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भोपाल में खुदी सड़कों ने बढ़ाई मुसीबत, तीन दिन में सुधार का अल्टीमेटम
भोपाल,(म.प्र.)
हल्की बारिश ने खोली सीवरेज प्रोजेक्ट की पोल, निगम के प्रभारी इंजीनियर बोले- सड़कें नहीं सुधरीं तो पद छोड़ दूंगा
भोपाल में मानसून की पहली बारिश ने शहर की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। पिछले 24 घंटों में करीब 12 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, लेकिन इतनी सी बारिश ने शहर के कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। जगह-जगह सीवरेज लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें कीचड़ और पानी से भर गईं। हालत यह रही कि शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक कई लोग फिसलकर घायल हो गए। पैदल चलना मुश्किल हो गया और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिवाजी नगर, छह नंबर, गौतम नगर, रचना नगर, शांति निकेतन, एमपी नगर, लालघाटी, नीलबड़, बैरागढ़ और रातीबड़ जैसे कई इलाकों में सड़कें कीचड़ में तब्दील नजर आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से पहले ही सड़कें खराब थीं, लेकिन पानी गिरते ही स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। कई जगहों पर खुदाई के बाद सड़कों का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
नगर निगम के प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी ने माना कि खुदाई के कारण नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले तीन दिनों के भीतर सड़क सुधार और रेस्टोरेशन का काम पूरा कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो वह अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पिछले कई महीनों से लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
दरअसल यह समस्या नई नहीं है। पिछले छह महीने से शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवरेज नेटवर्क बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की गई है। नरेला, हुजूर और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में करीब 100 किलोमीटर सड़कें खोदी गईं। इनमें से लगभग 60 किलोमीटर सड़कें तो बहाल कर दी गई हैं, लेकिन करीब 40 किलोमीटर सड़कों का रेस्टोरेशन अब भी अधूरा पड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार खुदाई के 21 दिनों के भीतर सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर छह महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
नर्मदापुरम रोड स्थित इंदुस कॉलोनी में बारिश के बाद सड़क तालाब जैसी दिखाई दी। सीवरेज लाइन के लिए की गई खुदाई के बाद सड़क का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया था। पहली ही बारिश में वहां पानी भर गया और कीचड़ फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन निकालना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा।
नीलबड़ के बरखेड़ी खुर्द क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। यहां जनवरी में सड़क खोदी गई थी, लेकिन अब तक उसे ठीक नहीं किया गया। रविवार सुबह एक पानी का टैंकर कीचड़ में फंस गया, जिसके बाद काफी देर तक रास्ता बाधित रहा। स्थानीय निवासी राजेंद्र आहूजा का कहना है कि पिछले छह महीनों से लोग परेशान हैं और अब बारिश ने मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। छोटे वाहन और स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
लालघाटी के विजय नगर क्षेत्र में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां जनवरी से खुदाई का काम चल रहा है और सड़क बहाली का इंतजार अब भी जारी है। स्थानीय निवासी लक्ष्मण लालवानी का कहना है कि खराब सड़क और कीचड़ के कारण बुजुर्गों ने घर से निकलना लगभग बंद कर दिया है। महिलाओं और बच्चों को भी काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि शिकायतों के बाद ठेकेदार बदला गया, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
नगर निगम का दावा है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। निगम अब तक चार ठेकेदारों को 50 से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। इसके अलावा करीब 25 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। हालांकि इसके बावजूद जमीनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि केवल नोटिस और जुर्माने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि काम समय पर पूरा होना चाहिए।
रचना नगर के निवासी एमके शर्मा बताते हैं कि उनके इलाके में चार महीने से खुदाई का काम चल रहा है। बारिश शुरू होने से पहले ही लोगों को अंदेशा था कि सड़कें कीचड़ में बदल जाएंगी। रविवार को कई लोग फिसलकर गिर गए और कुछ को चोटें भी आईं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़कों का रेस्टोरेशन कर दिया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती। शहर की तीन प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में 40 किलोमीटर सड़क सुधार कार्य अब भी अधूरा है। इनमें नरेला और गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब 20 किलोमीटर, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में 15 किलोमीटर और हुजूर क्षेत्र में लगभग 5 किलोमीटर सड़कें शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग अब जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और यदि समय रहते सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
