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ईरान-ट्रम्प बयानबाजी पर बढ़ा तनाव: यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव तेज
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान ने ट्रम्प के दावों को बताया झूठ, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर उभरा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर एक घंटे के भीतर सात झूठे दावे करने का आरोप लगाया है। गालिबाफ ने कहा कि ऐसे बयानों से न तो अमेरिका को कोई रणनीतिक फायदा होगा और न ही बातचीत में बढ़त मिलेगी।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को कभी बंद न करने पर सहमति दे दी है और वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के साथ मिलकर बाहर भेजने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि देश का यूरेनियम किसी भी हालत में बाहर नहीं भेजा जाएगा।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखता है तो होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। गालिबाफ ने कहा कि जहाजों की आवाजाही केवल ईरान की अनुमति और तय मार्गों के अनुसार ही होगी, और इसका फैसला जमीनी हालात के आधार पर लिया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता। ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अंतिम समझौते तक दबाव बनाए रखा जाएगा।
पिछले 24 घंटों में हालात मिले-जुले रहे हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खुला बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि परिस्थितियों के बिगड़ने पर इसे फिर से बंद किया जा सकता है। इसी दौरान एक क्रूज जहाज के इस मार्ग से गुजरने की खबर ने संकेत दिया है कि सीमित स्तर पर आवाजाही फिर शुरू हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हैं। तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत का अगला दौर स्थिति को और स्पष्ट कर सकता है। फिलहाल, यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।
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ईरान-ट्रम्प बयानबाजी पर बढ़ा तनाव: यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव तेज
अंतराष्ट्रीय न्यूज
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर एक घंटे के भीतर सात झूठे दावे करने का आरोप लगाया है। गालिबाफ ने कहा कि ऐसे बयानों से न तो अमेरिका को कोई रणनीतिक फायदा होगा और न ही बातचीत में बढ़त मिलेगी।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को कभी बंद न करने पर सहमति दे दी है और वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के साथ मिलकर बाहर भेजने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि देश का यूरेनियम किसी भी हालत में बाहर नहीं भेजा जाएगा।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखता है तो होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। गालिबाफ ने कहा कि जहाजों की आवाजाही केवल ईरान की अनुमति और तय मार्गों के अनुसार ही होगी, और इसका फैसला जमीनी हालात के आधार पर लिया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता। ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अंतिम समझौते तक दबाव बनाए रखा जाएगा।
पिछले 24 घंटों में हालात मिले-जुले रहे हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खुला बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि परिस्थितियों के बिगड़ने पर इसे फिर से बंद किया जा सकता है। इसी दौरान एक क्रूज जहाज के इस मार्ग से गुजरने की खबर ने संकेत दिया है कि सीमित स्तर पर आवाजाही फिर शुरू हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हैं। तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत का अगला दौर स्थिति को और स्पष्ट कर सकता है। फिलहाल, यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।
