ने मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जाए, सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी तय की जाए और परिसर में प्रवेश करने वाले हर वाहन और व्यक्ति का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था लागू की जाए।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/suspect-caught-on-cctv-stealing-clerks-scooter-from-satna-collectorate/article-58272

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