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भोपाल में खुदी सड़कों ने बढ़ाई मुसीबत, तीन दिन में सुधार का अल्टीमेटम
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में मानसून की पहली बारिश ने शहर की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। पिछले 24 घंटों में करीब 12 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, लेकिन इतनी सी बारिश ने शहर के कई इलाकों की तस्वीर बदल दी। जगह-जगह सीवरेज लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें कीचड़ और पानी से भर गईं। हालत यह रही कि शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक कई लोग फिसलकर घायल हो गए। पैदल चलना मुश्किल हो गया और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिवाजी नगर, छह नंबर, गौतम नगर, रचना नगर, शांति निकेतन, एमपी नगर, लालघाटी, नीलबड़, बैरागढ़ और रातीबड़ जैसे कई इलाकों में सड़कें कीचड़ में तब्दील नजर आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश से पहले ही सड़कें खराब थीं, लेकिन पानी गिरते ही स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। कई जगहों पर खुदाई के बाद सड़कों का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
नगर निगम के प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी ने माना कि खुदाई के कारण नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले तीन दिनों के भीतर सड़क सुधार और रेस्टोरेशन का काम पूरा कर दिया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो वह अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि पिछले कई महीनों से लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
दरअसल यह समस्या नई नहीं है। पिछले छह महीने से शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवरेज नेटवर्क बिछाने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की गई है। नरेला, हुजूर और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में करीब 100 किलोमीटर सड़कें खोदी गईं। इनमें से लगभग 60 किलोमीटर सड़कें तो बहाल कर दी गई हैं, लेकिन करीब 40 किलोमीटर सड़कों का रेस्टोरेशन अब भी अधूरा पड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार खुदाई के 21 दिनों के भीतर सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर छह महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
नर्मदापुरम रोड स्थित इंदुस कॉलोनी में बारिश के बाद सड़क तालाब जैसी दिखाई दी। सीवरेज लाइन के लिए की गई खुदाई के बाद सड़क का पुनर्निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया था। पहली ही बारिश में वहां पानी भर गया और कीचड़ फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन निकालना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा।
नीलबड़ के बरखेड़ी खुर्द क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। यहां जनवरी में सड़क खोदी गई थी, लेकिन अब तक उसे ठीक नहीं किया गया। रविवार सुबह एक पानी का टैंकर कीचड़ में फंस गया, जिसके बाद काफी देर तक रास्ता बाधित रहा। स्थानीय निवासी राजेंद्र आहूजा का कहना है कि पिछले छह महीनों से लोग परेशान हैं और अब बारिश ने मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। छोटे वाहन और स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
लालघाटी के विजय नगर क्षेत्र में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां जनवरी से खुदाई का काम चल रहा है और सड़क बहाली का इंतजार अब भी जारी है। स्थानीय निवासी लक्ष्मण लालवानी का कहना है कि खराब सड़क और कीचड़ के कारण बुजुर्गों ने घर से निकलना लगभग बंद कर दिया है। महिलाओं और बच्चों को भी काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि शिकायतों के बाद ठेकेदार बदला गया, लेकिन हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
नगर निगम का दावा है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। निगम अब तक चार ठेकेदारों को 50 से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। इसके अलावा करीब 25 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। हालांकि इसके बावजूद जमीनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि केवल नोटिस और जुर्माने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि काम समय पर पूरा होना चाहिए।
रचना नगर के निवासी एमके शर्मा बताते हैं कि उनके इलाके में चार महीने से खुदाई का काम चल रहा है। बारिश शुरू होने से पहले ही लोगों को अंदेशा था कि सड़कें कीचड़ में बदल जाएंगी। रविवार को कई लोग फिसलकर गिर गए और कुछ को चोटें भी आईं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़कों का रेस्टोरेशन कर दिया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती। शहर की तीन प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में 40 किलोमीटर सड़क सुधार कार्य अब भी अधूरा है। इनमें नरेला और गोविंदपुरा क्षेत्र में करीब 20 किलोमीटर, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में 15 किलोमीटर और हुजूर क्षेत्र में लगभग 5 किलोमीटर सड़कें शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग अब जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और यदि समय रहते सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
