"मुझे एक खिलौने में मिला सहारा": माँ द्वारा ठुकराए गए बंदर के बच्चे पंच-कुन की मार्मिक कहानी वायरल

Digital Desk

जापान में माँ द्वारा ठुकराए गए बंदर के बच्चे पंच-कुन की मार्मिक कहानी पढ़ें, जो अब एक खिलौने से चिपका रहता है। जानें बंदरों में भावनाएं होती हैं या नहीं।

एक वीडियो जिसने दुनिया भर में लाखों दिल पिघला दिए हैं, उसमें पंच-कुन नाम का एक छोटा जापानी मकाक बंदर एक बड़ी मादा बंदर द्वारा घसीटे जाने के बाद भागकर एक नारंगी रंग के ओरंगउटान स्टफ्ड टॉय से चिपक जाता है। जापान के इचिकावा सिटी चिड़ियाघर में कैद किया गया यह मार्मिक पल गहरे सवाल खड़े करता है: क्या बंदरों में भी इंसानों की तरह भावनाएं होती हैं? और एक बच्चा बंदर एक खिलौने को अपनी माँ क्यों मानने लगता है?

पंच-कुन के वायरल होने के पीछे की कहानी

25 जुलाई 2025 को, सिर्फ 500 ग्राम वजन के साथ पंच-कुन का जन्म हुआ। उसकी माँ, जो पहली बार माँ बनी थी, प्रसव के दौरान इतनी कमजोर हो गई कि उसने अपने नवजात पर कोई ध्यान नहीं दिया।

आमतौर पर जापानी मकाक के समूह में अन्य मादाएं बच्चे की देखभाल में मदद करती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि समूह की किसी भी अन्य मादा ने इस त्यागे गए बच्चे को गोद लेने की कोशिश नहीं की। चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने अगले ही दिन से उसे बोतल से दूध पिलाना शुरू कर दिया।

हाल ही में वायरल हुआ दिल दहला देने वाला वीडियो तब का है जब पंच-कुन एक दूसरे बच्चे बंदर के पास जाने की कोशिश कर रहा था। तभी एक बड़ी मादा बंदर ने, शायद अपने बच्चे की सुरक्षा में, उसे पकड़कर जमीन पर घुमा दिया। उसकी पकड़ से छूटते ही डरा हुआ बच्चा सीधे अपने प्यारे नारंगी ओरंगउटान खिलौने के पास भाग गया, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स ने प्यार से "ओरा-मॉम" नाम दिया है।

बच्चे ने असली बंदरों की जगह खिलौना क्यों चुना?

इस सवाल का जवाब छह दशक से भी पहले के वैज्ञानिक शोध में छिपा है।

डॉ. हैरी हार्लो का 1958 का प्रसिद्ध "बंदर प्रयोग" ने बंदर के बच्चों और लगाव के बारे में एक असाधारण तथ्य उजागर किया। जब बंदर के बच्चों को उनकी असली माँओं से अलग कर दिया गया, तो उनके सामने दो विकल्प रखे गए: एक तार से बनी "माँ" जिसके पास दूध की बोतल थी, और दूसरी मुलायम कपड़े से बनी "माँ" जिसके पास कोई भोजन नहीं था।

नतीजे चौंकाने वाले थे। बंदर के बच्चे 70% समय मुलायम कपड़े वाली माँ से चिपके रहते थे, और केवल भूख लगने पर ही तार वाली माँ के पास जाते थे। जब उनके पास डरावनी चीज़ें रखी जातीं, तो वे भोजन देने वाली माँ के पास नहीं, बल्कि मुलायम और आराम देने वाली कपड़े की माँ के पास भागते थे।

इससे साबित हुआ कि बंदर के बच्चों के लिए "स्पर्श से मिलने वाला आराम" (touch comfort) यानी गले लगने और सहलाए जाने का एहसास, केवल दूध पिलाने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

क्या सच में बंदरों में इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं?

प्राइमेटोलॉजिस्ट डॉ. फ्रैंस डी वाल कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि मानवीय भावनाएं केवल इंसानों में ही पाई जाती हैं। हमारी भावनाएं अधिक विस्तृत और परिष्कृत हुई हैं, लेकिन मूल रूप से वे बंदरों से अलग नहीं हैं।"

वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि बंदरों में भावनाएं होती हैं:

- दिमाग की बनावट: बंदरों के दिमाग में वही हिस्से होते हैं जो इंसानों में भावनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं

- तनाव प्रतिक्रिया: तनावपूर्ण स्थितियों में बंदरों में भी कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है

- शोक: मादा बंदरें अपने मृत बच्चों को दिनों तक ढोती रहती हैं

- निष्पक्षता की भावना: जब बंदरों को लगता है कि दूसरे बंदर को ज्यादा या बेहतर खाना मिल रहा है, तो वे विरोध करते हैं

हालांकि, बंदरों में भावनाएं कुछ मामलों में इंसानों से कम विकसित होती हैं। शर्म, गर्व या गहन चिंतन जैसी जटिल भावनाएं उनमें उतनी विकसित नहीं होतीं।

पंच-कुन पर दूसरे बंदरों ने हमला क्यों किया?

26 जनवरी 2026 को पंच-कुन को लगभग 60 मकाक बंदरों के समूह वाले बाड़े में डाला गया। वहाँ वह दूसरे बंदरों के निशाने पर आ गया।

नेचर वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के अनुसार, मकाक के समूह उन सदस्यों को अस्वीकार कर सकते हैं जिन्हें वे अलग या अजीब समझते हैं। पंच-कुन का अपने खिलौने से लगाव उसे दूसरों से अलग कर रहा था, जिससे वह आसान लक्ष्य बन गया।

अब कैसा है पंच-कुन?

इचिकावा सिटी चिड़ियाघर ने स्टाफ की ड्यूटी इस तरह तय की है कि वे पंच-कुन से नियमित मिलते रहें। जब भी कोई स्टाफ सदस्य खाना देने अंदर जाता है, पंच-कुन तुरंत उनके पैरों से चिपक जाता है।

चिड़ियाघर अधिकारियों के अनुसार, पंच-कुन धीरे-धीरे दूसरे बंदरों से घुल-मिल रहा है। उम्मीद है कि वह जल्द ही एक सामान्य बंदर की तरह समूह में रहना सीख जाएगा।

जापानी मकाक के बारे में खास बातें

मकाक दुनिया के सबसे बुद्धिमान और अनुकूलनशील बंदरों में से हैं:

- वे सामाजिक समूहों में रहते हैं जिनमें एक पदानुक्रम होता है

- एक-दूसरे की खुजली करना उनके सामाजिक संबंध बनाने का तरीका है

- भारत में आम दिखने वाले लाल मुँह वाले बंदर भी मकाक की ही प्रजाति हैं

पंच-कुन की कहानी एक सार्वभौमिक सत्य को छूती है - आराम, सुरक्षा और लगाव की बुनियादी ज़रूरत जो प्रजातियों से परे है। एक स्टफ्ड टॉय में माँ का सहारा ढूंढने वाला यह छोटा बंदर हमें याद दिलाता है कि इंसानों और जानवरों की भावनाओं के बीच की रेखा उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी हम सोचते हैं।

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