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सरकारी पार्क की जमीन पर बने दलदल में महिला डूबी, तीन घंटे बाद मिला शव
मुरैना,(म.प्र.)
मुरैना में कृषि मंत्री के निवास से 200 मीटर दूर हुआ हादसा, एसडीईआरएफ ने थार की हेडलाइट की रोशनी में चलाया देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन
मुरैना शहर में रविवार रात एक दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए। शहर के बिस्मिल नगर इलाके में सरकारी पार्क के लिए आरक्षित जमीन पर बने दलदल में एक महिला के डूबने से मौत हो गई। घटना उस जगह हुई जो मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के निवास से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। देर रात हुए इस हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। महिला को बचाने की कोशिशें की गईं, लेकिन वह दलदल में समाती चली गई और देखते ही देखते लोगों की आंखों के सामने गायब हो गई।
जानकारी के अनुसार घटना रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक महिला अचानक दौड़ती हुई इलाके में पहुंची और वहां मौजूद एक पेड़ की आड़ में जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद वह संतुलन खो बैठी और पास में पानी और कीचड़ से भरे दलदल में जा गिरी। शुरुआत में लोगों को लगा कि महिला आसानी से बाहर निकल आएगी, लेकिन दलदल की गहराई और उसमें फंसे होने के कारण वह लगातार नीचे धंसती चली गई। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
स्थानीय निवासी बल्ली गुर्जर के मुताबिक जब महिला दलदल में फंसी तो लोगों ने तुरंत उसकी मदद के लिए लंबा बांस उसकी ओर बढ़ाया। महिला ने उसे पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। धीरे-धीरे वह बांस की पहुंच से दूर होती गई और कुछ ही मिनटों में दलदल के बीचों-बीच पहुंच गई। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया, लेकिन तब तक हालात गंभीर हो चुके थे। लोगों की आंखों के सामने महिला दलदल में समा गई और फिर दिखाई नहीं दी।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रात का समय होने और इलाके में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब पता चला कि दलदल के पास से कॉलोनी की बिजली की मुख्य लाइन गुजर रही है। पानी में करंट फैलने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद अंधेरे में बचाव कार्य जारी रखना मुश्किल हो गया।
ऐसे में स्थानीय लोगों की मदद से एक थार वाहन मौके पर बुलाया गया। वाहन की तेज हेडलाइटों की रोशनी का उपयोग करते हुए एसडीईआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। दलदल की स्थिति और रात के अंधेरे के कारण बचाव कार्य काफी धीमी गति से चला। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद देर रात लगभग साढ़े बारह बजे टीम महिला के शव को बाहर निकालने में सफल हो सकी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वह जमीन मूल रूप से सरकारी पार्क के लिए आरक्षित बताई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब कॉलोनी विकसित की गई थी, तब इस जमीन को पार्क निर्माण के लिए छोड़ा गया था। नगर निगम को यहां पार्क विकसित करना था, लेकिन वर्षों तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। समय के साथ यहां गंदगी जमा होती गई और बारिश व अन्य स्रोतों से पानी भरने के कारण यह क्षेत्र दलदल में तब्दील हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस जमीन का विकास कर दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता।
हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान यादव ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मर्चुरी में रखवा दिया गया है। महिला की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की जांच की जा रही है ताकि मृतका की पहचान की जा सके। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
वहीं नगर निगम आयुक्त सतेंद्र सिंह धाकरे ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि संबंधित जमीन पार्क के लिए आरक्षित है। उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड में यह जमीन पार्क के लिए चिन्हित है तो दलदल को खत्म कर क्षेत्र का विकास कराया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी इस जमीन की जानकारी नगर निगम को क्यों नहीं थी। दूसरी ओर महापौर शारदा सोलंकी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। यह हादसा केवल एक महिला की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास और प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है। जिस जमीन पर बच्चों के खेलने और लोगों के घूमने के लिए पार्क बनना था, वह आज दलदल बनकर एक जान ले चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो भविष्य में भी ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी।
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सरकारी पार्क की जमीन पर बने दलदल में महिला डूबी, तीन घंटे बाद मिला शव
मुरैना,(म.प्र.)
