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नेपाल में बाढ़ से त्रिशूली बाजार तबाह, नुवाकोट में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
अंतराष्ट्रीय न्यूज
बाढ़ में कई दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बर्बाद; सेना प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने में जुटी, मलबे में अब भी तलाश जारी
नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में तबाही का मंजर है। त्रिशूली नदी और भोटेकोशी नदी तंत्र में आई बाढ़ ने बाजार, घरों और कारोबार को भारी नुकसान पहुंचाया है, जबकि प्रभावित इलाकों में सेना और बचाव दलों का अभियान जारी है। नुवाकोट के बिदुर इलाके में सेना प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है। वहीं, बाढ़ से कटे इलाकों तक पहुंचने और मलबे में फंसे या लापता लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनरी और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
त्रिशूली बाजार में बाढ़ का असर बेहद गंभीर रहा। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कई दुकानें और मकान बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। आसपास के देवघाट क्षेत्र में भी नुकसान हुआ है और त्रिशूली नदी पर बने दो मोटरेबल पुल बह जाने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ ने स्थानीय कारोबार को भी बड़ा झटका दिया है। एक पोल्ट्री फार्म संचालक ने बताया कि उसकी 22,000 पक्षियों वाली पोल्ट्री यूनिट बाढ़ में बह गई। उसके मुताबिक, 420 बोरी फीड की खेप भी नष्ट हो गई। त्रिशूली और आसपास के इलाकों में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर मलबा और टूटी हुई सड़कें राहत एवं बचाव कार्य में बाधा बनी हुई हैं।
नुवाकोट के कुछ हिस्सों में लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है। Upper Trishuli-3B hydropower project से जुड़े कम से कम 122 लोग संपर्क से बाहर बताए गए हैं। उनके परिजन बिदुर स्थित सेना के राहत एवं बचाव केंद्र में अधिकारियों से जल्द अभियान तेज करने की मांग कर रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मलबा, कीचड़ और क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण कई स्थानों तक पहुंचने में समय लग रहा है। बचाव दल दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए अस्थायी पुल बना रहे हैं और भारी मशीनों की मदद ले रहे हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालना अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। Reuters के अनुसार, 1 सितंबर तक नेपाल में कम से कम 939 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग लापता थे। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के अनुसार, 11,000 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
नुवाकोट सहित बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत केंद्रों के जरिए भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था को भी धीरे-धीरे बहाल करने की कोशिश की जा रही है। बाढ़ के बाद त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाकों में बड़ी मात्रा में मलबा जमा है। ऐसे में बचाव दलों के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं—लापता लोगों तक पहुंचना और बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित बस्तियों में राहत पहुंचाना। नुवाकोट में सेना और स्थानीय बचाव दलों का अभियान जारी है। प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है, जबकि लापता लोगों के परिजन अब भी अपने रिश्तेदारों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
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