यूपी में भाजपा की नई रणनीति, विनोद तावड़े को प्रदेश प्रभारी बनाया

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बिहार में चुनावी सफलता दिलाने वाले तावड़े को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जगदीश ईश्वरभाई पटेल होंगे सह-प्रभारी

लखनऊ में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश के संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रदेश प्रभारी बनाया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा की नई नियुक्ति को राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। तावड़े को पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति और संगठन को जमीन पर सक्रिय करने वाले नेताओं में गिना जाता है। वे फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद हैं। बिहार में पार्टी के चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी नई नियुक्ति पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम राज्यों में से एक है और यहां संगठन को चुनाव से पहले मजबूत करने की कवायद काफी समय से चल रही है। पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंगलवार को संगठन से जुड़ी कई नियुक्तियों का ऐलान किया, जिसमें तावड़े का नाम भी शामिल रहा।

विनोद तावड़े के पास अलग-अलग राज्यों में संगठन और चुनावी काम संभालने का अनुभव है। उन्हें पहले हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था और बाद में बिहार की जिम्मेदारी दी गई। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही। पार्टी ने चुनावी रणनीति, बूथ स्तर के प्रबंधन और नेताओं के बीच तालमेल पर विशेष जोर दिया था। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा की जीत को संगठन की मजबूत तैयारी से भी जोड़कर देखा गया। इसी अनुभव के चलते अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी चुनावी जिम्मेदारी दी गई है। तावड़े के सामने यूपी में पार्टी के मौजूदा संगठन को चुनावी मोड में लाने की चुनौती होगी। प्रदेश में भाजपा लंबे समय से सत्ता में है और अगले चुनाव में उसे सरकार के कामकाज के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी अपनी पकड़ बनाए रखने की जरूरत होगी। ऐसे में प्रभारी की भूमिका सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला और मंडल स्तर के पदाधिकारियों के साथ लगातार समन्वय भी अहम होगा।

भाजपा ने जगदीश ईश्वरभाई पटेल को यूपी का सह-प्रभारी बनाया है। पटेल को संगठनात्मक काम का अनुभव रखने वाला नेता माना जाता है। नई टीम में उनकी जिम्मेदारी तावड़े के साथ मिलकर राज्य में पार्टी के कार्यक्रमों और चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की होगी। भाजपा के लिए यूपी में बूथ स्तर का नेटवर्क हमेशा से चुनावी ताकत रहा है। आने वाले महीनों में पार्टी इसी नेटवर्क को और सक्रिय करने पर जोर दे सकती है। इसके साथ ही विपक्षी दलों की गतिविधियों पर नजर, स्थानीय मुद्दों की पहचान और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी प्रभारी की जिम्मेदारियों में शामिल रहेंगे। पार्टी के अंदर नई नियुक्तियों के बाद संगठन में काम का बंटवारा भी नए तरीके से होने की संभावना है।

यूपी प्रभारी का पद पिछले कुछ समय से खाली चल रहा था। लोकसभा चुनाव के बाद राधा मोहन सिंह को इस जिम्मेदारी से हटाया गया था। उसके बाद से प्रदेश संगठन को नए प्रभारी का इंतजार था। तावड़े का नाम इस पद के लिए पहले से चर्चा में रहा और अब पार्टी ने औपचारिक तौर पर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी है। तावड़े पहले से उत्तर प्रदेश का काम देख रहे थे, इसलिए राज्य के संगठन और यहां की राजनीतिक परिस्थितियों से वे पूरी तरह अनजान नहीं हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनकी नियुक्ति को अचानक लिया गया फैसला नहीं माना जा रहा। अब उन्हें औपचारिक रूप से प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन के काम में तेजी आने की उम्मीद है। यूपी में जातीय समीकरण, स्थानीय नेतृत्व, बूथ प्रबंधन और विपक्षी गठबंधन चुनावी रणनीति के बड़े हिस्से होंगे।

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भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में कुल 65 पदाधिकारियों को जगह दी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश से जुड़े आठ चेहरे शामिल हैं। संगठन में फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब पार्टी अगले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अलग-अलग राज्यों में जिम्मेदारियां तय कर रही है। यूपी के साथ पंजाब और गुजरात में भी नए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुग को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है। इन राज्यों में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा की नई नियुक्तियों को एक व्यापक चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

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विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र की राजनीति से शुरू हुआ। वह महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और राज्य संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आने के बाद उन्हें अलग-अलग राज्यों का प्रभार दिया गया। हरियाणा में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्हें बिहार भेजा गया था। बिहार में चुनावी कामकाज के दौरान पार्टी ने बूथ स्तर तक अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया था। भाजपा के चुनावी मैनेजमेंट में तावड़े की भूमिका को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जाता है। अब उत्तर प्रदेश में उनके सामने अलग तरह की राजनीतिक चुनौती है। राज्य का आकार बड़ा है, क्षेत्रीय मुद्दे अलग-अलग हैं और हर इलाके का राजनीतिक समीकरण भी बदलता रहता है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक संगठन के सामने अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं।

