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गाजा युद्ध खत्म करने की नई पहल, हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण समझौते पर दुनिया की टिकी निगाहें
Digital Desk
अमेरिका की मध्यस्थता में बनी रूपरेखा के तहत हमास ने चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ने पर जताई सहमति, बदले में इजराइल की सेना की वापसी का प्रस्ताव; लागू होने को लेकर अब भी कई सवाल बरकरार।
करीब तीन वर्षों से जारी गाजा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने एक ऐसे समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत वह चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ने और निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया अपनाने के लिए तैयार है। इसके बदले इजराइल को गाजा से अपनी सेना वापस बुलानी होगी। इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका सहित कई मध्यस्थ देशों ने पुष्टि की है, हालांकि समझौते के सफल क्रियान्वयन को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
इस नई पहल की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। उनके अनुसार, यह समझौता गाजा में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यदि सभी पक्ष तय शर्तों का पालन करते हैं तो गाजा में नई प्रशासनिक व्यवस्था और स्थिरता का रास्ता खुल सकता है।
इस समझौते की रूपरेखा तैयार करने में अमेरिका के साथ मिस्र, कतर और तुर्किये ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन देशों ने मिलकर युद्धविराम के अगले चरण के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार, हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ेगा, जबकि इजराइल अपनी सैन्य टुकड़ियों को गाजा से हटाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की भी योजना बनाई गई है।
हालांकि इससे पहले भी युद्धविराम का समझौता हुआ था, लेकिन वह लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सका। हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास लगातार बना रहा। यही कारण है कि इस बार भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझौते के लागू होने की प्रक्रिया पर विशेष नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह केवल हथियार छोड़ने का समझौता नहीं बल्कि गाजा में नई राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। अमेरिका का मानना है कि यदि गाजा में नई नागरिक प्रशासनिक व्यवस्था सफलतापूर्वक काम करती है तो भविष्य में हिंसा की संभावना कम हो सकती है।
दूसरी ओर, इजराइल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इजराइल के कुछ नेताओं ने समझौते पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि हमास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और भविष्य में फिर से संगठित हो गया तो सुरक्षा के लिए नया खतरा पैदा हो सकता है। कुछ नेताओं ने इस मसौदे को इजराइल की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं बताया है।
पूर्व सैन्य अधिकारियों का भी मानना है कि किसी भी समझौते का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि वह भविष्य में हिंसा रोकने में कितना प्रभावी साबित होता है। उनका कहना है कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी निगरानी और पालन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
हमास ने भी स्पष्ट किया है कि वह बिना शर्त हथियार नहीं छोड़ेगा। संगठन का कहना है कि पहले इजराइल को सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकनी होगी और गाजा से अपनी सेना हटानी होगी। इसके अलावा स्थानीय प्रशासनिक समिति की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय शांति बल की तैनाती और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने जैसी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
हमास के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य गाजा के नागरिकों को लगातार जारी संघर्ष और मानवीय संकट से राहत दिलाना है। संगठन का दावा है कि उसने फिलिस्तीनी जनता के हित में कई महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं ताकि युद्ध समाप्त हो सके और सामान्य जीवन बहाल हो।
हालांकि सभी फिलिस्तीनी संगठनों की राय एक जैसी नहीं है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि अभी तक अंतिम रूप से किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है और वर्तमान मसौदे को लेकर उनके कुछ गंभीर सवाल हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फिलिस्तीनी पक्ष के भीतर भी पूरी तरह एकमत स्थिति नहीं बनी है।
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गाजा युद्ध खत्म करने की नई पहल, हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण समझौते पर दुनिया की टिकी निगाहें
Digital Desk
करीब तीन वर्षों से जारी गाजा युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने एक ऐसे समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत वह चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ने और निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया अपनाने के लिए तैयार है। इसके बदले इजराइल को गाजा से अपनी सेना वापस बुलानी होगी। इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका सहित कई मध्यस्थ देशों ने पुष्टि की है, हालांकि समझौते के सफल क्रियान्वयन को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
इस नई पहल की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। उनके अनुसार, यह समझौता गाजा में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यदि सभी पक्ष तय शर्तों का पालन करते हैं तो गाजा में नई प्रशासनिक व्यवस्था और स्थिरता का रास्ता खुल सकता है।
इस समझौते की रूपरेखा तैयार करने में अमेरिका के साथ मिस्र, कतर और तुर्किये ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन देशों ने मिलकर युद्धविराम के अगले चरण के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार, हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार छोड़ेगा, जबकि इजराइल अपनी सैन्य टुकड़ियों को गाजा से हटाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने की भी योजना बनाई गई है।
हालांकि इससे पहले भी युद्धविराम का समझौता हुआ था, लेकिन वह लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सका। हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास लगातार बना रहा। यही कारण है कि इस बार भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझौते के लागू होने की प्रक्रिया पर विशेष नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह केवल हथियार छोड़ने का समझौता नहीं बल्कि गाजा में नई राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। अमेरिका का मानना है कि यदि गाजा में नई नागरिक प्रशासनिक व्यवस्था सफलतापूर्वक काम करती है तो भविष्य में हिंसा की संभावना कम हो सकती है।
दूसरी ओर, इजराइल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि इजराइल के कुछ नेताओं ने समझौते पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि हमास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और भविष्य में फिर से संगठित हो गया तो सुरक्षा के लिए नया खतरा पैदा हो सकता है। कुछ नेताओं ने इस मसौदे को इजराइल की सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं बताया है।
पूर्व सैन्य अधिकारियों का भी मानना है कि किसी भी समझौते का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि वह भविष्य में हिंसा रोकने में कितना प्रभावी साबित होता है। उनका कहना है कि केवल समझौते पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी निगरानी और पालन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
हमास ने भी स्पष्ट किया है कि वह बिना शर्त हथियार नहीं छोड़ेगा। संगठन का कहना है कि पहले इजराइल को सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकनी होगी और गाजा से अपनी सेना हटानी होगी। इसके अलावा स्थानीय प्रशासनिक समिति की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय शांति बल की तैनाती और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने जैसी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
हमास के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य गाजा के नागरिकों को लगातार जारी संघर्ष और मानवीय संकट से राहत दिलाना है। संगठन का दावा है कि उसने फिलिस्तीनी जनता के हित में कई महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं ताकि युद्ध समाप्त हो सके और सामान्य जीवन बहाल हो।
हालांकि सभी फिलिस्तीनी संगठनों की राय एक जैसी नहीं है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि अभी तक अंतिम रूप से किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है और वर्तमान मसौदे को लेकर उनके कुछ गंभीर सवाल हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फिलिस्तीनी पक्ष के भीतर भी पूरी तरह एकमत स्थिति नहीं बनी है।
