ISRO GSLV-F17 मिशन से पहले तिरुमला पहुंचे चेयरमैन वी. नारायणन, भगवान वेंकटेश्वर से मांगा आशीर्वाद

Digital Desk

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4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17/EOS-05 मिशन का प्रस्तावित प्रक्षेपण होगा। इससे पहले ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने तिरुमला मंदिर में दर्शन कर मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बुधवार को तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन किए। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब ISRO अपने महत्वपूर्ण GSLV-F17/EOS-05 मिशन के प्रक्षेपण की अंतिम तैयारियों में जुटा है। मिशन को 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाना है। 

डॉ. नारायणन अपने साथ GSLV-F17 रॉकेट का मॉडल भी लेकर मंदिर पहुंचे। मंदिर में उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर आगामी मिशन की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा। दर्शन के बाद वैदिक विद्वानों ने रंगनायकुला मंडपम में वेद आशीर्वचन किया। मंदिर प्रशासन की ओर से ISRO चेयरमैन को मंदिर का पवित्र वस्त्र और श्रीवारी तीर्थ प्रसाद भी भेंट किया गया। 

4 सितंबर को होगा GSLV-F17 का प्रक्षेपण

ISRO के आधिकारिक मिशन विवरण के मुताबिक, GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान होगी। रॉकेट EOS-05 उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा। 

ISRO ने मिशन के लिए 4 सितंबर को सुबह 2:55 बजे IST का समय निर्धारित किया है। यानी यह प्रक्षेपण रात के अंतिम पहर में होगा, जब देश के अधिकांश हिस्सों में लोग सो रहे होंगे।

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EOS-05 क्यों है महत्वपूर्ण?

EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है और ISRO के अनुसार यह भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट होगा जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पृथ्वी की निगरानी से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करना है। 

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जियोसिंक्रोनस कक्षा में उपग्रह की तैनाती से भारत को बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी और पृथ्वी से जुड़े आंकड़े जुटाने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। EOS-05 से मिलने वाली इमेजिंग क्षमता का उपयोग पृथ्वी अवलोकन से जुड़े विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जा सकेगा। 

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मिशन पर ISRO की नजर

GSLV-F17/EOS-05 मिशन ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पृथ्वी अवलोकन क्षमता को एक नए कक्षीय स्तर तक ले जाने का प्रयास है। ISRO की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक GSLV-F17 मिशन के जरिए EOS-05 को सब-GTO में पहुंचाया जाएगा, जिसके बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

4 सितंबर की लॉन्चिंग से पहले ISRO की टीम रॉकेट और पेलोड से जुड़ी अंतिम तैयारियों और जांच को पूरा कर रही है। मिशन की सफलता के बाद EOS-05 भारत की अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जोड़ सकता है।

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