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ब्रिटेन संसद में ग्रूमिंग गैंग पर बड़ा खुलासा, पीड़ितों की गवाही सामने
Digital Desk
ब्रिटिश संसद में सांसद रूपर्ट लोव द्वारा पढ़ी गई पीड़ितों की गवाही के बाद ग्रूमिंग गैंग मामलों को लेकर नई बहस तेज, संगठित बाल यौन शोषण के आरोपों पर जांच और राजनीतिक विवाद गहराया
ब्रिटेन की संसद में हाल ही में ग्रूमिंग गैंग मामलों को लेकर एक गंभीर और विवादित चर्चा देखने को मिली, जब सांसद रूपर्ट लोव ने अपने भाषण के दौरान पीड़ितों की गवाहियों को सार्वजनिक रूप से पढ़ा। इन बयानों के सामने आने के बाद देशभर में संगठित बाल यौन शोषण के मामलों पर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सांसद ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में नाबालिग लड़कियों को संगठित गिरोहों द्वारा निशाना बनाया गया, जिनके तरीके बेहद क्रूर और योजनाबद्ध थे। संसद में दिए गए अपने भाषण में रूपर्ट लोव ने कहा कि जांच सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कई पीड़ितों ने यह आरोप लगाया है कि उनके साथ किशोरावस्था में लंबे समय तक शोषण किया गया और यह सब एक संगठित नेटवर्क के तहत हुआ। कुछ मामलों में पीड़ितों ने दावा किया कि उनके साथ सैकड़ों अलग-अलग लोगों ने दुर्व्यवहार किया, जबकि उन्हें लगातार धमकियां देकर चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। यह बयान सामने आने के बाद संसद में माहौल बेहद गंभीर हो गया और कई सांसदों ने इस पर तत्काल विस्तृत जांच की मांग उठाई।
पीड़ितों की गवाहियों में सामने आए आरोप बेहद भयावह हैं। कई बयानों में शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, नशे का इस्तेमाल और धमकी जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। कुछ पीड़ितों ने कहा कि उन्हें बार-बार धमकाया जाता था कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उनके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा। एक गवाही में यह भी बताया गया कि पीड़ितों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें ड्रग्स देकर बेहोश किया जाता था और फिर कई लोगों द्वारा उनका शोषण किया जाता था। इन गवाहियों के सामने आने के बाद समाज में गहरी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। सांसद रूपर्ट लोव ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ब्रिटेन के कई इलाकों में संगठित बाल यौन शोषण के संकेत मिले हैं और यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा दशकों से दबा हुआ था और अब इसे गंभीरता से सामने लाने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है, जहां कुछ नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ढांचे से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों की जांच निष्पक्ष और प्रमाण आधारित होनी चाहिए।
ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग’ शब्द का इस्तेमाल उन संगठित गिरोहों के लिए किया जाता है जो नाबालिगों को पहले भरोसे में लेते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें शोषण के जाल में फंसा लेते हैं। पिछले दो दशकों में रोदरहम, रोशडेल और ओल्डहैम जैसे शहरों में ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें पुलिस और सामाजिक एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे थे। इन मामलों में कई लोगों को दोषी ठहराया गया था और बाद की जांचों में यह सामने आया था कि सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद थीं, जिसके कारण लंबे समय तक यह अपराध जारी रहा। 2000 के दशक से ही ऐसे मामलों की जांच और रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं, जिनमें यह पाया गया कि कई पीड़ित वर्षों तक शोषण का शिकार होते रहे और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें समय पर सुरक्षा नहीं मिल पाई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख किया गया कि सामाजिक और संस्थागत स्तर पर गलतफहमियों और डर के कारण कई मामलों को नजरअंदाज किया गया, जिससे अपराधियों को और अधिक बढ़ावा मिला।
हालिया संसद भाषण के बाद एक बार फिर इन मामलों की जांच की मांग तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने केसों की समीक्षा की जा रही है और नए आरोपों की भी जांच शुरू की जाएगी। ऐसे मामलों में पारदर्शी और कठोर जांच प्रणाली जरूरी है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस पूरे विवाद ने ब्रिटेन की राजनीति और समाज दोनों को गहराई से प्रभावित किया है। जहां एक ओर पीड़ितों के लिए न्याय की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए अपराधों को लंबे समय तक कैसे नजरअंदाज किया गया।
