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रणवीर सिंह पर FWICE ने वापस लिया नॉन-कोऑपरेशन आदेश, विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम
बालीवुड डेस्क
‘डॉन 3’ विवाद के बीच FWICE का यू-टर्न, अशोक पंडित बोले- रणवीर पर कभी बैन नहीं लगाया गया था
बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के बीच चल रहा विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बने इस मामले में FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है। संगठन ने यह कदम इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और आपसी बातचीत के बाद उठाया है। इस फैसले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में राहत की भावना देखी जा रही है। FWICE का कहना है कि उनका उद्देश्य हमेशा उद्योग में सहयोग, एकता और सौहार्द बनाए रखना रहा है। वहीं संगठन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने स्पष्ट किया है कि रणवीर सिंह पर कभी कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया था और मीडिया में इसे "बैन" के रूप में पेश करना गलत है।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद अभिनेता रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ है। फिल्म का निर्माण एक्सेल एंटरटेनमेंट कर रही है, जो बॉलीवुड के प्रमुख प्रोडक्शन हाउसों में से एक माना जाता है। फिल्म की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और शूटिंग शुरू होने में केवल कुछ सप्ताह का समय बचा था। इसी दौरान रणवीर सिंह ने कथित तौर पर फिल्म से खुद को अलग कर लिया। इससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई। कहा गया कि फिल्म की मार्केटिंग, प्री-प्रोडक्शन और अन्य तैयारियों में बड़ी राशि खर्च हो चुकी थी। इसी संदर्भ में निर्माताओं की ओर से लगभग 45 करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया गया और मामला फिल्म इंडस्ट्री के विभिन्न संगठनों तक पहुंच गया।
FWICE ने जारी किया था नॉन-कोऑपरेशन आदेश
25 मई 2026 को FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। इस आदेश के तहत संगठन ने अपने सदस्यों को रणवीर सिंह के साथ किसी भी नए प्रोजेक्ट में काम न करने की सलाह दी थी। हालांकि यह आदेश तकनीकी रूप से किसी प्रतिबंध की श्रेणी में नहीं आता था, लेकिन इंडस्ट्री में इसे काफी गंभीर कदम माना गया। इससे यह संदेश गया कि संगठन रणवीर सिंह के व्यवहार और पेशेवर प्रतिबद्धताओं को लेकर असंतुष्ट है। इस आदेश के बाद फिल्म जगत में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और कई लोगों ने इसे अभिनेता के करियर के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया।
अशोक पंडित ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित सामने आए और उन्होंने संगठन का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि FWICE के पास किसी कलाकार, तकनीशियन या निर्माता को बैन करने का अधिकार ही नहीं है। उनके अनुसार, संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा कर सकता है, जिसका मतलब यह है कि सदस्य अपनी इच्छा के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था के साथ काम करने या न करने का निर्णय ले सकते हैं। अशोक पंडित ने कहा कि मीडिया में "रणवीर सिंह पर बैन" जैसी खबरें चलाए जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सहयोग न करने का निर्णय था, कोई कानूनी या औपचारिक प्रतिबंध नहीं।
IMPPA की मध्यस्थता बनी समाधान का आधार
मामले को सुलझाने में इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन ने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की और विवाद को बातचीत के माध्यम से हल करने पर जोर दिया। FWICE ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फिल्म उद्योग की मजबूती उसके सामूहिक सहयोग और आपसी विश्वास पर निर्भर करती है। इसलिए संगठन ने मामले को टकराव की बजाय संवाद के जरिए सुलझाने का फैसला किया। इस पहल के बाद FWICE ने नॉन-कोऑपरेशन आदेश वापस लेने की घोषणा की और भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने की बात कही।
रणवीर सिंह की कानूनी प्रतिक्रिया भी बनी चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह ने भी FWICE को एक कानूनी नोटिस भेजा था। हालांकि उस नोटिस में क्या मांगें रखी गई थीं, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। कानूनी प्रक्रिया और संगठनात्मक संवाद दोनों ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बड़े विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाना संभव है।
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे विवाद के दौरान प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। गिल्ड ने कहा कि हाल के वर्षों में कई कलाकार और तकनीशियन अंतिम समय में प्रोजेक्ट छोड़ रहे हैं, जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गिल्ड के अनुसार, जब किसी फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली होती है या रिलीज के करीब होती है, तब किसी प्रमुख कलाकार का हटना पूरे प्रोजेक्ट को प्रभावित कर सकता है। इसका असर केवल निर्माता पर ही नहीं बल्कि सैकड़ों तकनीशियनों, क्रू सदस्यों और अन्य कर्मचारियों पर भी पड़ता है। संगठन ने सभी पक्षों से पेशेवर प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने की अपील की।
यह पूरा मामला फिल्म उद्योग में पेशेवर अनुशासन और पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता को उजागर करता है। एक तरफ कलाकारों को अपने फैसलों का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर निर्माताओं और तकनीशियनों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है। FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन आदेश वापस लेना यह संकेत देता है कि फिल्म इंडस्ट्री टकराव से ज्यादा संवाद और सहयोग को महत्व देती है। इससे आने वाले समय में कलाकारों और निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद की जा सकती है।
