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बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या में सामने आया नया कनेक्शन, बाइक नंबर से खुला बड़ा राज
नेशनल डेस्क
शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या मामले में धनबाद कनेक्शन सामने आया। अपराधियों ने फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया, जांच में बड़ा खुलासा।
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले ने अब झारखंड के धनबाद से जुड़ा एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में इस्तेमाल की गई बाइक पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह असल में धनबाद के एक कर्मचारी विभाष भट्टाचार्य की बाइक का रजिस्टर्ड नंबर था, जिसे अपराधियों ने फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बंगाल पुलिस की एसआईटी टीम भी जांच के सिलसिले में देर रात धनबाद पहुंची और कई घंटे तक स्थानीय स्तर पर पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से पहचान छिपाने की कोशिश का हिस्सा लग रहा है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई परतें खुलती चली गईं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अपराधियों ने जिस बाइक का इस्तेमाल वारदात में किया, उस पर JH सीरीज का नंबर प्लेट लगाया गया था, जिससे झारखंड कनेक्शन की आशंका मजबूत हुई। जब इस नंबर को ट्रेस किया गया तो यह धनबाद के पाथरडीह इलाके में तैनात एक कर्मचारी विभाष भट्टाचार्य के नाम पर दर्ज पाया गया। इसके बाद जांच टीम चास नाला कार्यालय तक पहुंची, जहां से यह जानकारी भी मिली कि भट्टाचार्य मूल रूप से बंगाल के बर्नपुर के रहने वाले हैं और उनका तबादला कुछ साल पहले झारखंड में हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम ने जांच को और पेचीदा बना दिया, क्योंकि शुरुआती तौर पर ऐसा लग रहा था कि अपराधियों ने जानबूझकर किसी और की पहचान का इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की है।
हालांकि, जांच के दौरान एक अहम मोड़ तब आया जब विभाष भट्टाचार्य की लोकेशन और गतिविधियों की पुष्टि की गई। उनके कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह साफ हो गया कि घटना के समय वह अपने कार्यस्थल पर ही मौजूद थे। इससे उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिल गई है। पुलिस के अनुसार हत्यारों ने न सिर्फ बाइक का नंबर चुराया बल्कि उसे दूसरी बाइक पर फर्जी तरीके से चिपकाकर इस्तेमाल किया, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि यह फर्जी नंबर प्लेट किसने और किस नेटवर्क के जरिए तैयार की और इसका इस्तेमाल किन लोगों ने किया।
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बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या में सामने आया नया कनेक्शन, बाइक नंबर से खुला बड़ा राज
नेशनल डेस्क
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले ने अब झारखंड के धनबाद से जुड़ा एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में इस्तेमाल की गई बाइक पर जो नंबर प्लेट लगी थी, वह असल में धनबाद के एक कर्मचारी विभाष भट्टाचार्य की बाइक का रजिस्टर्ड नंबर था, जिसे अपराधियों ने फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बंगाल पुलिस की एसआईटी टीम भी जांच के सिलसिले में देर रात धनबाद पहुंची और कई घंटे तक स्थानीय स्तर पर पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से पहचान छिपाने की कोशिश का हिस्सा लग रहा है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई परतें खुलती चली गईं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अपराधियों ने जिस बाइक का इस्तेमाल वारदात में किया, उस पर JH सीरीज का नंबर प्लेट लगाया गया था, जिससे झारखंड कनेक्शन की आशंका मजबूत हुई। जब इस नंबर को ट्रेस किया गया तो यह धनबाद के पाथरडीह इलाके में तैनात एक कर्मचारी विभाष भट्टाचार्य के नाम पर दर्ज पाया गया। इसके बाद जांच टीम चास नाला कार्यालय तक पहुंची, जहां से यह जानकारी भी मिली कि भट्टाचार्य मूल रूप से बंगाल के बर्नपुर के रहने वाले हैं और उनका तबादला कुछ साल पहले झारखंड में हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम ने जांच को और पेचीदा बना दिया, क्योंकि शुरुआती तौर पर ऐसा लग रहा था कि अपराधियों ने जानबूझकर किसी और की पहचान का इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की है।
हालांकि, जांच के दौरान एक अहम मोड़ तब आया जब विभाष भट्टाचार्य की लोकेशन और गतिविधियों की पुष्टि की गई। उनके कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह साफ हो गया कि घटना के समय वह अपने कार्यस्थल पर ही मौजूद थे। इससे उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिल गई है। पुलिस के अनुसार हत्यारों ने न सिर्फ बाइक का नंबर चुराया बल्कि उसे दूसरी बाइक पर फर्जी तरीके से चिपकाकर इस्तेमाल किया, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि यह फर्जी नंबर प्लेट किसने और किस नेटवर्क के जरिए तैयार की और इसका इस्तेमाल किन लोगों ने किया।
