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'काला हिरण' विवाद पर बोले अमित जानी, कहा- यह सलमान खान की बायोपिक नहीं
बालीवुड डेस्क
लीगल नोटिस के बाद फिल्म निर्माता का जवाब, बोले- बिश्नोई समाज के संघर्ष और विरासत पर आधारित है फिल्म
फिल्म 'काला हिरण' को लेकर इन दिनों मनोरंजन जगत में काफी चर्चा है। फिल्म के पोस्टर और टीजर की घोषणा के बाद यह विवादों में आ गई है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की लीगल टीम द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद फिल्म के निर्माता अमित जानी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है और न ही पूरी कहानी उनके जीवन पर आधारित है। अमित जानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो में कहा कि कुछ लोग फिल्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'काला हिरण' एक सामाजिक और सांस्कृतिक विषय पर आधारित फिल्म है, जिसका मुख्य उद्देश्य बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी परंपराओं और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाना है।
फिल्म को लेकर बढ़ा विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब फिल्म का पोस्टर सार्वजनिक किया गया और इसके साथ घोषणा की गई कि 20 जून को फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर रिलीज किया जाएगा। पोस्टर सामने आने के बाद कई लोगों ने अनुमान लगाया कि फिल्म 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले और उससे जुड़े विवादों पर आधारित हो सकती है। इसके बाद सलमान खान की लीगल टीम ने कथित तौर पर फिल्म के निर्माताओं और संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर फिल्म के प्रचार-प्रसार और रिलीज प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। नोटिस में कहा गया कि फिल्म अभिनेता की छवि को प्रभावित कर सकती है और उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है।
अमित जानी का पक्ष
अमित जानी ने कहा कि फिल्म को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि फिल्म में सलमान खान का जिक्र यदि कहीं है भी, तो वह कहानी का एक छोटा हिस्सा मात्र है। पूरी फिल्म किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी नोटिस के जरिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि फिल्म का टीजर और प्रमोशनल गतिविधियां रोकी जा सकें। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मूल भावना है और फिल्म उसी अधिकार के तहत बनाई जा रही है।
बिश्नोई समाज पर केंद्रित कहानी
निर्माता के अनुसार फिल्म का मूल विषय बिश्नोई समाज है। बिश्नोई समुदाय सदियों से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से काला हिरण को लेकर इस समाज की आस्था और संरक्षण की भावना देशभर में चर्चित रही है। फिल्म में समाज की परंपराओं, संघर्षों और प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दिखाने का प्रयास किया गया है। अमित जानी का कहना है कि फिल्म का मकसद किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक विषय को सामने लाना है।
क्या है काला हिरण शिकार मामला?
काला हिरण शिकार मामला वर्ष 1998 में उस समय सामने आया था जब फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र में चल रही थी। आरोप लगाया गया था कि शूटिंग के दौरान संरक्षित वन्यजीव काला हिरण का शिकार किया गया। इस मामले में सलमान खान के अलावा अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम का नाम भी सामने आया था। हालांकि बाद में अधिकांश कलाकारों को अदालत से राहत मिल गई, जबकि सलमान खान के खिलाफ मामला आगे बढ़ा। अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने सलमान खान को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और राजस्थान हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।
फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ी बहस
फिल्म को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को जन्म दिया है। एक पक्ष का मानना है कि फिल्मकारों को सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं पर फिल्म बनाने का अधिकार है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि किसी भी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यदि किसी फिल्म में वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों का संदर्भ लिया जाता है, तो उसके लिए कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों का पालन आवश्यक होता है।
टीजर रिलीज पर बनी नजर
फिल्म 'काला हिरण' का टीजर 20 जून को रिलीज किए जाने की घोषणा की गई है। हालांकि कानूनी विवाद के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म की रिलीज प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। निर्माता अमित जानी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि फिल्म किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वहीं दूसरी ओर सलमान खान की लीगल टीम फिल्म के कंटेंट को लेकर गंभीर आपत्ति जता रही है।