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ब्रिटेन संसद में ग्रूमिंग गैंग पर बड़ा खुलासा, पीड़ितों की गवाही सामने
Digital Desk
ब्रिटेन की संसद में हाल ही में ग्रूमिंग गैंग मामलों को लेकर एक गंभीर और विवादित चर्चा देखने को मिली, जब सांसद रूपर्ट लोव ने अपने भाषण के दौरान पीड़ितों की गवाहियों को सार्वजनिक रूप से पढ़ा। इन बयानों के सामने आने के बाद देशभर में संगठित बाल यौन शोषण के मामलों पर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सांसद ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में नाबालिग लड़कियों को संगठित गिरोहों द्वारा निशाना बनाया गया, जिनके तरीके बेहद क्रूर और योजनाबद्ध थे। संसद में दिए गए अपने भाषण में रूपर्ट लोव ने कहा कि जांच सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कई पीड़ितों ने यह आरोप लगाया है कि उनके साथ किशोरावस्था में लंबे समय तक शोषण किया गया और यह सब एक संगठित नेटवर्क के तहत हुआ। कुछ मामलों में पीड़ितों ने दावा किया कि उनके साथ सैकड़ों अलग-अलग लोगों ने दुर्व्यवहार किया, जबकि उन्हें लगातार धमकियां देकर चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। यह बयान सामने आने के बाद संसद में माहौल बेहद गंभीर हो गया और कई सांसदों ने इस पर तत्काल विस्तृत जांच की मांग उठाई।
पीड़ितों की गवाहियों में सामने आए आरोप बेहद भयावह हैं। कई बयानों में शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, नशे का इस्तेमाल और धमकी जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। कुछ पीड़ितों ने कहा कि उन्हें बार-बार धमकाया जाता था कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उनके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा। एक गवाही में यह भी बताया गया कि पीड़ितों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें ड्रग्स देकर बेहोश किया जाता था और फिर कई लोगों द्वारा उनका शोषण किया जाता था। इन गवाहियों के सामने आने के बाद समाज में गहरी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। सांसद रूपर्ट लोव ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ब्रिटेन के कई इलाकों में संगठित बाल यौन शोषण के संकेत मिले हैं और यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा दशकों से दबा हुआ था और अब इसे गंभीरता से सामने लाने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और तेज हो गई है, जहां कुछ नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ढांचे से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों की जांच निष्पक्ष और प्रमाण आधारित होनी चाहिए।
ब्रिटेन में ‘ग्रूमिंग गैंग’ शब्द का इस्तेमाल उन संगठित गिरोहों के लिए किया जाता है जो नाबालिगों को पहले भरोसे में लेते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें शोषण के जाल में फंसा लेते हैं। पिछले दो दशकों में रोदरहम, रोशडेल और ओल्डहैम जैसे शहरों में ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें पुलिस और सामाजिक एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे थे। इन मामलों में कई लोगों को दोषी ठहराया गया था और बाद की जांचों में यह सामने आया था कि सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद थीं, जिसके कारण लंबे समय तक यह अपराध जारी रहा। 2000 के दशक से ही ऐसे मामलों की जांच और रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं, जिनमें यह पाया गया कि कई पीड़ित वर्षों तक शोषण का शिकार होते रहे और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें समय पर सुरक्षा नहीं मिल पाई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख किया गया कि सामाजिक और संस्थागत स्तर पर गलतफहमियों और डर के कारण कई मामलों को नजरअंदाज किया गया, जिससे अपराधियों को और अधिक बढ़ावा मिला।
हालिया संसद भाषण के बाद एक बार फिर इन मामलों की जांच की मांग तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने केसों की समीक्षा की जा रही है और नए आरोपों की भी जांच शुरू की जाएगी। ऐसे मामलों में पारदर्शी और कठोर जांच प्रणाली जरूरी है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस पूरे विवाद ने ब्रिटेन की राजनीति और समाज दोनों को गहराई से प्रभावित किया है। जहां एक ओर पीड़ितों के लिए न्याय की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए अपराधों को लंबे समय तक कैसे नजरअंदाज किया गया।
