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एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने सुनाया कास्टिंग काउच का अनुभव, बोलीं- टैलेंट बेचती हूं, खुद को नहीं
बालीवुड डेस्क
साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों में मिली आपत्तिजनक शर्तों का खुलासा, कहा- ‘कंफर्टेबल’ शब्द का मतलब समझते ही कर दिया था इनकार।
मशहूर फिल्म और टीवी एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में काम के शुरुआती दिनों में उन्हें कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। इंदिरा के मुताबिक, उनसे सीधे तौर पर कहा गया था कि अगर उन्हें बड़ा रोल चाहिए तो उन्हें “कंफर्टेबल” होना पड़ेगा। यह बयान उनके लिए उस समय बेहद असहज और साफ संकेत देने वाला था। इंदिरा कृष्णन ने बताया कि जब उनसे यह बात कही गई तो उन्होंने तुरंत समझ लिया था कि सामने वाले का इशारा किस ओर है। उन्होंने कहा कि उन्होंने उसी समय साफ शब्दों में इनकार कर दिया था। उनके अनुसार, उन्होंने उस वक्त कहा था कि वह यहां अपना टैलेंट बेचने आई हैं, न कि खुद को। यह जवाब देने के बाद उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से बाहर भी कर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर कभी समझौता नहीं किया। एक्ट्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रोड्यूसर या व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहतीं, लेकिन यह अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर का है। इंदिरा के मुताबिक, उस समय इंडस्ट्री में कई चीजें इतनी प्रोफेशनल नहीं थीं जितनी आज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब हालात काफी बदल चुके हैं और इंडस्ट्री पहले से ज्यादा व्यवस्थित और प्रोफेशनल हो गई है।
इंदिरा कृष्णन ने बताया कि इस घटना का असर उनके करियर और मानसिक स्थिति पर भी पड़ा था। कई बार उन्हें ऑफर मिलते रहे, लेकिन उस अनुभव के कारण वह लंबे समय तक साउथ फिल्मों से दूरी बनाए रहीं। उन्हें अंदर ही अंदर एक डर बैठ गया था कि कहीं फिर से ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यह डर इतना गहरा था कि वह कई अच्छे मौके भी छोड़ देती थीं। बाद में उन्होंने दोबारा साउथ इंडस्ट्री में काम किया, जब निर्माता प्रेरणा अरोड़ा ने उन्हें फिल्म ‘जटाधारा’ के लिए भरोसा दिलाया। इंदिरा के अनुसार, उस भरोसे और सुरक्षित माहौल की वजह से उन्होंने दोबारा काम करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि इंडस्ट्री में कई लोग अब ईमानदारी और प्रोफेशनलिज्म के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, इंदिरा कृष्णन ने यह भी साफ कहा कि उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कभी इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके अनुसार, मुंबई में काम का माहौल अधिक प्रोफेशनल रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी प्रोड्यूसर या कास्टिंग डायरेक्टर से मिलीं, बातचीत हमेशा काम तक सीमित रही। अगर उन्हें कोई रोल नहीं मिला, तो उसकी वजह सिर्फ यह थी कि वह उस किरदार के लिए फिट नहीं थीं, न कि किसी तरह की शर्त या दबाव।
इंदिरा ने यह भी कहा कि उन्होंने ‘तेरे नाम’, ‘एनिमल’, ‘हॉलीडे’ और ‘हे ब्रो’ जैसी फिल्मों में काम किया है और इस दौरान उन्हें कभी किसी गलत स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके मुताबिक, मुंबई इंडस्ट्री का अनुभव हमेशा उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक लगा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर इंडस्ट्री में कुछ अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जरूरी है कि कलाकार अपनी सीमाओं को स्पष्ट रखें। टीवी इंडस्ट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर इंदिरा कृष्णन ने कहा कि उन्हें आज तक टेलीविजन में भी कास्टिंग काउच जैसी कोई स्थिति देखने या झेलने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि टीवी का सेटअप काफी हद तक प्रोफेशनल होता है और वहां काम का माहौल स्पष्ट और व्यवस्थित रहता है।
इंदिरा ने नए कलाकारों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों से आने वाले कई युवा कलाकार बड़े सपनों के साथ मुंबई और अन्य शहरों में आते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जागरूकता बहुत जरूरी है ताकि कोई भी कलाकार गलत हाथों में न फंसे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके करियर में कोई गॉडफादर या मेंटर नहीं रहा। उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में पहचान बनाई है। इंदिरा के मुताबिक, मेहनत, धैर्य और अपने टैलेंट पर भरोसा ही उन्हें आगे लेकर गया। उन्होंने कहा कि हर कलाकार को अपनी शर्तों पर काम करना चाहिए और किसी भी तरह के दबाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच जैसे मुद्दों पर बहस को सामने ले आया है। जहां एक तरफ इंदिरा का अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर से जुड़ा है, वहीं वह यह भी मानती हैं कि समय के साथ इंडस्ट्री में काफी सुधार हुआ है और अब माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित और प्रोफेशनल हो चुका है।
