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अमरकंटक, धार और सांची के विकास की नई योजना, आज सीएम करेंगे समीक्षा
भोपाल,(म.प्र.)
संस्कृति विभाग आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन बड़े सांस्कृतिक प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा रखेगा, सिंहस्थ 2028 से पहले धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर रहेगा फोकस।
मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को संस्कृति विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा पेश करेगा। इनमें अमरकंटक में नर्मदा लोक, धार में सरस्वती लोक और सांची में बिखरे पड़े पुरातात्विक अवशेषों को एक ही परिसर में संग्रहित कर एक विशाल म्यूजियम विकसित करने की योजना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार बैठक में इन परियोजनाओं की अवधारणा, संभावित स्वरूप और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही संस्कृति विभाग के विभिन्न कार्यों और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार इन योजनाओं को प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक विरासत से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। बैठक का सबसे बड़ा फोकस उन परियोजनाओं पर रहेगा जिन्हें सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन प्रोजेक्ट के पूरे होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। अमरकंटक, जहां से पवित्र नर्मदा नदी का उद्गम होता है, वहां नर्मदा लोक विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में रही है। गंगा के बाद नर्मदा को देश की सबसे अधिक आस्था वाली नदियों में माना जाता है। ऐसे में सरकार यहां ऐसा सांस्कृतिक परिसर विकसित करना चाहती है, जहां नर्मदा से जुड़ी धार्मिक परंपराएं, इतिहास, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा सके।
इसी तरह धार में प्रस्तावित सरस्वती लोक भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। हाल के समय में भोजशाला को लेकर हुई गतिविधियों के बाद धार एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले ही सरस्वती लोक के निर्माण की घोषणा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां बेहतर सुविधाएं और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। अधिकारियों के अनुसार बैठक में सरस्वती लोक की अवधारणा और इसके संभावित स्वरूप पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी जाएगी। सांची के लिए भी सरकार बड़ी योजना तैयार कर रही है। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले सांची में विभिन्न स्थानों पर बिखरे पुरातात्विक अवशेषों को एक स्थान पर संग्रहित कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यटकों को प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही पुरातात्विक महत्व की कई दुर्लभ वस्तुओं का वैज्ञानिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक में केवल इन तीन परियोजनाओं पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि प्रदेश के दो बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन भी मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। सरकार की योजना भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के प्रमुख स्थलों को धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों परियोजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले इन पर तेजी से काम शुरू हो सके।
चित्रकूट में प्रस्तावित परिक्रमा पथ और भारत घाट के विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश की कई ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री करेंगे। भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो शुरू करने की योजना पर चर्चा होने की संभावना है। ग्वालियर किले में चल रहे संरक्षण कार्यों, आगा खान ट्रस्ट के सहयोग से हो रहे विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है। इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा और लाल बाग पैलेस के भविष्य के संचालन, संरक्षण और 'अडॉप्टिव रियूज' की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। वहीं उज्जैन स्थित वीर दुर्गादास छतरी पर आने वाले पर्यटकों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित 'इमर्सिव एक्सपीरियंस' विकसित करने के प्रस्ताव पर भी मंथन होगा। संस्कृति विभाग की यह समीक्षा बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का आधुनिक विकास और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। यदि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है तो मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन राज्यों में नई पहचान मिल सकती है।
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अमरकंटक, धार और सांची के विकास की नई योजना, आज सीएम करेंगे समीक्षा
भोपाल,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को संस्कृति विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा पेश करेगा। इनमें अमरकंटक में नर्मदा लोक, धार में सरस्वती लोक और सांची में बिखरे पड़े पुरातात्विक अवशेषों को एक ही परिसर में संग्रहित कर एक विशाल म्यूजियम विकसित करने की योजना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार बैठक में इन परियोजनाओं की अवधारणा, संभावित स्वरूप और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही संस्कृति विभाग के विभिन्न कार्यों और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार इन योजनाओं को प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक विरासत से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। बैठक का सबसे बड़ा फोकस उन परियोजनाओं पर रहेगा जिन्हें सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन प्रोजेक्ट के पूरे होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। अमरकंटक, जहां से पवित्र नर्मदा नदी का उद्गम होता है, वहां नर्मदा लोक विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में रही है। गंगा के बाद नर्मदा को देश की सबसे अधिक आस्था वाली नदियों में माना जाता है। ऐसे में सरकार यहां ऐसा सांस्कृतिक परिसर विकसित करना चाहती है, जहां नर्मदा से जुड़ी धार्मिक परंपराएं, इतिहास, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा सके।
इसी तरह धार में प्रस्तावित सरस्वती लोक भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। हाल के समय में भोजशाला को लेकर हुई गतिविधियों के बाद धार एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले ही सरस्वती लोक के निर्माण की घोषणा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां बेहतर सुविधाएं और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। अधिकारियों के अनुसार बैठक में सरस्वती लोक की अवधारणा और इसके संभावित स्वरूप पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी जाएगी। सांची के लिए भी सरकार बड़ी योजना तैयार कर रही है। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले सांची में विभिन्न स्थानों पर बिखरे पुरातात्विक अवशेषों को एक स्थान पर संग्रहित कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यटकों को प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही पुरातात्विक महत्व की कई दुर्लभ वस्तुओं का वैज्ञानिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक में केवल इन तीन परियोजनाओं पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि प्रदेश के दो बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन भी मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। सरकार की योजना भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के प्रमुख स्थलों को धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों परियोजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले इन पर तेजी से काम शुरू हो सके।
चित्रकूट में प्रस्तावित परिक्रमा पथ और भारत घाट के विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश की कई ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री करेंगे। भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो शुरू करने की योजना पर चर्चा होने की संभावना है। ग्वालियर किले में चल रहे संरक्षण कार्यों, आगा खान ट्रस्ट के सहयोग से हो रहे विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है। इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा और लाल बाग पैलेस के भविष्य के संचालन, संरक्षण और 'अडॉप्टिव रियूज' की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। वहीं उज्जैन स्थित वीर दुर्गादास छतरी पर आने वाले पर्यटकों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित 'इमर्सिव एक्सपीरियंस' विकसित करने के प्रस्ताव पर भी मंथन होगा। संस्कृति विभाग की यह समीक्षा बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का आधुनिक विकास और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। यदि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है तो मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन राज्यों में नई पहचान मिल सकती है।
