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राजपाल यादव पर 16.61 करोड़ के लोन का संकट गहराया, पैतृक घर पर कुर्की नोटिस; 34 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो होगी नीलामी
बालीवुड न्यूज़
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने शाहजहांपुर स्थित पैतृक मकान पर नोटिस चस्पा किया, परिवार ने कहा- बैंक से बातचीत जारी है; चेक बाउंस मामले में भी पहले से चल रही है कानूनी कार्रवाई
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी और वित्तीय विवादों को लेकर चर्चा में हैं। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में स्थित उनके पैतृक घर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16.61 करोड़ रुपये के बकाया ऋण को लेकर कुर्की का नोटिस चस्पा किया है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। नोटिस लगने की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई, वहीं परिवार की ओर से मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने का दावा किया गया है।
बैंक द्वारा जारी नोटिस के अनुसार राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी यादव के नाम पर लिया गया 16.61 करोड़ रुपये का ऋण अब भी बकाया है। बैंक ने भुगतान के लिए 34 दिनों का समय दिया है। यदि इस अवधि में बकाया राशि जमा नहीं होती है तो 9 सितंबर को संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि नोटिस लगाए जाने के कुछ समय बाद ही परिवार के लोगों ने उसे हटा दिया।
राजपाल यादव के बड़े भाई श्रीपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। बैंक और परिवार के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिससे लगे कि मकान की तत्काल नीलामी होने जा रही है। उनका कहना है कि परिवार इस मामले को कानूनी और बैंकिंग प्रक्रिया के तहत सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार यह विवाद पिछले कई वर्षों से चल रहा है। बैंक प्रबंधन ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले भी इसी संपत्ति पर नोटिस लगाया गया था। उस समय बैंक और उधारकर्ताओं के बीच भुगतान को लेकर सहमति बनी थी, जिसके चलते तत्काल आगे की कार्रवाई रोक दी गई थी। लेकिन तय शर्तों के अनुसार पूरा भुगतान नहीं होने के कारण अब बैंक ने दोबारा कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
बैंक के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि शाहजहांपुर के कुंद्रा गांव स्थित पैतृक मकान पर बैंक कर्मचारियों ने विधिवत नोटिस चस्पा किया। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि निर्धारित समय के भीतर बकाया राशि जमा नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की जाएगी। बैंक का कहना है कि यह कार्रवाई बैंकिंग नियमों और ऋण वसूली प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
राजपाल यादव पहले से ही एक अन्य कानूनी मामले का सामना कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में तीन महीने की सजा सुनाई थी। अदालत ने प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था। इस तरह कुल देय राशि 7.35 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि राजपाल यादव पहले ही लगभग दो करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं, जिसे कुल राशि में समायोजित किया जाएगा।
चेक बाउंस का यह मामला उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने बतौर निर्देशक लगभग पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी, जिसके बाद वित्तीय दायित्व बढ़ते चले गए। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण चेक बाउंस के मामले दर्ज हुए और विवाद अदालत तक पहुंच गया।
इस मामले में वर्ष 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। बाद में वर्ष 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए बकाया राशि जमा करने का अवसर दिया था। अदालत ने लगभग नौ करोड़ रुपये के भुगतान का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समय में पूरी राशि जमा नहीं हो सकी।
इसके बाद अदालत ने फरवरी 2026 में राजपाल यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया। उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया, जहां कुछ दिन रहने के बाद उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई। फिलहाल वे जेल से बाहर हैं, लेकिन चेक बाउंस और ऋण संबंधी दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
फिल्मी दुनिया में राजपाल यादव अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई सफल फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं और लंबे समय तक हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में वे फिल्मों से अधिक अपने कानूनी मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।
बैंक की ओर से जारी ताजा नोटिस ने एक बार फिर उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। यदि निर्धारित समय के भीतर बैंक और उधारकर्ताओं के बीच कोई समझौता नहीं होता या बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तो संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर परिवार लगातार दावा कर रहा है कि बैंक से बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है और मामले का समाधान जल्द निकल सकता है।
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बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी और वित्तीय विवादों को लेकर चर्चा में हैं। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में स्थित उनके पैतृक घर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16.61 करोड़ रुपये के बकाया ऋण को लेकर कुर्की का नोटिस चस्पा किया है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। नोटिस लगने की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई, वहीं परिवार की ओर से मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने का दावा किया गया है।
बैंक द्वारा जारी नोटिस के अनुसार राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी यादव के नाम पर लिया गया 16.61 करोड़ रुपये का ऋण अब भी बकाया है। बैंक ने भुगतान के लिए 34 दिनों का समय दिया है। यदि इस अवधि में बकाया राशि जमा नहीं होती है तो 9 सितंबर को संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि नोटिस लगाए जाने के कुछ समय बाद ही परिवार के लोगों ने उसे हटा दिया।
राजपाल यादव के बड़े भाई श्रीपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है। बैंक और परिवार के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिससे लगे कि मकान की तत्काल नीलामी होने जा रही है। उनका कहना है कि परिवार इस मामले को कानूनी और बैंकिंग प्रक्रिया के तहत सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार यह विवाद पिछले कई वर्षों से चल रहा है। बैंक प्रबंधन ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले भी इसी संपत्ति पर नोटिस लगाया गया था। उस समय बैंक और उधारकर्ताओं के बीच भुगतान को लेकर सहमति बनी थी, जिसके चलते तत्काल आगे की कार्रवाई रोक दी गई थी। लेकिन तय शर्तों के अनुसार पूरा भुगतान नहीं होने के कारण अब बैंक ने दोबारा कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
बैंक के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि शाहजहांपुर के कुंद्रा गांव स्थित पैतृक मकान पर बैंक कर्मचारियों ने विधिवत नोटिस चस्पा किया। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि निर्धारित समय के भीतर बकाया राशि जमा नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की जाएगी। बैंक का कहना है कि यह कार्रवाई बैंकिंग नियमों और ऋण वसूली प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
राजपाल यादव पहले से ही एक अन्य कानूनी मामले का सामना कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में तीन महीने की सजा सुनाई थी। अदालत ने प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था। इस तरह कुल देय राशि 7.35 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि राजपाल यादव पहले ही लगभग दो करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं, जिसे कुल राशि में समायोजित किया जाएगा।
चेक बाउंस का यह मामला उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने बतौर निर्देशक लगभग पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी, जिसके बाद वित्तीय दायित्व बढ़ते चले गए। समय पर भुगतान नहीं होने के कारण चेक बाउंस के मामले दर्ज हुए और विवाद अदालत तक पहुंच गया।
इस मामले में वर्ष 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। बाद में वर्ष 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए बकाया राशि जमा करने का अवसर दिया था। अदालत ने लगभग नौ करोड़ रुपये के भुगतान का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समय में पूरी राशि जमा नहीं हो सकी।
इसके बाद अदालत ने फरवरी 2026 में राजपाल यादव को सरेंडर करने का आदेश दिया। उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया, जहां कुछ दिन रहने के बाद उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई। फिलहाल वे जेल से बाहर हैं, लेकिन चेक बाउंस और ऋण संबंधी दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
फिल्मी दुनिया में राजपाल यादव अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई सफल फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं और लंबे समय तक हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में वे फिल्मों से अधिक अपने कानूनी मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।
बैंक की ओर से जारी ताजा नोटिस ने एक बार फिर उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। यदि निर्धारित समय के भीतर बैंक और उधारकर्ताओं के बीच कोई समझौता नहीं होता या बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तो संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर परिवार लगातार दावा कर रहा है कि बैंक से बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है और मामले का समाधान जल्द निकल सकता है।