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एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने सुनाया कास्टिंग काउच का अनुभव, बोलीं- टैलेंट बेचती हूं, खुद को नहीं
बालीवुड डेस्क
मशहूर फिल्म और टीवी एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में काम के शुरुआती दिनों में उन्हें कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। इंदिरा के मुताबिक, उनसे सीधे तौर पर कहा गया था कि अगर उन्हें बड़ा रोल चाहिए तो उन्हें “कंफर्टेबल” होना पड़ेगा। यह बयान उनके लिए उस समय बेहद असहज और साफ संकेत देने वाला था। इंदिरा कृष्णन ने बताया कि जब उनसे यह बात कही गई तो उन्होंने तुरंत समझ लिया था कि सामने वाले का इशारा किस ओर है। उन्होंने कहा कि उन्होंने उसी समय साफ शब्दों में इनकार कर दिया था। उनके अनुसार, उन्होंने उस वक्त कहा था कि वह यहां अपना टैलेंट बेचने आई हैं, न कि खुद को। यह जवाब देने के बाद उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से बाहर भी कर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर कभी समझौता नहीं किया। एक्ट्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रोड्यूसर या व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहतीं, लेकिन यह अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर का है। इंदिरा के मुताबिक, उस समय इंडस्ट्री में कई चीजें इतनी प्रोफेशनल नहीं थीं जितनी आज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब हालात काफी बदल चुके हैं और इंडस्ट्री पहले से ज्यादा व्यवस्थित और प्रोफेशनल हो गई है।
इंदिरा कृष्णन ने बताया कि इस घटना का असर उनके करियर और मानसिक स्थिति पर भी पड़ा था। कई बार उन्हें ऑफर मिलते रहे, लेकिन उस अनुभव के कारण वह लंबे समय तक साउथ फिल्मों से दूरी बनाए रहीं। उन्हें अंदर ही अंदर एक डर बैठ गया था कि कहीं फिर से ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यह डर इतना गहरा था कि वह कई अच्छे मौके भी छोड़ देती थीं। बाद में उन्होंने दोबारा साउथ इंडस्ट्री में काम किया, जब निर्माता प्रेरणा अरोड़ा ने उन्हें फिल्म ‘जटाधारा’ के लिए भरोसा दिलाया। इंदिरा के अनुसार, उस भरोसे और सुरक्षित माहौल की वजह से उन्होंने दोबारा काम करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि इंडस्ट्री में कई लोग अब ईमानदारी और प्रोफेशनलिज्म के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, इंदिरा कृष्णन ने यह भी साफ कहा कि उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कभी इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके अनुसार, मुंबई में काम का माहौल अधिक प्रोफेशनल रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी प्रोड्यूसर या कास्टिंग डायरेक्टर से मिलीं, बातचीत हमेशा काम तक सीमित रही। अगर उन्हें कोई रोल नहीं मिला, तो उसकी वजह सिर्फ यह थी कि वह उस किरदार के लिए फिट नहीं थीं, न कि किसी तरह की शर्त या दबाव।
इंदिरा ने यह भी कहा कि उन्होंने ‘तेरे नाम’, ‘एनिमल’, ‘हॉलीडे’ और ‘हे ब्रो’ जैसी फिल्मों में काम किया है और इस दौरान उन्हें कभी किसी गलत स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके मुताबिक, मुंबई इंडस्ट्री का अनुभव हमेशा उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक लगा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर इंडस्ट्री में कुछ अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जरूरी है कि कलाकार अपनी सीमाओं को स्पष्ट रखें। टीवी इंडस्ट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर इंदिरा कृष्णन ने कहा कि उन्हें आज तक टेलीविजन में भी कास्टिंग काउच जैसी कोई स्थिति देखने या झेलने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि टीवी का सेटअप काफी हद तक प्रोफेशनल होता है और वहां काम का माहौल स्पष्ट और व्यवस्थित रहता है।
इंदिरा ने नए कलाकारों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों से आने वाले कई युवा कलाकार बड़े सपनों के साथ मुंबई और अन्य शहरों में आते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जागरूकता बहुत जरूरी है ताकि कोई भी कलाकार गलत हाथों में न फंसे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके करियर में कोई गॉडफादर या मेंटर नहीं रहा। उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में पहचान बनाई है। इंदिरा के मुताबिक, मेहनत, धैर्य और अपने टैलेंट पर भरोसा ही उन्हें आगे लेकर गया। उन्होंने कहा कि हर कलाकार को अपनी शर्तों पर काम करना चाहिए और किसी भी तरह के दबाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच जैसे मुद्दों पर बहस को सामने ले आया है। जहां एक तरफ इंदिरा का अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर से जुड़ा है, वहीं वह यह भी मानती हैं कि समय के साथ इंडस्ट्री में काफी सुधार हुआ है और अब माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित और प्रोफेशनल हो चुका है।
