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‘द लास्ट सैल्यूट’ में गूंजेगी आलोक श्रीवास्तव की कविता, शरद केलकर की आवाज ने बढ़ाया भावनात्मक असर
बालीवुड न्यूज़
मिग-21 की 62 साल की यात्रा पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कविता से हुई शुरुआत, कवि ने फिल्म से जुड़ने पर जताई खुशी
भारतीय वायुसेना और मिग-21 के लंबे सफर को समर्पित डॉक्यूमेंट्री ‘द लास्ट सैल्यूट’ दर्शकों के सामने आ चुकी है। 26 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म में देश के लड़ाकू विमान और उससे जुड़ी पीढ़ियों की यादों को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। डॉक्यूमेंट्री की शुरुआत कवि आलोक श्रीवास्तव की कविता से होती है, जिसे अभिनेता शरद केलकर ने अपनी दमदार आवाज दी है। यह डॉक्यूमेंट्री ऐसे समय में सामने आई है, जब नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को भी दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। सीरीज ग्लोबल टॉप 10 नॉन-इंग्लिश टीवी लिस्ट में दूसरे स्थान तक पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में ‘द लास्ट सैल्यूट’ मिग-21 के इतिहास और उससे जुड़े सैनिकों की भावनाओं पर केंद्रित है।
कविता से शुरू होती है मिग-21 की कहानी
फिल्म की शुरुआती प्रस्तुति में आलोक श्रीवास्तव की कविता के जरिए मिग-21 के सफर को भावनात्मक रूप दिया गया है। कविता में विमान से जुड़ी भारतीय वायुसेना की यादों, जवानों के समर्पण और इसके छह दशक से अधिक लंबे सफर की झलक मिलती है। शरद केलकर की गंभीर और प्रभावशाली आवाज इस कविता को डॉक्यूमेंट्री के माहौल के अनुरूप प्रस्तुत करती है। इससे फिल्म की शुरुआत में ही दर्शकों को मिग-21 से जुड़े गौरव और भावनात्मक पहलुओं से जोड़ा जाता है।
आलोक श्रीवास्तव ने जताया सम्मान
डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा बनने पर आलोक श्रीवास्तव ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि बहादुर भारतीय सैनिकों की कहानी से जुड़ी फिल्म में योगदान देना उनके लिए सम्मान की बात है। कवि ने निर्देशक कुशल श्रीवास्तव का भी आभार जताया और कहा कि उन्होंने उन्हें अपनी रचनात्मक यात्रा में शामिल किया। आलोक ने विशेष तौर पर शरद केलकर की आवाज में कविता की प्रस्तुति को लेकर खुशी जाहिर की।
अमिताभ बच्चन भी दे चुके हैं कविता को आवाज
आलोक श्रीवास्तव की कविताओं को इससे पहले भी बड़े कलाकारों की आवाज मिल चुकी है। अभिनेता अमिताभ बच्चन भी उनकी कविताओं का पाठ कर चुके हैं। ऐसे में ‘द लास्ट सैल्यूट’ में शरद केलकर की आवाज के जरिए उनकी कविता का सामने आना उनके साहित्यिक सफर की एक और खास कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
मिग-21 के इतिहास को केंद्र में रखती है डॉक्यूमेंट्री
‘द लास्ट सैल्यूट’ का केंद्र भारतीय वायुसेना में मिग-21 की भूमिका और उससे जुड़ी यादें हैं। डॉक्यूमेंट्री विमान की 62 साल की यात्रा के साथ उन जवानों की कहानियों और अनुभवों को सामने लाने की कोशिश करती है, जिनका करियर और जीवन इस लड़ाकू विमान से किसी न किसी रूप में जुड़ा रहा।
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