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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पाकिस्तान हुआ बेहाल, अब लगा रहा है राहत की गुहार
Digital Desk
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की सप्लाई और शिपिंग रूट पर खतरा बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से चढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जहां पहले से ही आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं। तेल की कीमतों में उछाल के कारण पाकिस्तान का आयात बिल बढ़ने की आशंका है और सरकार को नई आर्थिक रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हो रही है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। सोमवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 118.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं WTI क्रूड की कीमत भी शुक्रवार के 90.90 डॉलर के बंद स्तर से लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 118.21 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक बाजार में बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है, खासकर तब जब ऊर्जा आपूर्ति और प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान की आशंका बनी हुई है।
पाकिस्तान के तेल आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव इसी तरह बना रहता है तो पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल करीब 600 मिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेल की बढ़ती कीमतें देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकती हैं। पाकिस्तान पहले ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहा है, ऐसे में ऊर्जा आयात पर बढ़ने वाला खर्च सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है।
IMF से राहत की उम्मीद
तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत की उम्मीद जताई है। सरकार पेट्रोलियम लेवी में राहत देने के विकल्प पर विचार कर रही है और इस संबंध में IMF से बातचीत भी की जा रही है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार आर्थिक दबाव को कम करने के लिए हर संभव उपायों पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने के लिए ईंधन की खपत कम करने की अपील भी की है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी के बीच पाकिस्तान सरकार ने 7 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। इस फैसले का असर आम जनता और उद्योगों दोनों पर पड़ने की संभावना है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है।
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LNG सप्लाई और शिपिंग रूट को लेकर चिंता
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि सोमवार को तीन पेट्रोलियम शिपमेंट पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि LNG सप्लाई में संभावित रुकावट चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के अलावा वैकल्पिक समुद्री मार्गों को लेकर ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ बातचीत जारी है ताकि ईंधन आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।
बढ़ते संकट के बीच सरकार की तैयारी
तेल की कीमतों में तेजी से पाकिस्तान सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार इमरजेंसी योजनाओं पर काम कर रही है ताकि बढ़ते आयात बिल और ऊर्जा संकट के असर को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