मुरैना शहर में रविवार रात एक दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए। शहर के बिस्मिल नगर इलाके में सरकारी पार्क के लिए आरक्षित जमीन पर बने दलदल में एक महिला के डूबने से मौत हो गई। घटना उस जगह हुई जो मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के निवास से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। देर रात हुए इस हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। महिला को बचाने की कोशिशें की गईं, लेकिन वह दलदल में समाती चली गई और देखते ही देखते लोगों की आंखों के सामने गायब हो गई।
जानकारी के अनुसार घटना रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक महिला अचानक दौड़ती हुई इलाके में पहुंची और वहां मौजूद एक पेड़ की आड़ में जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद वह संतुलन खो बैठी और पास में पानी और कीचड़ से भरे दलदल में जा गिरी। शुरुआत में लोगों को लगा कि महिला आसानी से बाहर निकल आएगी, लेकिन दलदल की गहराई और उसमें फंसे होने के कारण वह लगातार नीचे धंसती चली गई। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
स्थानीय निवासी बल्ली गुर्जर के मुताबिक जब महिला दलदल में फंसी तो लोगों ने तुरंत उसकी मदद के लिए लंबा बांस उसकी ओर बढ़ाया। महिला ने उसे पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। धीरे-धीरे वह बांस की पहुंच से दूर होती गई और कुछ ही मिनटों में दलदल के बीचों-बीच पहुंच गई। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया, लेकिन तब तक हालात गंभीर हो चुके थे। लोगों की आंखों के सामने महिला दलदल में समा गई और फिर दिखाई नहीं दी।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रात का समय होने और इलाके में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब पता चला कि दलदल के पास से कॉलोनी की बिजली की मुख्य लाइन गुजर रही है। पानी में करंट फैलने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद अंधेरे में बचाव कार्य जारी रखना मुश्किल हो गया।
ऐसे में स्थानीय लोगों की मदद से एक थार वाहन मौके पर बुलाया गया। वाहन की तेज हेडलाइटों की रोशनी का उपयोग करते हुए एसडीईआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। दलदल की स्थिति और रात के अंधेरे के कारण बचाव कार्य काफी धीमी गति से चला। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद देर रात लगभग साढ़े बारह बजे टीम महिला के शव को बाहर निकालने में सफल हो सकी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वह जमीन मूल रूप से सरकारी पार्क के लिए आरक्षित बताई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब कॉलोनी विकसित की गई थी, तब इस जमीन को पार्क निर्माण के लिए छोड़ा गया था। नगर निगम को यहां पार्क विकसित करना था, लेकिन वर्षों तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। समय के साथ यहां गंदगी जमा होती गई और बारिश व अन्य स्रोतों से पानी भरने के कारण यह क्षेत्र दलदल में तब्दील हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस जमीन का विकास कर दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता।
हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान यादव ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मर्चुरी में रखवा दिया गया है। महिला की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की जांच की जा रही है ताकि मृतका की पहचान की जा सके। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
वहीं नगर निगम आयुक्त सतेंद्र सिंह धाकरे ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि संबंधित जमीन पार्क के लिए आरक्षित है। उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड में यह जमीन पार्क के लिए चिन्हित है तो दलदल को खत्म कर क्षेत्र का विकास कराया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी इस जमीन की जानकारी नगर निगम को क्यों नहीं थी। दूसरी ओर महापौर शारदा सोलंकी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। यह हादसा केवल एक महिला की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास और प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है। जिस जमीन पर बच्चों के खेलने और लोगों के घूमने के लिए पार्क बनना था, वह आज दलदल बनकर एक जान ले चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता तो भविष्य में भी ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी।