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'काला हिरण' विवाद पर बोले अमित जानी, कहा- यह सलमान खान की बायोपिक नहीं
बालीवुड डेस्क
फिल्म 'काला हिरण' को लेकर इन दिनों मनोरंजन जगत में काफी चर्चा है। फिल्म के पोस्टर और टीजर की घोषणा के बाद यह विवादों में आ गई है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की लीगल टीम द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद फिल्म के निर्माता अमित जानी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है और न ही पूरी कहानी उनके जीवन पर आधारित है। अमित जानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो में कहा कि कुछ लोग फिल्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'काला हिरण' एक सामाजिक और सांस्कृतिक विषय पर आधारित फिल्म है, जिसका मुख्य उद्देश्य बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी परंपराओं और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाना है।
फिल्म को लेकर बढ़ा विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब फिल्म का पोस्टर सार्वजनिक किया गया और इसके साथ घोषणा की गई कि 20 जून को फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर रिलीज किया जाएगा। पोस्टर सामने आने के बाद कई लोगों ने अनुमान लगाया कि फिल्म 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले और उससे जुड़े विवादों पर आधारित हो सकती है। इसके बाद सलमान खान की लीगल टीम ने कथित तौर पर फिल्म के निर्माताओं और संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर फिल्म के प्रचार-प्रसार और रिलीज प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। नोटिस में कहा गया कि फिल्म अभिनेता की छवि को प्रभावित कर सकती है और उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है।
अमित जानी का पक्ष
अमित जानी ने कहा कि फिल्म को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि फिल्म में सलमान खान का जिक्र यदि कहीं है भी, तो वह कहानी का एक छोटा हिस्सा मात्र है। पूरी फिल्म किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी नोटिस के जरिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि फिल्म का टीजर और प्रमोशनल गतिविधियां रोकी जा सकें। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मूल भावना है और फिल्म उसी अधिकार के तहत बनाई जा रही है।
बिश्नोई समाज पर केंद्रित कहानी
निर्माता के अनुसार फिल्म का मूल विषय बिश्नोई समाज है। बिश्नोई समुदाय सदियों से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से काला हिरण को लेकर इस समाज की आस्था और संरक्षण की भावना देशभर में चर्चित रही है। फिल्म में समाज की परंपराओं, संघर्षों और प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दिखाने का प्रयास किया गया है। अमित जानी का कहना है कि फिल्म का मकसद किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक विषय को सामने लाना है।
क्या है काला हिरण शिकार मामला?
काला हिरण शिकार मामला वर्ष 1998 में उस समय सामने आया था जब फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र में चल रही थी। आरोप लगाया गया था कि शूटिंग के दौरान संरक्षित वन्यजीव काला हिरण का शिकार किया गया। इस मामले में सलमान खान के अलावा अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम का नाम भी सामने आया था। हालांकि बाद में अधिकांश कलाकारों को अदालत से राहत मिल गई, जबकि सलमान खान के खिलाफ मामला आगे बढ़ा। अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने सलमान खान को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और राजस्थान हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।
फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ी बहस
फिल्म को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को जन्म दिया है। एक पक्ष का मानना है कि फिल्मकारों को सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं पर फिल्म बनाने का अधिकार है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि किसी भी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यदि किसी फिल्म में वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों का संदर्भ लिया जाता है, तो उसके लिए कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों का पालन आवश्यक होता है।
टीजर रिलीज पर बनी नजर
फिल्म 'काला हिरण' का टीजर 20 जून को रिलीज किए जाने की घोषणा की गई है। हालांकि कानूनी विवाद के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म की रिलीज प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। निर्माता अमित जानी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि फिल्म किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वहीं दूसरी ओर सलमान खान की लीगल टीम फिल्म के कंटेंट को लेकर गंभीर आपत्ति जता रही है।
