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लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने का गणित समझाया, परिसीमन पर बोले अमित शाह—किसी राज्य को नुकसान नहीं
नेशनल न्यूज
महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट किया फॉर्मूला, दक्षिणी राज्यों की सीटें भी बढ़ने का दावा
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और कुल सीटों में बढ़ोतरी के बाद संतुलन बनाए रखा जाएगा।
क्या है 850 सीटों का फॉर्मूला
अमित शाह ने सदन में बताया कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। परिसीमन के बाद इन सीटों में लगभग 50% की वृद्धि की जा सकती है, जिससे कुल संख्या 816 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि 850 सीटों का आंकड़ा केवल एक अनुमानित (राउंड फिगर) है। इसके साथ ही 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 सीटों में 33% आरक्षण लागू करना हो, तो पहले सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 करनी होगी। इससे आरक्षण लागू करने के बाद संतुलन बना रहेगा।
दक्षिणी राज्यों को भी मिलेगा लाभ
विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों को भी फायदा होगा। वर्तमान में दक्षिण के पांच राज्यों के पास 129 सीटें हैं, जो बढ़कर 195 हो सकती हैं। प्रतिशत के लिहाज से भी उनकी हिस्सेदारी लगभग समान बनी रहेगी।
राज्यों के अनुसार संभावित बढ़ोतरी:
तमिलनाडु: 39 से 59 सीट
केरल: 20 से 30 सीट
तेलंगाना: 17 से 26 सीट
आंध्र प्रदेश: 25 से 38 सीट
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी सबसे अधिक अतिरिक्त सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
परिसीमन प्रक्रिया और आधार
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग मौजूदा कानून के तहत ही काम करेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। इसके लिए संविधान के कई अनुच्छेदों—55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(ए)—में संशोधन प्रस्तावित हैं।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
बहस के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए। Priyanka Gandhi ने पूछा कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। Asaduddin Owaisi ने तर्क दिया कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय कर सकता है। वहीं Akhilesh Yadav ने इसे राजनीतिक रणनीति बताया।
सरकार का कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों प्रक्रियाएं संवैधानिक प्रावधानों के तहत होंगी और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर लागू की जाएंगी। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने का गणित समझाया, परिसीमन पर बोले अमित शाह—किसी राज्य को नुकसान नहीं
नेशनल न्यूज
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा और कुल सीटों में बढ़ोतरी के बाद संतुलन बनाए रखा जाएगा।
क्या है 850 सीटों का फॉर्मूला
अमित शाह ने सदन में बताया कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। परिसीमन के बाद इन सीटों में लगभग 50% की वृद्धि की जा सकती है, जिससे कुल संख्या 816 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि 850 सीटों का आंकड़ा केवल एक अनुमानित (राउंड फिगर) है। इसके साथ ही 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि 100 सीटों में 33% आरक्षण लागू करना हो, तो पहले सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 करनी होगी। इससे आरक्षण लागू करने के बाद संतुलन बना रहेगा।
दक्षिणी राज्यों को भी मिलेगा लाभ
विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों को भी फायदा होगा। वर्तमान में दक्षिण के पांच राज्यों के पास 129 सीटें हैं, जो बढ़कर 195 हो सकती हैं। प्रतिशत के लिहाज से भी उनकी हिस्सेदारी लगभग समान बनी रहेगी।
राज्यों के अनुसार संभावित बढ़ोतरी:
तमिलनाडु: 39 से 59 सीट
केरल: 20 से 30 सीट
तेलंगाना: 17 से 26 सीट
आंध्र प्रदेश: 25 से 38 सीट
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी सबसे अधिक अतिरिक्त सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
परिसीमन प्रक्रिया और आधार
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग मौजूदा कानून के तहत ही काम करेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। इसके लिए संविधान के कई अनुच्छेदों—55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(ए)—में संशोधन प्रस्तावित हैं।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
बहस के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए। Priyanka Gandhi ने पूछा कि मौजूदा 543 सीटों में ही 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। Asaduddin Owaisi ने तर्क दिया कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय कर सकता है। वहीं Akhilesh Yadav ने इसे राजनीतिक रणनीति बताया।
सरकार का कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों प्रक्रियाएं संवैधानिक प्रावधानों के तहत होंगी और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर लागू की जाएंगी। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
