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PM मोदी के पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर स्टेशन पर खालिस्तान समर्थक नारे
Digital Desk
ट्रेन के डिब्बों पर लिखे मिले आपत्तिजनक संदेश, SFJ ने जारी किया वीडियो; पुलिस CCTV फुटेज खंगालने में जुटी, प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हाई अलर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन के डिब्बों पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' और 'मोदी मुर्दाबाद' जैसे नारे लिखे दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से जारी किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 और 17 जुलाई के बीच पंजाब दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान उनके लुधियाना और जालंधर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन की नई इमारत का उद्घाटन भी प्रस्तावित कार्यक्रमों में शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा चंडीगढ़ में भी कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन की संभावना है। ऐसे में इस तरह की घटना को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेन के डिब्बों पर नारे किसने और कब लिखे। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि यह घटना रात के समय हुई, जब स्टेशन पर गतिविधियां अपेक्षाकृत कम थीं। पुलिस उन संदिग्ध लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया।
सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। रेलवे स्टेशन, प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो में प्रतिबंधित संगठन SFJ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आतंकवाद के दौर के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का भी उल्लेख किया है। पन्नू ने कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकार उल्लंघन के पुराने मामलों का जिक्र करते हुए अपने बयान में कई आरोप लगाए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा का नाम पंजाब के इतिहास में एक चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में लिया जाता है। वह अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े थे और शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। उन्होंने 1990 के दशक में कथित फर्जी एनकाउंटर और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किया था। उनके द्वारा जारी रिपोर्टों ने उस समय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी। बाद में वे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे।
हाल के दिनों में जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित एक फिल्म भी चर्चा में रही, लेकिन विभिन्न कारणों से उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया गया और बाद में उस पर रोक लगा दी गई। अब पन्नू ने अपने वीडियो में उनके नाम का उल्लेख करते हुए फिर से उन पुराने मुद्दों को उठाने की कोशिश की है।
सिख फॉर जस्टिस (SFJ) भारत में प्रतिबंधित संगठन है, जो अलग खालिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय रहता है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 2007 में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका में की थी। संगठन लंबे समय से तथाकथित 'रेफरेंडम 2020' अभियान चलाकर पंजाब को भारत से अलग करने की मांग करता रहा है। भारत सरकार ने 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 2020 में गुरपतवंत सिंह पन्नू को भी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया गया।
सरकार का आरोप है कि SFJ विदेशों से संचालित होकर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और युवाओं को भड़काने का प्रयास करता है। केंद्र सरकार पहले भी संगठन से जुड़े कई वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है।
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PM मोदी के पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर स्टेशन पर खालिस्तान समर्थक नारे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन के डिब्बों पर 'खालिस्तान जिंदाबाद' और 'मोदी मुर्दाबाद' जैसे नारे लिखे दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से जारी किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 और 17 जुलाई के बीच पंजाब दौरा प्रस्तावित है। इस दौरान उनके लुधियाना और जालंधर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन की नई इमारत का उद्घाटन भी प्रस्तावित कार्यक्रमों में शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा चंडीगढ़ में भी कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन की संभावना है। ऐसे में इस तरह की घटना को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेन के डिब्बों पर नारे किसने और कब लिखे। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि यह घटना रात के समय हुई, जब स्टेशन पर गतिविधियां अपेक्षाकृत कम थीं। पुलिस उन संदिग्ध लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया।
सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। रेलवे स्टेशन, प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो में प्रतिबंधित संगठन SFJ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आतंकवाद के दौर के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का भी उल्लेख किया है। पन्नू ने कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकार उल्लंघन के पुराने मामलों का जिक्र करते हुए अपने बयान में कई आरोप लगाए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा का नाम पंजाब के इतिहास में एक चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में लिया जाता है। वह अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े थे और शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। उन्होंने 1990 के दशक में कथित फर्जी एनकाउंटर और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किया था। उनके द्वारा जारी रिपोर्टों ने उस समय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी। बाद में वे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे।
हाल के दिनों में जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित एक फिल्म भी चर्चा में रही, लेकिन विभिन्न कारणों से उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया गया और बाद में उस पर रोक लगा दी गई। अब पन्नू ने अपने वीडियो में उनके नाम का उल्लेख करते हुए फिर से उन पुराने मुद्दों को उठाने की कोशिश की है।
सिख फॉर जस्टिस (SFJ) भारत में प्रतिबंधित संगठन है, जो अलग खालिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय रहता है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 2007 में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका में की थी। संगठन लंबे समय से तथाकथित 'रेफरेंडम 2020' अभियान चलाकर पंजाब को भारत से अलग करने की मांग करता रहा है। भारत सरकार ने 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 2020 में गुरपतवंत सिंह पन्नू को भी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया गया।
सरकार का आरोप है कि SFJ विदेशों से संचालित होकर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और युवाओं को भड़काने का प्रयास करता है। केंद्र सरकार पहले भी संगठन से जुड़े कई वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है।
