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मदर्स डे 2026 स्पेशल: गरीबी, बीमारी और तंगी से लड़कर इन 5 माताओं ने रच दी सफलता की कहानी
Digital Desk
Mother's Day 2026 पर 5 माताओं की संघर्ष और सफलता की कहानियां। किसी ने कारोबार खड़ा किया, किसी ने बीमारी से लड़कर नया जीवन बनाया।
Mother's Day 2026 के मौके पर देशभर से ऐसी कई कहानियां सामने आई हैं जो बताती हैं कि मां सिर्फ परिवार संभालने वाली नहीं होती, बल्कि हालात बदल देने की ताकत भी रखती है. जिंदगी ने जब-जब इन महिलाओं को मुश्किल मोड़ पर खड़ा किया, तब-तब उन्होंने टूटने की बजाय खुद को और मजबूत बनाया. कहीं गरीबी ने दरवाजा खटखटाया तो कहीं बीमारी ने परिवार की जड़ें हिला दीं, लेकिन इन माताओं ने हर चुनौती को अपने संघर्ष से जवाब दिया. आज ये महिलाएं सिर्फ अपने बच्चों की परवरिश ही नहीं कर रही हैं, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं. Mother's Day 2026 पर इनकी कहानियां खास इसलिए भी हैं क्योंकि ये असल जिंदगी की लड़ाइयों से निकली जीत की मिसाल हैं.
हरियाणा की पूनम शर्मा की कहानी सबसे पहले सामने आती है, जिनकी जिंदगी एक समय पूरी तरह टूटने के कगार पर पहुंच गई थी. पति की नौकरी जाने के बाद घर में आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि बच्चों की पढ़ाई तक रुक गई. पूनम बताती हैं कि वही दिन उनके लिए सबसे भारी था, जब बच्चों को स्कूल से निकालना पड़ा. फिर अचानक उनकी तबीयत भी बिगड़ी और उन्हें आंशिक लकवा हो गया. महीनों तक बिस्तर पर रहने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. घर से ही बाजरे से बने उत्पाद तैयार करने शुरू किए और धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया. आज उनकी कंपनी 'दादी का पिटारा' कई शहरों तक पहुंच चुकी है. इसी तरह महाराष्ट्र की गीता पाटिल ने भी पति की नौकरी जाने के बाद घर की रसोई को ही कारोबार बना दिया. मोदक, पूरनपोली और स्नैक्स बनाकर उन्होंने शुरुआत की और आज उनका काम करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच गया है. वहीं उत्तर प्रदेश की लवीना जैन ने कैंसर जैसी बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच सिर्फ 1500 रुपये से अचार और शरबत बनाना शुरू किया, जो आज कई शहरों में बिक रहा है. पश्चिम बंगाल की इंदिरा धार ने फिल्म बनाने के अपने सपने के लिए गहने तक बेच दिए और उनकी फिल्म 'पुतुल' को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली. बेंगलुरु की नेहा बगड़िया ने भी मां बनने के बाद महसूस किया कि कई महिलाएं करियर ब्रेक के बाद पीछे छूट जाती हैं, इसलिए उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जो महिलाओं को दोबारा नौकरी से जोड़ता है.
इन सभी कहानियों में एक बात साफ दिखती है कि मुश्किलें चाहे जितनी बड़ी हों, मां का जज़्बा उनसे बड़ा होता है. कहीं रसोई से कारोबार खड़ा हुआ तो कहीं बीमारी के बीच नई शुरुआत मिली. Mother's Day 2026 पर ये महिलाएं इस बात की मिसाल बन गई हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हिम्मत और मेहनत साथ हो तो जिंदगी बदली जा सकती है. आज सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों तक इनकी कहानियां चर्चा में हैं और लोग इन्हें सलाम कर रहे हैं. सच यही है कि मां सिर्फ घर नहीं चलाती, वह पूरी जिंदगी को नई दिशा भी देती है.
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मदर्स डे 2026 स्पेशल: गरीबी, बीमारी और तंगी से लड़कर इन 5 माताओं ने रच दी सफलता की कहानी
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Mother's Day 2026 के मौके पर देशभर से ऐसी कई कहानियां सामने आई हैं जो बताती हैं कि मां सिर्फ परिवार संभालने वाली नहीं होती, बल्कि हालात बदल देने की ताकत भी रखती है. जिंदगी ने जब-जब इन महिलाओं को मुश्किल मोड़ पर खड़ा किया, तब-तब उन्होंने टूटने की बजाय खुद को और मजबूत बनाया. कहीं गरीबी ने दरवाजा खटखटाया तो कहीं बीमारी ने परिवार की जड़ें हिला दीं, लेकिन इन माताओं ने हर चुनौती को अपने संघर्ष से जवाब दिया. आज ये महिलाएं सिर्फ अपने बच्चों की परवरिश ही नहीं कर रही हैं, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं. Mother's Day 2026 पर इनकी कहानियां खास इसलिए भी हैं क्योंकि ये असल जिंदगी की लड़ाइयों से निकली जीत की मिसाल हैं.
हरियाणा की पूनम शर्मा की कहानी सबसे पहले सामने आती है, जिनकी जिंदगी एक समय पूरी तरह टूटने के कगार पर पहुंच गई थी. पति की नौकरी जाने के बाद घर में आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि बच्चों की पढ़ाई तक रुक गई. पूनम बताती हैं कि वही दिन उनके लिए सबसे भारी था, जब बच्चों को स्कूल से निकालना पड़ा. फिर अचानक उनकी तबीयत भी बिगड़ी और उन्हें आंशिक लकवा हो गया. महीनों तक बिस्तर पर रहने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. घर से ही बाजरे से बने उत्पाद तैयार करने शुरू किए और धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया. आज उनकी कंपनी 'दादी का पिटारा' कई शहरों तक पहुंच चुकी है. इसी तरह महाराष्ट्र की गीता पाटिल ने भी पति की नौकरी जाने के बाद घर की रसोई को ही कारोबार बना दिया. मोदक, पूरनपोली और स्नैक्स बनाकर उन्होंने शुरुआत की और आज उनका काम करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच गया है. वहीं उत्तर प्रदेश की लवीना जैन ने कैंसर जैसी बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच सिर्फ 1500 रुपये से अचार और शरबत बनाना शुरू किया, जो आज कई शहरों में बिक रहा है. पश्चिम बंगाल की इंदिरा धार ने फिल्म बनाने के अपने सपने के लिए गहने तक बेच दिए और उनकी फिल्म 'पुतुल' को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली. बेंगलुरु की नेहा बगड़िया ने भी मां बनने के बाद महसूस किया कि कई महिलाएं करियर ब्रेक के बाद पीछे छूट जाती हैं, इसलिए उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जो महिलाओं को दोबारा नौकरी से जोड़ता है.
इन सभी कहानियों में एक बात साफ दिखती है कि मुश्किलें चाहे जितनी बड़ी हों, मां का जज़्बा उनसे बड़ा होता है. कहीं रसोई से कारोबार खड़ा हुआ तो कहीं बीमारी के बीच नई शुरुआत मिली. Mother's Day 2026 पर ये महिलाएं इस बात की मिसाल बन गई हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हिम्मत और मेहनत साथ हो तो जिंदगी बदली जा सकती है. आज सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों तक इनकी कहानियां चर्चा में हैं और लोग इन्हें सलाम कर रहे हैं. सच यही है कि मां सिर्फ घर नहीं चलाती, वह पूरी जिंदगी को नई दिशा भी देती है.