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रणवीर सिंह पर FWICE ने वापस लिया नॉन-कोऑपरेशन आदेश, विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम
बालीवुड डेस्क
बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के बीच चल रहा विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बने इस मामले में FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है। संगठन ने यह कदम इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और आपसी बातचीत के बाद उठाया है। इस फैसले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में राहत की भावना देखी जा रही है। FWICE का कहना है कि उनका उद्देश्य हमेशा उद्योग में सहयोग, एकता और सौहार्द बनाए रखना रहा है। वहीं संगठन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने स्पष्ट किया है कि रणवीर सिंह पर कभी कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया था और मीडिया में इसे "बैन" के रूप में पेश करना गलत है।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद अभिनेता रणवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ है। फिल्म का निर्माण एक्सेल एंटरटेनमेंट कर रही है, जो बॉलीवुड के प्रमुख प्रोडक्शन हाउसों में से एक माना जाता है। फिल्म की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और शूटिंग शुरू होने में केवल कुछ सप्ताह का समय बचा था। इसी दौरान रणवीर सिंह ने कथित तौर पर फिल्म से खुद को अलग कर लिया। इससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई। कहा गया कि फिल्म की मार्केटिंग, प्री-प्रोडक्शन और अन्य तैयारियों में बड़ी राशि खर्च हो चुकी थी। इसी संदर्भ में निर्माताओं की ओर से लगभग 45 करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया गया और मामला फिल्म इंडस्ट्री के विभिन्न संगठनों तक पहुंच गया।
FWICE ने जारी किया था नॉन-कोऑपरेशन आदेश
25 मई 2026 को FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। इस आदेश के तहत संगठन ने अपने सदस्यों को रणवीर सिंह के साथ किसी भी नए प्रोजेक्ट में काम न करने की सलाह दी थी। हालांकि यह आदेश तकनीकी रूप से किसी प्रतिबंध की श्रेणी में नहीं आता था, लेकिन इंडस्ट्री में इसे काफी गंभीर कदम माना गया। इससे यह संदेश गया कि संगठन रणवीर सिंह के व्यवहार और पेशेवर प्रतिबद्धताओं को लेकर असंतुष्ट है। इस आदेश के बाद फिल्म जगत में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और कई लोगों ने इसे अभिनेता के करियर के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया।
अशोक पंडित ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित सामने आए और उन्होंने संगठन का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि FWICE के पास किसी कलाकार, तकनीशियन या निर्माता को बैन करने का अधिकार ही नहीं है। उनके अनुसार, संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा कर सकता है, जिसका मतलब यह है कि सदस्य अपनी इच्छा के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था के साथ काम करने या न करने का निर्णय ले सकते हैं। अशोक पंडित ने कहा कि मीडिया में "रणवीर सिंह पर बैन" जैसी खबरें चलाए जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सहयोग न करने का निर्णय था, कोई कानूनी या औपचारिक प्रतिबंध नहीं।
IMPPA की मध्यस्थता बनी समाधान का आधार
मामले को सुलझाने में इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन ने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की और विवाद को बातचीत के माध्यम से हल करने पर जोर दिया। FWICE ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फिल्म उद्योग की मजबूती उसके सामूहिक सहयोग और आपसी विश्वास पर निर्भर करती है। इसलिए संगठन ने मामले को टकराव की बजाय संवाद के जरिए सुलझाने का फैसला किया। इस पहल के बाद FWICE ने नॉन-कोऑपरेशन आदेश वापस लेने की घोषणा की और भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने की बात कही।
रणवीर सिंह की कानूनी प्रतिक्रिया भी बनी चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह ने भी FWICE को एक कानूनी नोटिस भेजा था। हालांकि उस नोटिस में क्या मांगें रखी गई थीं, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। कानूनी प्रक्रिया और संगठनात्मक संवाद दोनों ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बड़े विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाना संभव है।
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे विवाद के दौरान प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। गिल्ड ने कहा कि हाल के वर्षों में कई कलाकार और तकनीशियन अंतिम समय में प्रोजेक्ट छोड़ रहे हैं, जिससे निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गिल्ड के अनुसार, जब किसी फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली होती है या रिलीज के करीब होती है, तब किसी प्रमुख कलाकार का हटना पूरे प्रोजेक्ट को प्रभावित कर सकता है। इसका असर केवल निर्माता पर ही नहीं बल्कि सैकड़ों तकनीशियनों, क्रू सदस्यों और अन्य कर्मचारियों पर भी पड़ता है। संगठन ने सभी पक्षों से पेशेवर प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने की अपील की।
यह पूरा मामला फिल्म उद्योग में पेशेवर अनुशासन और पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता को उजागर करता है। एक तरफ कलाकारों को अपने फैसलों का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर निर्माताओं और तकनीशियनों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है। FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन आदेश वापस लेना यह संकेत देता है कि फिल्म इंडस्ट्री टकराव से ज्यादा संवाद और सहयोग को महत्व देती है। इससे आने वाले समय में कलाकारों और निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद की जा सकती है।
