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Peddi Review: ब्लॉकबस्टर मनोरंजन के साथ दिल जीत ले गए राम चरण
Bollywood news
'पेद्दि' रिव्यू: कमर्शियल सिनेमा के दौर में 'मास एंटरटेनमेंट' और 'इमोशंस' का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन; राम चरण ने दी करियर की सबसे यादगार परफॉर्मेंस
आज के इस दौर में जहाँ कमर्शियल फिल्मों में अक्सर कहानी से ज्यादा उसके बड़े स्केल और बजट को तवज्जो दी जाती है, वहाँ 'पेद्दि' (Peddi) एक दुर्लभ और शानदार अपवाद बनकर उभरती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो थिएटर्स में दर्शकों का जबरदस्त मनोरंजन तो करती ही है, साथ ही अपनी कहानी के इमोशनल कोर (भावनात्मक पहलू) को भी कभी हाथ से नहीं छूटने देती। नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना ने एक बड़ी और ग्रैंड इवेंट फिल्म बनाने के इस सफर को बेहद कामयाबी के साथ पूरा किया है, और खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म की उस क्रेडिबिलिटी और सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया जो उनकी पहचान है।
फिल्म की असली जान राम चरण हैं, जिन्होंने यहाँ अपने करियर की सबसे बेहतरीन और यादगार परफॉर्मेंसेस में से एक दी है। अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'RRR' की ही तरह, राम चरण ने इस फिल्म में भी इंटेंसिटी (गंभीरता), सेंसिटिविटी और कमाल के चार्म का ऐसा कॉम्बिनेशन पेश किया है जो उनके किरदार को लार्जर-दैन-लाइफ (दिखने में बड़ा) बनाने के साथ-साथ दर्शकों के बेहद करीब ले आता है। शोषण के खिलाफ लड़ने वाले एक साधारण से लड़के से लेकर रेजिलिएंस (अदम्य साहस) का प्रतीक बनने तक का उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन बहुत ही रियलिस्टिक और दिल को छू लेने वाला है।
जो बात 'पेद्दि' को सबसे अलग और खास बनाती है, वो है फिल्म के साथ दर्शकों का इमोशनल कनेक्शन। कहानी में हीरो की हर एक जीत सही मायनों में कमाई हुई लगती है, उसका हर एक नुकसान आपको दर्द देता है और उसकी हर कामयाबी सीधे आपके दिल पर लगती है। किरदार के उतार-चढ़ाव को इतनी बारीकी और सटीकता से बुना गया है कि दर्शक शुरू से अंत तक फिल्म के साथ इमोशनली जुड़े रहते हैं।
फिल्म के स्पोर्ट्स-ड्रामा वाले हिस्से को बहुत ही भव्य स्तर पर और पूरे विश्वास के साथ फिल्माया गया है, जो कई जगहों पर 'दंगल' और 'सुल्तान' जैसी क्लासिक फिल्मों की याद दिलाता है। इसके बावजूद 'पेद्दि' कहीं से भी उनकी कॉपी नहीं लगती। इसके बजाय, यह कहानी में सोशल कमेंट्री (सामाजिक संदेश), इमोशनल ड्रामा और मास एंटरटेनमेंट को एक साथ जोड़कर सिनेमा का एक नया बेंचमार्क सेट करती है।
फिल्म में कई ऐसे मोमेंट्स हैं जो आपकी आँखों में आँसू ला देते हैं, तो वहीं कई सीन्स ऐसे भी हैं जो आपको थिएटर्स में ताली बजाने पर मजबूर कर देते हैं। बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं जो इमोशनल पे-ऑफ (भावनात्मक संतुष्टि) और क्राउड-प्लीजिंग स्पेक्टेकल (दर्शकों को झूमने पर मजबूर करने वाले नजारे) के बीच इस कदर बेहतरीन बैलेंस बना पाती हैं।
'पेद्दि' सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं है, बल्कि यह साहस, गरिमा और लगातार आगे बढ़ते रहने के जज्बे का एक जश्न है। यह फिल्म दर्शकों को एक बार फिर याद दिलाती है कि आखिर क्यों सिनेमा को दुनिया में कहानी कहने का सबसे ताकतवर जरिया माना जाता है।
