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NTA ने आंसर की फीस पर दी सफाई, सही आपत्ति पर लौटेंगे पैसे
भारत
UGC-NET आंसर की को चुनौती देने पर प्रति सवाल 200 रुपये शुल्क, एजेंसी ने कहा- फीस का मकसद बेवजह आपत्तियां रोकना है
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने परीक्षा की आंसर की को चुनौती देने के लिए ली जाने वाली फीस को लेकर छात्रों के बीच उठ रहे सवालों पर अपनी स्थिति साफ की है। एजेंसी के मुताबिक, किसी उम्मीदवार को अगर आंसर की में किसी सवाल का जवाब गलत लगता है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उस पर आपत्ति दर्ज कर सकता है। इसके लिए प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क रखा गया है। NTA का कहना है कि इस राशि को लेने का उद्देश्य छात्रों से कमाई करना नहीं, बल्कि केवल गंभीर और तथ्य आधारित आपत्तियों को सामने लाना है। एजेंसी के अनुसार यदि किसी छात्र की आपत्ति जांच के बाद सही पाई जाती है तो संबंधित शुल्क वापस किया जाएगा। ऐसी स्थिति में सुधार का फायदा केवल आपत्ति दर्ज कराने वाले छात्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उस प्रश्न से जुड़े सभी उम्मीदवारों के परिणाम पर इसका असर पड़ सकता है।
UGC-NET की हालिया आंसर की को लेकर भी छात्रों के बीच कई सवाल उठे थे। NTA ने 16 अगस्त को 84 विषयों के लिए आंसर की जारी की थी। इसी दौरान इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा को रद्द करने का फैसला सामने आया। एजेंसी के मुताबिक इन तीनों पेपर में प्रश्नों से जुड़ी स्पेलिंग और प्रिंटिंग संबंधी गड़बड़ियां मिली थीं। कुछ सवाल ऐसे भी थे जो पहले आयोजित परीक्षाओं में पूछे जा चुके थे। छात्रों की ओर से आंसर की सामने आने के बाद इन खामियों की जानकारी दी गई। NTA ने बताया कि केवल संबंधित प्रश्न हटाकर समस्या का समाधान करना उचित नहीं था, इसलिए इन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया।
री-एग्जाम को लेकर NTA ने कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। इंग्लिश विषय की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। उसी दिन कॉमर्स का पेपर दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित किया जाएगा। सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रखी गई है। एजेंसी ने साफ किया है कि इन तीन विषयों के जिन उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, उनसे री-एग्जाम के लिए अलग से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यानी पहले परीक्षा के लिए जमा की गई फीस के बाद दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों पर नया आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
आंसर की पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर NTA की ओर से बताया गया है कि उम्मीदवारों को किसी सवाल पर चुनौती तभी देनी चाहिए जब उनके पास उसके समर्थन में ठोस आधार हो। परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में ऐसी आपत्तियां भी सामने आती हैं जिनमें उम्मीदवार बिना पर्याप्त प्रमाण के जवाब को गलत बताते हैं। एजेंसी का कहना है कि प्रति प्रश्न शुल्क रखने का एक कारण ऐसी गैर-जरूरी आपत्तियों को कम करना भी है। अगर हर सवाल पर बिना किसी शुल्क के आपत्ति की अनुमति हो, तो बड़ी संख्या में शिकायतें आने से प्रक्रिया लंबी हो सकती है और वास्तविक आपत्तियों की जांच में भी समय लग सकता है। इसी वजह से शुल्क व्यवस्था रखी गई है। हालांकि, सही आपत्ति सामने आने पर पैसा वापस करने का प्रावधान छात्रों के लिए अहम है।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि आंसर की में किसी सवाल की गलती सामने आने पर उसका असर केवल शिकायत करने वाले उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहता। यदि जांच में यह साबित होता है कि प्रश्न या उत्तर में वास्तव में त्रुटि है, तो परीक्षा परिणाम तैयार करते समय उसके अनुसार आवश्यक सुधार किया जा सकता है। इसका फायदा उस प्रश्न का उत्तर देने वाले दूसरे उम्मीदवारों को भी मिल सकता है। यानी एक छात्र द्वारा उठाई गई सही आपत्ति से पूरी परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार हो सकता है। यही वजह है कि NTA छात्रों से कह रही है कि अगर किसी उत्तर पर वास्तविक संदेह है तो निर्धारित समय के भीतर आपत्ति जरूर दर्ज करें।
UGC-NET परीक्षा को लेकर इस बार पहले से ही छात्रों की नजर NTA की हर घोषणा पर बनी हुई है। इस परीक्षा का आयोजन पहले 22 जून से 30 जून के बीच किया गया था। परीक्षा के बाद आंसर की का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए 16 अगस्त को इसे जारी किया गया। लेकिन उसी समय तीन विषयों की परीक्षा रद्द होने की जानकारी आने से छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति भी बनी। अब इन विषयों की नई परीक्षा सितंबर में होगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि परीक्षा से जुड़ी तारीख, शिफ्ट और अन्य जानकारी के लिए आधिकारिक सूचना पर नजर रखें।
NTA की कार्यप्रणाली को लेकर पिछले कुछ समय में सवाल भी उठते रहे हैं। इसी साल 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को लेकर पेपर लीक का मामला सामने आया था और बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इससे पहले 2024 में भी NEET को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों ने काफी चर्चा बटोरी थी। ऐसे मामलों के बीच आंसर की, आपत्ति प्रक्रिया और परीक्षा दोबारा कराने जैसे फैसले छात्रों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उम्मीदवार अब खासतौर पर यह देख रहे हैं कि आपत्तियों की जांच किस तरह होती है और रद्द किए गए तीन विषयों की सितंबर में होने वाली परीक्षा किस व्यवस्था के तहत कराई जाती है।
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