Digital Nomad Lifestyle और Co-Working Retreats से बदल रही है छुट्टियों की परिभाषा

लाइफस्टाइल डेस्क

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आज के डिजिटल युग में छुट्टियाँ केवल आराम और यात्रा के लिए नहीं रही। लोगों ने वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे को अपनाकर ट्रैवल और काम को एक साथ जोड़ दिया है। इस नए ट्रेंड में डिजिटल नोमैड लाइफस्टाइल और को-वर्किंग रिट्रीट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

मेट्रो शहरों के प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर और स्टार्टअप कर्मचारी छुट्टियों के दौरान भी काम कर रहे हैं। वे नई जगहों पर जाकर कार्यरत रहते हैं और स्थानीय संस्कृति, खान-पान और प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी उठाते हैं।

यह ट्रेंड पिछले दो सालों में उभरा है। गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी भारत में कई रिसॉर्ट्स और होटलों ने को-वर्किंग रिट्रीट्स की शुरुआत की है, जहां वाई-फाई, मीटिंग स्पेस और आरामदेह आवास की सुविधा उपलब्ध है।

कैसे हो रहा है वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे
डिजिटल नोमैड्स अपने लैपटॉप और मोबाइल के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से काम कर सकते हैं। वे सुबह काम करते हैं और दोपहर या शाम को ट्रेकिंग, योग, समुद्र तट या लोकल कुकिंग क्लास में समय बिताते हैं। कई रिट्रीट्स में मस्तिष्क और शरीर के लिए हेल्दी फूड भी परोसा जाता है, जैसे स्मूदी, एंटीऑक्सीडेंट रिच डाइट, ग्लूटेन-फ्री स्नैक्स और हर्बल टी, ताकि काम करते हुए स्वास्थ्य पर ध्यान भी रहे।

क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड
फ्रीलांस और रिमोट वर्क कल्चर के बढ़ने के कारण लोग अब छुट्टियों में भी पूर्ण रूप से डिस्कनेक्ट नहीं होना चाहते। साथ ही, नई जगहों पर काम करने से क्रिएटिविटी बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। “वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे से मानसिक और शारीरिक संतुलन दोनों मिलता है,” कहते हैं को-वर्किंग रिट्रीट्स के संस्थापक आर्यन मेहता।

पहले छुट्टियाँ सिर्फ आराम के लिए होती थीं, लेकिन कोविड-19 और रिमोट वर्क कल्चर ने ट्रैवल के दौरान काम करने की आदत को बढ़ावा दिया। स्वास्थ्य और उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए अब कई रिजॉर्ट्स में फूड फॉर माइंड एंड बॉडी और मेडिटेशन/वेलनेस सत्र भी शामिल किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे और डिजिटल नोमैड ट्रेंड और बढ़ेगा। भारतीय ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री इस ट्रेंड को ध्यान में रखकर नई सेवाओं और पैकेजेस लाने की तैयारी कर रही है।

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25 Mar 2026 By ANKITA

Digital Nomad Lifestyle और Co-Working Retreats से बदल रही है छुट्टियों की परिभाषा

लाइफस्टाइल डेस्क

मेट्रो शहरों के प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर और स्टार्टअप कर्मचारी छुट्टियों के दौरान भी काम कर रहे हैं। वे नई जगहों पर जाकर कार्यरत रहते हैं और स्थानीय संस्कृति, खान-पान और प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी उठाते हैं।

यह ट्रेंड पिछले दो सालों में उभरा है। गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी भारत में कई रिसॉर्ट्स और होटलों ने को-वर्किंग रिट्रीट्स की शुरुआत की है, जहां वाई-फाई, मीटिंग स्पेस और आरामदेह आवास की सुविधा उपलब्ध है।

कैसे हो रहा है वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे
डिजिटल नोमैड्स अपने लैपटॉप और मोबाइल के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से काम कर सकते हैं। वे सुबह काम करते हैं और दोपहर या शाम को ट्रेकिंग, योग, समुद्र तट या लोकल कुकिंग क्लास में समय बिताते हैं। कई रिट्रीट्स में मस्तिष्क और शरीर के लिए हेल्दी फूड भी परोसा जाता है, जैसे स्मूदी, एंटीऑक्सीडेंट रिच डाइट, ग्लूटेन-फ्री स्नैक्स और हर्बल टी, ताकि काम करते हुए स्वास्थ्य पर ध्यान भी रहे।

क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड
फ्रीलांस और रिमोट वर्क कल्चर के बढ़ने के कारण लोग अब छुट्टियों में भी पूर्ण रूप से डिस्कनेक्ट नहीं होना चाहते। साथ ही, नई जगहों पर काम करने से क्रिएटिविटी बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। “वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे से मानसिक और शारीरिक संतुलन दोनों मिलता है,” कहते हैं को-वर्किंग रिट्रीट्स के संस्थापक आर्यन मेहता।

पहले छुट्टियाँ सिर्फ आराम के लिए होती थीं, लेकिन कोविड-19 और रिमोट वर्क कल्चर ने ट्रैवल के दौरान काम करने की आदत को बढ़ावा दिया। स्वास्थ्य और उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए अब कई रिजॉर्ट्स में फूड फॉर माइंड एंड बॉडी और मेडिटेशन/वेलनेस सत्र भी शामिल किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में वर्क-फ्रॉम-हॉलिडे और डिजिटल नोमैड ट्रेंड और बढ़ेगा। भारतीय ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री इस ट्रेंड को ध्यान में रखकर नई सेवाओं और पैकेजेस लाने की तैयारी कर रही है।

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