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सोना ₹1,030 और चांदी ₹3,300 सस्ती, निवेशकों की नजर बाजार के अगले रुख पर
बिजनेस डेस्क
ऑल टाइम हाई से सोना ₹21 हजार और चांदी ₹1.24 लाख नीचे, मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर
देशभर के सर्राफा बाजार में बुधवार 3 जून को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ दिनों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच आज सोने की कीमत में 1,030 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई, जबकि चांदी 3,300 रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना अब 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत घटकर 2.62 लाख रुपए प्रति किलो रह गई है।
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार बाजार में इस समय निवेशकों का रुख काफी सतर्क बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और निवेश रणनीतियों में बदलाव के चलते कीमती धातुओं पर दबाव देखा जा रहा है। यही वजह है कि इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोना और चांदी अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। अगर सोने की बात करें तो वर्ष 2026 की शुरुआत में इसमें लगातार तेजी देखने को मिली थी। 31 दिसंबर 2025 को जहां 24 कैरेट सोना करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वहीं जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त उछाल आया। 29 जनवरी 2026 को सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया था। उस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की तलाश ने सोने की मांग को बढ़ाया था।
हालांकि इसके बाद बाजार का रुख बदलना शुरू हुआ। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा। मौजूदा समय में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 21 हजार रुपए नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में बड़े निवेशकों की बिकवाली और नकदी की बढ़ती मांग इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा देखने को मिला है। साल की शुरुआत में चांदी करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही थी। इसके बाद तेजी का दौर आया और 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का ऐतिहासिक उच्च स्तर दर्ज किया। लेकिन इसके बाद कीमतों में लगातार गिरावट शुरू हुई और अब चांदी 2.62 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है।
आंकड़ों के अनुसार चांदी अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 1.24 लाख रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। पिछले करीब चार महीनों में यह गिरावट निवेशकों और कारोबारियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। चांदी में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई, जिसका असर कीमतों पर साफ दिखाई दिया। आमतौर पर जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तब निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच कई निवेशक नकदी को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की होल्डिंग कम कर रहे हैं और नकद राशि बढ़ा रहे हैं।
अनिश्चित परिस्थितियों में तुरंत उपलब्ध नकदी अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। यही वजह है कि सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ी है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी मांग और आपूर्ति के समीकरणों ने कीमतों को प्रभावित किया है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में आमतौर पर सोने और चांदी की मांग बढ़ती है, लेकिन वर्तमान समय में ग्राहक कीमतों की दिशा को लेकर इंतजार की स्थिति में हैं। कई खरीदारों को उम्मीद है कि कीमतों में और नरमी आ सकती है, इसलिए वे खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल रहे हैं।
वहीं निवेशकों का एक वर्ग इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए सोना और चांदी अब भी मजबूत विकल्प बने हुए हैं। कीमतों में आई गिरावट से नए निवेशकों को बाजार में प्रवेश करने का मौका मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश से पहले बाजार की परिस्थितियों और व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की गतिविधियां, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और वैश्विक आर्थिक संकेतक सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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सोना ₹1,030 और चांदी ₹3,300 सस्ती, निवेशकों की नजर बाजार के अगले रुख पर
बिजनेस डेस्क
देशभर के सर्राफा बाजार में बुधवार 3 जून को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ दिनों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच आज सोने की कीमत में 1,030 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई, जबकि चांदी 3,300 रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना अब 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत घटकर 2.62 लाख रुपए प्रति किलो रह गई है।
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार बाजार में इस समय निवेशकों का रुख काफी सतर्क बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और निवेश रणनीतियों में बदलाव के चलते कीमती धातुओं पर दबाव देखा जा रहा है। यही वजह है कि इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोना और चांदी अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। अगर सोने की बात करें तो वर्ष 2026 की शुरुआत में इसमें लगातार तेजी देखने को मिली थी। 31 दिसंबर 2025 को जहां 24 कैरेट सोना करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वहीं जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त उछाल आया। 29 जनवरी 2026 को सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया था। उस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की तलाश ने सोने की मांग को बढ़ाया था।
हालांकि इसके बाद बाजार का रुख बदलना शुरू हुआ। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा। मौजूदा समय में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 21 हजार रुपए नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में बड़े निवेशकों की बिकवाली और नकदी की बढ़ती मांग इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा देखने को मिला है। साल की शुरुआत में चांदी करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही थी। इसके बाद तेजी का दौर आया और 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का ऐतिहासिक उच्च स्तर दर्ज किया। लेकिन इसके बाद कीमतों में लगातार गिरावट शुरू हुई और अब चांदी 2.62 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है।
आंकड़ों के अनुसार चांदी अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 1.24 लाख रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। पिछले करीब चार महीनों में यह गिरावट निवेशकों और कारोबारियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। चांदी में तेजी से हुई बढ़ोतरी के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई, जिसका असर कीमतों पर साफ दिखाई दिया। आमतौर पर जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध जैसी परिस्थितियां बनती हैं, तब निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच कई निवेशक नकदी को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए कीमती धातुओं की होल्डिंग कम कर रहे हैं और नकद राशि बढ़ा रहे हैं।
अनिश्चित परिस्थितियों में तुरंत उपलब्ध नकदी अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। यही वजह है कि सोने और चांदी में बिकवाली बढ़ी है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना रहा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी मांग और आपूर्ति के समीकरणों ने कीमतों को प्रभावित किया है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह और त्योहारों के मौसम में आमतौर पर सोने और चांदी की मांग बढ़ती है, लेकिन वर्तमान समय में ग्राहक कीमतों की दिशा को लेकर इंतजार की स्थिति में हैं। कई खरीदारों को उम्मीद है कि कीमतों में और नरमी आ सकती है, इसलिए वे खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल रहे हैं।
वहीं निवेशकों का एक वर्ग इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए सोना और चांदी अब भी मजबूत विकल्प बने हुए हैं। कीमतों में आई गिरावट से नए निवेशकों को बाजार में प्रवेश करने का मौका मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश से पहले बाजार की परिस्थितियों और व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की गतिविधियां, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और वैश्विक आर्थिक संकेतक सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
