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सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के करीब फिसला, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
बिजनेस डेस्क
वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर मानसून अनुमान से बाजार पर दबाव
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 73,950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया है।
मंगलवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था और निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि बुधवार को शुरुआती कारोबार से ही तस्वीर बदलती नजर आई। कई बड़े शेयरों में बिकवाली शुरू हुई और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी घटनाओं पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझ रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। केवल पिछले कारोबारी सत्र में भी विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली दर्ज की गई। इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। विदेशी निवेशक इस समय वैश्विक परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अन्य आर्थिक कारकों के चलते वे अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।
तीसरा महत्वपूर्ण कारण मौसम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में हल्की कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बाजार के कुछ वर्गों में चिंता का कारण बनी हुई है। वास्तविक प्रगति आने वाले सप्ताहों में अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दिया। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, हालांकि चुनिंदा कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में व्यापक रूप से देखा जाए तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का रुझान कमजोर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। जापान के बाजार में मजबूती देखने को मिली, जबकि हांगकांग के बाजार में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इन मिश्रित संकेतों ने भी भारतीय बाजार को स्पष्ट दिशा देने में मदद नहीं की।
वहीं अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में घरेलू कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अधिक देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में घरेलू निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों पर भी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अल्पकालिक घटनाएं अक्सर बाजार की दिशा को प्रभावित करती हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना और सोच-समझकर निवेश करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
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सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के करीब फिसला, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 73,950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया है।
मंगलवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था और निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि बुधवार को शुरुआती कारोबार से ही तस्वीर बदलती नजर आई। कई बड़े शेयरों में बिकवाली शुरू हुई और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी घटनाओं पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझ रहे हैं।
दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। केवल पिछले कारोबारी सत्र में भी विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली दर्ज की गई। इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। विदेशी निवेशक इस समय वैश्विक परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अन्य आर्थिक कारकों के चलते वे अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।
तीसरा महत्वपूर्ण कारण मौसम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में हल्की कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बाजार के कुछ वर्गों में चिंता का कारण बनी हुई है। वास्तविक प्रगति आने वाले सप्ताहों में अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दिया। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, हालांकि चुनिंदा कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में व्यापक रूप से देखा जाए तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का रुझान कमजोर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। जापान के बाजार में मजबूती देखने को मिली, जबकि हांगकांग के बाजार में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इन मिश्रित संकेतों ने भी भारतीय बाजार को स्पष्ट दिशा देने में मदद नहीं की।
वहीं अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में घरेलू कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अधिक देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में घरेलू निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों पर भी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अल्पकालिक घटनाएं अक्सर बाजार की दिशा को प्रभावित करती हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना और सोच-समझकर निवेश करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
