यौन उत्पीड़न केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, HC से मिली अग्रिम जमानत

नेशनल न्यूज

By Rohit.P
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यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली, गिरफ्तारी पर रोक और सख्त शर्तें लागू।

यौन उत्पीड़न से जुड़े एक संवेदनशील मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके साथ-साथ उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को भी अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। इस फैसले से फिलहाल दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, जिससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया के दौरान राहत मिली है।

हाई कोर्ट से मिली राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकल पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा कर रहे थे, ने इस मामले में सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। यह आदेश सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों को बड़ी राहत मिली है।

सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले में 27 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले, अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक भी लगाई थी। अब अंतिम आदेश के तहत अग्रिम जमानत को मंजूरी दे दी गई है।

कोर्ट ने लगाई अहम शर्तें

अदालत ने जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि दोनों पक्ष मीडिया में किसी भी प्रकार की बयानबाजी नहीं करेंगे और न ही कोई इंटरव्यू देंगे। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित पक्ष जमानत निरस्त करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

जांच में सहयोग करना होगा अनिवार्य

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि शंकराचार्य और उनके शिष्य को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करना होगा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने यह भी आग्रह किया कि सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी पर रोक लगाई जाए, जिस पर अदालत ने सख्ती दिखाते हुए अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही।

कोर्ट में दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क

इस मामले में शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता रीना सिंह ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।

प्रयागराज में दर्ज हुआ था मामला

यह पूरा मामला प्रयागराज से जुड़ा हुआ है, जहां स्थानीय अदालत के निर्देश पर झूसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि यौन उत्पीड़न की घटनाओं की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी

हालांकि अग्रिम जमानत मिलने से आरोपियों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस अब साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी और आवश्यक होने पर चार्जशीट दाखिल करेगी।

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25 Mar 2026 By Rohit.P

यौन उत्पीड़न केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, HC से मिली अग्रिम जमानत

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यौन उत्पीड़न से जुड़े एक संवेदनशील मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके साथ-साथ उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को भी अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। इस फैसले से फिलहाल दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, जिससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया के दौरान राहत मिली है।

हाई कोर्ट से मिली राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकल पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा कर रहे थे, ने इस मामले में सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। यह आदेश सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों को बड़ी राहत मिली है।

सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला

इस मामले में 27 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले, अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक भी लगाई थी। अब अंतिम आदेश के तहत अग्रिम जमानत को मंजूरी दे दी गई है।

कोर्ट ने लगाई अहम शर्तें

अदालत ने जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि दोनों पक्ष मीडिया में किसी भी प्रकार की बयानबाजी नहीं करेंगे और न ही कोई इंटरव्यू देंगे। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित पक्ष जमानत निरस्त करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

जांच में सहयोग करना होगा अनिवार्य

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि शंकराचार्य और उनके शिष्य को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करना होगा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने यह भी आग्रह किया कि सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी पर रोक लगाई जाए, जिस पर अदालत ने सख्ती दिखाते हुए अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही।

कोर्ट में दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क

इस मामले में शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता रीना सिंह ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।

प्रयागराज में दर्ज हुआ था मामला

यह पूरा मामला प्रयागराज से जुड़ा हुआ है, जहां स्थानीय अदालत के निर्देश पर झूसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि यौन उत्पीड़न की घटनाओं की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी

हालांकि अग्रिम जमानत मिलने से आरोपियों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस अब साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी और आवश्यक होने पर चार्जशीट दाखिल करेगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shankaracharya-gets-anticipatory-bail-from-hc-in-sexual-harassment-case/article-49030

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