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शेयर बाजार में शानदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, निफ्टी 24,100 के पार
बिजनेस डेस्क
घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत के बीच आईटी और मेटल सेक्टर में खरीदारी लौटी, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम दिखा।
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 2 जुलाई को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंकों की तेजी के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक की बढ़त लेकर 24,100 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटों में आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा। देश की प्रमुख टेक कंपनियों इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में करीब चार प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का रुख बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में सुधार की उम्मीद और आगामी तिमाही नतीजों को लेकर सकारात्मक माहौल के कारण निवेशक आईटी शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मेटल सेक्टर में भी अच्छी मांग देखने को मिली, जिससे इस क्षेत्र के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। घरेलू बाजार की मजबूती के बीच एशियाई शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दबाव में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में अलग-अलग संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों की मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद निवेशकों का भरोसा बनाए हुए है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। हालांकि अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का भारतीय बाजार पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। बाजार जानकारों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का फोकस फिलहाल भारत की आर्थिक स्थिति, कॉर्पोरेट आय और आने वाले तिमाही नतीजों पर अधिक है, इसलिए विदेशी संकेतों का प्रभाव सीमित नजर आया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी बाजार को सहारा देती दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने पिछले सात कारोबारी दिनों में करीब 3,907 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। वहीं पिछले एक महीने में उनकी कुल बिकवाली 36,000 करोड़ रुपये से अधिक रही है। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी है और पिछले एक महीने में 71,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट से बचा हुआ है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड निवेश, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और खुदरा निवेशकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसका फायदा यह हुआ है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर पहले की तुलना में कम दिखाई देता है। घरेलू निवेशक बाजार में गिरावट आने पर भी खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।
इससे पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। एक जुलाई को सेंसेक्स 443 अंकों की बढ़त के साथ 76,922 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 140 अंक चढ़कर 24,005 के स्तर पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में तेजी का माहौल निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो प्रमुख सूचकांक नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ सकते हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे निवेशकों की दिशा तय करेंगे। विशेष रूप से आईटी, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और मेटल कंपनियों के परिणामों पर बाजार की नजर रहेगी। यदि अपेक्षा से बेहतर नतीजे आते हैं तो बाजार में तेजी और मजबूत हो सकती है। वहीं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
मौजूदा तेजी के दौरान भी सोच-समझकर निवेश करें। केवल तेजी देखकर किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और मूल्यांकन का आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियां अब भी बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं। बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और आईटी तथा मेटल सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले कारोबारी सत्रों में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है।
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शेयर बाजार में शानदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, निफ्टी 24,100 के पार
बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 2 जुलाई को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंकों की तेजी के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक की बढ़त लेकर 24,100 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटों में आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा। देश की प्रमुख टेक कंपनियों इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में करीब चार प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का रुख बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में सुधार की उम्मीद और आगामी तिमाही नतीजों को लेकर सकारात्मक माहौल के कारण निवेशक आईटी शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मेटल सेक्टर में भी अच्छी मांग देखने को मिली, जिससे इस क्षेत्र के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। घरेलू बाजार की मजबूती के बीच एशियाई शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दबाव में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में अलग-अलग संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों की मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद निवेशकों का भरोसा बनाए हुए है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। हालांकि अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का भारतीय बाजार पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। बाजार जानकारों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का फोकस फिलहाल भारत की आर्थिक स्थिति, कॉर्पोरेट आय और आने वाले तिमाही नतीजों पर अधिक है, इसलिए विदेशी संकेतों का प्रभाव सीमित नजर आया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी बाजार को सहारा देती दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने पिछले सात कारोबारी दिनों में करीब 3,907 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। वहीं पिछले एक महीने में उनकी कुल बिकवाली 36,000 करोड़ रुपये से अधिक रही है। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी है और पिछले एक महीने में 71,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट से बचा हुआ है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड निवेश, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और खुदरा निवेशकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसका फायदा यह हुआ है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर पहले की तुलना में कम दिखाई देता है। घरेलू निवेशक बाजार में गिरावट आने पर भी खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।
इससे पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। एक जुलाई को सेंसेक्स 443 अंकों की बढ़त के साथ 76,922 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 140 अंक चढ़कर 24,005 के स्तर पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में तेजी का माहौल निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो प्रमुख सूचकांक नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ सकते हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे निवेशकों की दिशा तय करेंगे। विशेष रूप से आईटी, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और मेटल कंपनियों के परिणामों पर बाजार की नजर रहेगी। यदि अपेक्षा से बेहतर नतीजे आते हैं तो बाजार में तेजी और मजबूत हो सकती है। वहीं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
मौजूदा तेजी के दौरान भी सोच-समझकर निवेश करें। केवल तेजी देखकर किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और मूल्यांकन का आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियां अब भी बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं। बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और आईटी तथा मेटल सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले कारोबारी सत्रों में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है।
