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लेंसकार्ट पर ‘ग्रोमिंग गाइड’ विवाद: धार्मिक प्रतीकों पर रोक के दावे खारिज, कंपनी ने दी सफाई
बिजनेस न्यूज
सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज़ से बढ़ा विवाद, कंपनी बोली—सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान हमारी नीति का हिस्सा
आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart एक कथित ‘ग्रोमिंग गाइड’ को लेकर विवादों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक दस्तावेज़ में दावा किया गया कि कंपनी ने कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी, कलावा और हिजाब पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, कंपनी ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि यह दस्तावेज़ उसकी आधिकारिक गाइडलाइन को नहीं दर्शाता।
क्या है पूरा मामला
वायरल हो रहे डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या क्लचर पहनने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, हाथ में पहने जाने वाले धार्मिक धागे (कलावा) और रिस्ट बैंड को हटाने का निर्देश भी बताया गया। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया कि हिजाब या पगड़ी पहनने वाले कर्मचारियों को केवल काले रंग का ही उपयोग करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनी का लोगो दिखाई देता रहे। वहीं, बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही की बात भी सामने आई।
कंपनी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तथाकथित ‘ग्रोमिंग गाइड’ उसकी मौजूदा नीतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। कंपनी के अनुसार, वह सभी धर्मों और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करती है। बयान में कहा गया कि देशभर में हजारों कर्मचारी अपनी आस्था और परंपराओं के साथ काम करते हैं और कंपनी इसे प्रोत्साहित करती है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने कंपनी के स्पष्टीकरण के बाद संयम बरतने की अपील की। यह मुद्दा पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
विवाद के बीच कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की भी चर्चा हो रही है। दिसंबर तिमाही में लेंसकार्ट का मुनाफा करीब 70 गुना बढ़कर 1.85 करोड़ रुपए से 131 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह वृद्धि कंपनी के विस्तार और मजबूत बिक्री प्रदर्शन का संकेत मानी जा रही है।
फिलहाल कंपनी ने विवादित दस्तावेज़ से दूरी बनाते हुए अपनी समावेशी नीति पर जोर दिया है। हालांकि, इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत को लेकर विशेषज्ञों की राय सामने आ रही है। आने वाले समय में कंपनी अपनी आंतरिक नीतियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर सकती है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जा सके।
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लेंसकार्ट पर ‘ग्रोमिंग गाइड’ विवाद: धार्मिक प्रतीकों पर रोक के दावे खारिज, कंपनी ने दी सफाई
बिजनेस न्यूज
आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart एक कथित ‘ग्रोमिंग गाइड’ को लेकर विवादों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक दस्तावेज़ में दावा किया गया कि कंपनी ने कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी, कलावा और हिजाब पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, कंपनी ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि यह दस्तावेज़ उसकी आधिकारिक गाइडलाइन को नहीं दर्शाता।
क्या है पूरा मामला
वायरल हो रहे डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या क्लचर पहनने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, हाथ में पहने जाने वाले धार्मिक धागे (कलावा) और रिस्ट बैंड को हटाने का निर्देश भी बताया गया। दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया कि हिजाब या पगड़ी पहनने वाले कर्मचारियों को केवल काले रंग का ही उपयोग करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनी का लोगो दिखाई देता रहे। वहीं, बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही की बात भी सामने आई।
कंपनी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तथाकथित ‘ग्रोमिंग गाइड’ उसकी मौजूदा नीतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। कंपनी के अनुसार, वह सभी धर्मों और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करती है। बयान में कहा गया कि देशभर में हजारों कर्मचारी अपनी आस्था और परंपराओं के साथ काम करते हैं और कंपनी इसे प्रोत्साहित करती है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने कंपनी के स्पष्टीकरण के बाद संयम बरतने की अपील की। यह मुद्दा पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
विवाद के बीच कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की भी चर्चा हो रही है। दिसंबर तिमाही में लेंसकार्ट का मुनाफा करीब 70 गुना बढ़कर 1.85 करोड़ रुपए से 131 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह वृद्धि कंपनी के विस्तार और मजबूत बिक्री प्रदर्शन का संकेत मानी जा रही है।
फिलहाल कंपनी ने विवादित दस्तावेज़ से दूरी बनाते हुए अपनी समावेशी नीति पर जोर दिया है। हालांकि, इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत को लेकर विशेषज्ञों की राय सामने आ रही है। आने वाले समय में कंपनी अपनी आंतरिक नीतियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर सकती है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जा सके।
