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ईरान-अमेरिका में 45 दिन के सीजफायर पर अंतिम दौर की बातचीत, अगले 48 घंटे निर्णायक
अंतराष्ट्रीय न्यूज
समझौता न होने पर अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर बड़े हमलों की तैयारी की
ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीजफायर पर बातचीत का अंतिम दौर चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 48 घंटे इस डील के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। यदि समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रखी है।
एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में 45 दिन का सीजफायर लागू होगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ के रूप में शामिल हैं। मध्यस्थों का कहना है कि यदि तय समय सीमा में डील नहीं होती है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव और तेज हो सकता है।
ईरान ने फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट और अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई बड़ी रियायत देने से इनकार कर दिया है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने चेतावनी दी है कि किसी भी बड़े हमले का जवाब केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने बाब-अल-मंदेब और अन्य समुद्री रास्तों को भी खतरे में बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का अल्टीमेटम दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वहां पावर प्लांट और पुलों पर हमले किए जाएंगे।
इस बीच, हालिया घटनाओं में तेहरान, हाइफा और अन्य शहरों में मिसाइल हमलों और ड्रोन स्ट्राइक की खबरें सामने आई हैं। तेहरान में हमले में 4 लोगों की मौत और 7 अन्य घायल हुए, जबकि हाइफा में दो शव बरामद हुए और दो लोग लापता हैं। इजराइल ने भी ईरान के कई सरकारी ठिकानों पर हमले किए।
ईरान ने ट्रम्प के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका और इजराइल के लिए पहले जैसा नहीं रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता बढ़ रही है। चीन और रूस ने अमेरिका और ईरान को युद्ध रोकने और जल्द से जल्द सीजफायर लागू करने के लिए कहा।
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ईरान-अमेरिका में 45 दिन के सीजफायर पर अंतिम दौर की बातचीत, अगले 48 घंटे निर्णायक
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के सीजफायर पर बातचीत का अंतिम दौर चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 48 घंटे इस डील के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। यदि समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बना रखी है।
एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में 45 दिन का सीजफायर लागू होगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ के रूप में शामिल हैं। मध्यस्थों का कहना है कि यदि तय समय सीमा में डील नहीं होती है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव और तेज हो सकता है।
ईरान ने फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट और अपने परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई बड़ी रियायत देने से इनकार कर दिया है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने चेतावनी दी है कि किसी भी बड़े हमले का जवाब केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने बाब-अल-मंदेब और अन्य समुद्री रास्तों को भी खतरे में बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने का अल्टीमेटम दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वहां पावर प्लांट और पुलों पर हमले किए जाएंगे।
इस बीच, हालिया घटनाओं में तेहरान, हाइफा और अन्य शहरों में मिसाइल हमलों और ड्रोन स्ट्राइक की खबरें सामने आई हैं। तेहरान में हमले में 4 लोगों की मौत और 7 अन्य घायल हुए, जबकि हाइफा में दो शव बरामद हुए और दो लोग लापता हैं। इजराइल ने भी ईरान के कई सरकारी ठिकानों पर हमले किए।
ईरान ने ट्रम्प के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका और इजराइल के लिए पहले जैसा नहीं रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता बढ़ रही है। चीन और रूस ने अमेरिका और ईरान को युद्ध रोकने और जल्द से जल्द सीजफायर लागू करने के लिए कहा।
