ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला

बिजनेस डेस्क

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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।

भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।

तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।

हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।

अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।

विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।

मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।

बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।

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10 Jun 2026 By Vaishnavi.J

ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला

बिजनेस डेस्क

भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।

तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।

हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।

अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।

विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।

मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।

बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497

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