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पुणे से CJP का देशव्यापी आंदोलन शुरू, शिक्षा सुधार की मांग
Digital Desk
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से शुरू हुआ अभियान, शिक्षा सुधारों को लेकर जारी किया गया घोषणापत्र; सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की संभावना
परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और परिणामों में हो रही देरी के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी। इस अभियान का पहला बड़ा प्रदर्शन महाराष्ट्र के पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के समर्थक जुटे।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशभर के छात्रों के सामने शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है।
पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन ने अपना बहुप्रतीक्षित शिक्षा घोषणापत्र भी जारी किया। दिपके ने बताया कि इस घोषणापत्र में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। घोषणापत्र में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने, परीक्षा परिणाम समय पर घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने तथा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का सामना कर रहे हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम महीनों तक लंबित रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे हालात में युवाओं का भरोसा व्यवस्था से कमजोर हो रहा है, जिसे बहाल करना बेहद जरूरी है।
आंदोलन के दौरान संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। दिपके का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है। उन्होंने दावा किया कि जब तक छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पुणे में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। प्रशासन और पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने। हालांकि आयोजकों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखी जाएगी।
इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी आंदोलन में शामिल होने की संभावना जताई गई। प्रदर्शन से एक दिन पहले अभिजीत दिपके और सोनम वांगचुक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दोनों ने लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। वीडियो में वांगचुक ने कहा था कि छात्रों और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वे जल्द ही प्रदर्शन स्थल पहुंचेंगे।
आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आती रही हैं। कई बार परीक्षा रद्द करनी पड़ती है, जिससे छात्रों की तैयारी, समय और आर्थिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुधार नहीं किए गए तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।
CJP द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार यह आंदोलन केवल पुणे तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन आगामी दिनों में देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करेगा। आंदोलन का अगला चरण जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद यह अभियान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचेगा।
दिपके ने बताया कि देशव्यापी यात्रा का समापन 20 जून को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के साथ होगा। संगठन को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। ऐसे में परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे छात्रों के लिए प्राथमिकता बन गए हैं। यही वजह है कि इस तरह के आंदोलनों को युवाओं का समर्थन मिल रहा है।
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पुणे से CJP का देशव्यापी आंदोलन शुरू, शिक्षा सुधार की मांग
Digital Desk
परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और परिणामों में हो रही देरी के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी। इस अभियान का पहला बड़ा प्रदर्शन महाराष्ट्र के पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के समर्थक जुटे।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशभर के छात्रों के सामने शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है।
पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन ने अपना बहुप्रतीक्षित शिक्षा घोषणापत्र भी जारी किया। दिपके ने बताया कि इस घोषणापत्र में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। घोषणापत्र में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने, परीक्षा परिणाम समय पर घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने तथा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का सामना कर रहे हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम महीनों तक लंबित रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे हालात में युवाओं का भरोसा व्यवस्था से कमजोर हो रहा है, जिसे बहाल करना बेहद जरूरी है।
आंदोलन के दौरान संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। दिपके का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है। उन्होंने दावा किया कि जब तक छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पुणे में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। प्रशासन और पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने। हालांकि आयोजकों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखी जाएगी।
इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी आंदोलन में शामिल होने की संभावना जताई गई। प्रदर्शन से एक दिन पहले अभिजीत दिपके और सोनम वांगचुक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दोनों ने लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। वीडियो में वांगचुक ने कहा था कि छात्रों और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वे जल्द ही प्रदर्शन स्थल पहुंचेंगे।
आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आती रही हैं। कई बार परीक्षा रद्द करनी पड़ती है, जिससे छात्रों की तैयारी, समय और आर्थिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुधार नहीं किए गए तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।
CJP द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार यह आंदोलन केवल पुणे तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन आगामी दिनों में देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करेगा। आंदोलन का अगला चरण जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद यह अभियान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचेगा।
दिपके ने बताया कि देशव्यापी यात्रा का समापन 20 जून को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के साथ होगा। संगठन को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। ऐसे में परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे छात्रों के लिए प्राथमिकता बन गए हैं। यही वजह है कि इस तरह के आंदोलनों को युवाओं का समर्थन मिल रहा है।
