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TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कल्याण बनर्जी के बयान से हलचल
Digital Desk
राज्यसभा सांसद के इस्तीफे और संगठन के भीतर उठते सवालों के बीच पार्टी नेतृत्व पर बढ़ा दबाव, कई दावों ने तेज की राजनीतिक चर्चा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। पार्टी के भीतर मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी का बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ। इस बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक मामले से जुड़े वकीलों की सूची में बदलाव की जानकारी देर रात दी गई, जबकि वह भी उस मामले से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और संगठन में संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इसका फैसला समय के साथ होगा। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। पिछले कुछ दिनों में पार्टी से जुड़े कई घटनाक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं ने खुलकर कहा है कि वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरा भरोसा रखते हैं और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
अभिनेता से राजनेता बने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघर्ष करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है। इसी तरह अन्य कई नेताओं ने भी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बीच कुछ बागी नेताओं और पूर्व नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में चुनावी नतीजों और संगठनात्मक बदलावों के बाद इस तरह की असहमति सामने आना असामान्य नहीं माना जाता।
राजनीतिक हलकों में उन दावों पर भी चर्चा हो रही है जिनमें कुछ सांसदों और विधायकों के अलग गुट बनाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित नेताओं की ओर से भी कई मामलों में अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। इधर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं को भी कांग्रेस नेतृत्व ने खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातें सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।
उधर, अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। साथ ही जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। यदि नेतृत्व स्तर पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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TMC में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, कल्याण बनर्जी के बयान से हलचल
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। पार्टी के भीतर मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी का बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह उनके साथ हैं या फिर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ। इस बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया है, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक मामले से जुड़े वकीलों की सूची में बदलाव की जानकारी देर रात दी गई, जबकि वह भी उस मामले से जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और संगठन में संवाद की कमी नहीं होनी चाहिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और जनादेश को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी, इसका फैसला समय के साथ होगा। हालांकि उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। पिछले कुछ दिनों में पार्टी से जुड़े कई घटनाक्रमों ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफे और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं ने खुलकर कहा है कि वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पूरा भरोसा रखते हैं और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
अभिनेता से राजनेता बने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघर्ष करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के साथ हैं और नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है। इसी तरह अन्य कई नेताओं ने भी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है। इस बीच कुछ बागी नेताओं और पूर्व नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में चुनावी नतीजों और संगठनात्मक बदलावों के बाद इस तरह की असहमति सामने आना असामान्य नहीं माना जाता।
राजनीतिक हलकों में उन दावों पर भी चर्चा हो रही है जिनमें कुछ सांसदों और विधायकों के अलग गुट बनाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। संबंधित नेताओं की ओर से भी कई मामलों में अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। ऐसे में सभी की नजर आने वाले दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। इधर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं को भी कांग्रेस नेतृत्व ने खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई मुलाकातें सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।
उधर, अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत दी है। साथ ही जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है। इस मामले पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर पड़ सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखने की है। यदि नेतृत्व स्तर पर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रहता है तो मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