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यूपी में अगले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के पास अभी समय है, लेकिन पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियों को पहले ही तेज कर दिया है। नई नियुक्ति के बाद तावड़े और पटेल को प्रदेश के नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ तालमेल बनाना होगा। जिलों में पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा, कार्यकर्ताओं से फीडबैक और सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का काम भी बढ़ सकता है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले संगठन के भीतर किसी तरह की कमजोरी न रहे और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय रहें। लखनऊ से लेकर जिलों तक अब नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन की बैठकों और चुनावी तैयारियों का सिलसिला तेज होने की संभावना है।

www.dainikjagranmpcg.com
18 Aug 2026 By Priyanka

यूपी में भाजपा की नई रणनीति, विनोद तावड़े को प्रदेश प्रभारी बनाया

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लखनऊ में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश के संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रदेश प्रभारी बनाया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा की नई नियुक्ति को राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। तावड़े को पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति और संगठन को जमीन पर सक्रिय करने वाले नेताओं में गिना जाता है। वे फिलहाल भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद हैं। बिहार में पार्टी के चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी नई नियुक्ति पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम राज्यों में से एक है और यहां संगठन को चुनाव से पहले मजबूत करने की कवायद काफी समय से चल रही है। पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंगलवार को संगठन से जुड़ी कई नियुक्तियों का ऐलान किया, जिसमें तावड़े का नाम भी शामिल रहा।

विनोद तावड़े के पास अलग-अलग राज्यों में संगठन और चुनावी काम संभालने का अनुभव है। उन्हें पहले हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था और बाद में बिहार की जिम्मेदारी दी गई। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही। पार्टी ने चुनावी रणनीति, बूथ स्तर के प्रबंधन और नेताओं के बीच तालमेल पर विशेष जोर दिया था। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा की जीत को संगठन की मजबूत तैयारी से भी जोड़कर देखा गया। इसी अनुभव के चलते अब उन्हें उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी चुनावी जिम्मेदारी दी गई है। तावड़े के सामने यूपी में पार्टी के मौजूदा संगठन को चुनावी मोड में लाने की चुनौती होगी। प्रदेश में भाजपा लंबे समय से सत्ता में है और अगले चुनाव में उसे सरकार के कामकाज के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी अपनी पकड़ बनाए रखने की जरूरत होगी। ऐसे में प्रभारी की भूमिका सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला और मंडल स्तर के पदाधिकारियों के साथ लगातार समन्वय भी अहम होगा।

भाजपा ने जगदीश ईश्वरभाई पटेल को यूपी का सह-प्रभारी बनाया है। पटेल को संगठनात्मक काम का अनुभव रखने वाला नेता माना जाता है। नई टीम में उनकी जिम्मेदारी तावड़े के साथ मिलकर राज्य में पार्टी के कार्यक्रमों और चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की होगी। भाजपा के लिए यूपी में बूथ स्तर का नेटवर्क हमेशा से चुनावी ताकत रहा है। आने वाले महीनों में पार्टी इसी नेटवर्क को और सक्रिय करने पर जोर दे सकती है। इसके साथ ही विपक्षी दलों की गतिविधियों पर नजर, स्थानीय मुद्दों की पहचान और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी प्रभारी की जिम्मेदारियों में शामिल रहेंगे। पार्टी के अंदर नई नियुक्तियों के बाद संगठन में काम का बंटवारा भी नए तरीके से होने की संभावना है।

यूपी प्रभारी का पद पिछले कुछ समय से खाली चल रहा था। लोकसभा चुनाव के बाद राधा मोहन सिंह को इस जिम्मेदारी से हटाया गया था। उसके बाद से प्रदेश संगठन को नए प्रभारी का इंतजार था। तावड़े का नाम इस पद के लिए पहले से चर्चा में रहा और अब पार्टी ने औपचारिक तौर पर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी है। तावड़े पहले से उत्तर प्रदेश का काम देख रहे थे, इसलिए राज्य के संगठन और यहां की राजनीतिक परिस्थितियों से वे पूरी तरह अनजान नहीं हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनकी नियुक्ति को अचानक लिया गया फैसला नहीं माना जा रहा। अब उन्हें औपचारिक रूप से प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन के काम में तेजी आने की उम्मीद है। यूपी में जातीय समीकरण, स्थानीय नेतृत्व, बूथ प्रबंधन और विपक्षी गठबंधन चुनावी रणनीति के बड़े हिस्से होंगे।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में कुल 65 पदाधिकारियों को जगह दी गई है। इनमें उत्तर प्रदेश से जुड़े आठ चेहरे शामिल हैं। संगठन में फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब पार्टी अगले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अलग-अलग राज्यों में जिम्मेदारियां तय कर रही है। यूपी के साथ पंजाब और गुजरात में भी नए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुग को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है। इन राज्यों में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा की नई नियुक्तियों को एक व्यापक चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र की राजनीति से शुरू हुआ। वह महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और राज्य संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आने के बाद उन्हें अलग-अलग राज्यों का प्रभार दिया गया। हरियाणा में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्हें बिहार भेजा गया था। बिहार में चुनावी कामकाज के दौरान पार्टी ने बूथ स्तर तक अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया था। भाजपा के चुनावी मैनेजमेंट में तावड़े की भूमिका को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जाता है। अब उत्तर प्रदेश में उनके सामने अलग तरह की राजनीतिक चुनौती है। राज्य का आकार बड़ा है, क्षेत्रीय मुद्दे अलग-अलग हैं और हर इलाके का राजनीतिक समीकरण भी बदलता रहता है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक संगठन के सामने अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं।

यूपी में अगले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के पास अभी समय है, लेकिन पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियों को पहले ही तेज कर दिया है। नई नियुक्ति के बाद तावड़े और पटेल को प्रदेश के नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ तालमेल बनाना होगा। जिलों में पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा, कार्यकर्ताओं से फीडबैक और सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का काम भी बढ़ सकता है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले संगठन के भीतर किसी तरह की कमजोरी न रहे और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय रहें। लखनऊ से लेकर जिलों तक अब नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन की बैठकों और चुनावी तैयारियों का सिलसिला तेज होने की संभावना है।

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