Review - ****
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Peddi Review: ब्लॉकबस्टर मनोरंजन के साथ दिल जीत ले गए राम चरण
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आज के इस दौर में जहाँ कमर्शियल फिल्मों में अक्सर कहानी से ज्यादा उसके बड़े स्केल और बजट को तवज्जो दी जाती है, वहाँ 'पेद्दि' (Peddi) एक दुर्लभ और शानदार अपवाद बनकर उभरती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो थिएटर्स में दर्शकों का जबरदस्त मनोरंजन तो करती ही है, साथ ही अपनी कहानी के इमोशनल कोर (भावनात्मक पहलू) को भी कभी हाथ से नहीं छूटने देती। नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना ने एक बड़ी और ग्रैंड इवेंट फिल्म बनाने के इस सफर को बेहद कामयाबी के साथ पूरा किया है, और खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म की उस क्रेडिबिलिटी और सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया जो उनकी पहचान है।
फिल्म की असली जान राम चरण हैं, जिन्होंने यहाँ अपने करियर की सबसे बेहतरीन और यादगार परफॉर्मेंसेस में से एक दी है। अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'RRR' की ही तरह, राम चरण ने इस फिल्म में भी इंटेंसिटी (गंभीरता), सेंसिटिविटी और कमाल के चार्म का ऐसा कॉम्बिनेशन पेश किया है जो उनके किरदार को लार्जर-दैन-लाइफ (दिखने में बड़ा) बनाने के साथ-साथ दर्शकों के बेहद करीब ले आता है। शोषण के खिलाफ लड़ने वाले एक साधारण से लड़के से लेकर रेजिलिएंस (अदम्य साहस) का प्रतीक बनने तक का उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन बहुत ही रियलिस्टिक और दिल को छू लेने वाला है।
जो बात 'पेद्दि' को सबसे अलग और खास बनाती है, वो है फिल्म के साथ दर्शकों का इमोशनल कनेक्शन। कहानी में हीरो की हर एक जीत सही मायनों में कमाई हुई लगती है, उसका हर एक नुकसान आपको दर्द देता है और उसकी हर कामयाबी सीधे आपके दिल पर लगती है। किरदार के उतार-चढ़ाव को इतनी बारीकी और सटीकता से बुना गया है कि दर्शक शुरू से अंत तक फिल्म के साथ इमोशनली जुड़े रहते हैं।
फिल्म के स्पोर्ट्स-ड्रामा वाले हिस्से को बहुत ही भव्य स्तर पर और पूरे विश्वास के साथ फिल्माया गया है, जो कई जगहों पर 'दंगल' और 'सुल्तान' जैसी क्लासिक फिल्मों की याद दिलाता है। इसके बावजूद 'पेद्दि' कहीं से भी उनकी कॉपी नहीं लगती। इसके बजाय, यह कहानी में सोशल कमेंट्री (सामाजिक संदेश), इमोशनल ड्रामा और मास एंटरटेनमेंट को एक साथ जोड़कर सिनेमा का एक नया बेंचमार्क सेट करती है।
फिल्म में कई ऐसे मोमेंट्स हैं जो आपकी आँखों में आँसू ला देते हैं, तो वहीं कई सीन्स ऐसे भी हैं जो आपको थिएटर्स में ताली बजाने पर मजबूर कर देते हैं। बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं जो इमोशनल पे-ऑफ (भावनात्मक संतुष्टि) और क्राउड-प्लीजिंग स्पेक्टेकल (दर्शकों को झूमने पर मजबूर करने वाले नजारे) के बीच इस कदर बेहतरीन बैलेंस बना पाती हैं।
'पेद्दि' सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं है, बल्कि यह साहस, गरिमा और लगातार आगे बढ़ते रहने के जज्बे का एक जश्न है। यह फिल्म दर्शकों को एक बार फिर याद दिलाती है कि आखिर क्यों सिनेमा को दुनिया में कहानी कहने का सबसे ताकतवर जरिया माना जाता है।
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