CGPSC भर्ती घोटाले में फिर बड़ी कार्रवाई: परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर रेड

रायपुर,(छ.ग.)

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रायपुर, दुर्ग और भिलाई में जांच एजेंसियों की छापेमारी से मचा हड़कंप, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की चर्चित भर्ती अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों ने रायपुर, दुर्ग और भिलाई सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के केंद्र में परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव और राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के निवास शामिल रहे। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

जानकारी के अनुसार जांच टीम ने रायपुर स्थित परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के निवास पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। वहीं भिलाई सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के घर पर भी अधिकारियों की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का परीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए संबंधित परिसरों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया।

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप

CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों तथा करीबी उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देकर डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां दिलाई गईं। इससे हजारों योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने की आशंका जताई गई है।

प्रश्नपत्र लीक और पक्षपात के आरोप

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार तत्कालीन आयोग पदाधिकारियों पर परीक्षा गोपनीयता भंग करने और प्रश्नपत्र लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोपों के अनुसार कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और किन अधिकारियों की इसमें भूमिका रही।

पूर्व अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों पर जांच का दायरा

जांच के दायरे में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या चयन प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को विशेष लाभ दिया गया था। भिलाई स्थित पूर्व राजभवन सचिव अमृत खलखो के निवास पर भी जांच जारी है। जांच अधिकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहे हैं। एजेंसियों का उद्देश्य पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर तथ्यों को सामने लाना है।

पिछले वर्ष हुई थीं कई गिरफ्तारियां

CGPSC भर्ती घोटाले की जांच के दौरान पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पिछले वर्ष सितंबर में आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और चयनित उम्मीदवार शामिल थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अब तक प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।

योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की कोशिश

प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों ने लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए थे। सार्वजनिक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी बल्कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी।

जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य

ताजा छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच को नई दिशा दे सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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03 Jun 2026 By Vaishnavi.J

CGPSC भर्ती घोटाले में फिर बड़ी कार्रवाई: परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर रेड

रायपुर,(छ.ग.)

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की चर्चित भर्ती अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों ने रायपुर, दुर्ग और भिलाई सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के केंद्र में परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव और राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के निवास शामिल रहे। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

जानकारी के अनुसार जांच टीम ने रायपुर स्थित परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के निवास पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। वहीं भिलाई सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के घर पर भी अधिकारियों की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का परीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए संबंधित परिसरों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया।

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप

CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों तथा करीबी उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देकर डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां दिलाई गईं। इससे हजारों योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने की आशंका जताई गई है।

प्रश्नपत्र लीक और पक्षपात के आरोप

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार तत्कालीन आयोग पदाधिकारियों पर परीक्षा गोपनीयता भंग करने और प्रश्नपत्र लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोपों के अनुसार कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और किन अधिकारियों की इसमें भूमिका रही।

पूर्व अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों पर जांच का दायरा

जांच के दायरे में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या चयन प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को विशेष लाभ दिया गया था। भिलाई स्थित पूर्व राजभवन सचिव अमृत खलखो के निवास पर भी जांच जारी है। जांच अधिकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहे हैं। एजेंसियों का उद्देश्य पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर तथ्यों को सामने लाना है।

पिछले वर्ष हुई थीं कई गिरफ्तारियां

CGPSC भर्ती घोटाले की जांच के दौरान पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पिछले वर्ष सितंबर में आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और चयनित उम्मीदवार शामिल थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अब तक प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।

योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की कोशिश

प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों ने लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए थे। सार्वजनिक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी बल्कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी।

जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य

ताजा छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच को नई दिशा दे सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-again-in-cgpsc-recruitment-scam-raid-at-the/article-54868

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