आज से AI कंटेंट पर लेबल अनिवार्य, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक 3 घंटे में हटाने होंगे

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IT मंत्रालय के नए नियमों के तहत X, YouTube, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स को अब AI और सिंथेटिक कंटेंट स्पष्ट रूप से चिन्हित करना अनिवार्य; मिस-इनफॉर्मेशन और चुनावी धोखाधड़ी रोकने का उद्देश्य

नई दिल्ली: 20 फ़रवरी 2026 से भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI कंटेंट यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो, फोटो और ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो या फोटो अपलोड होता है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी।

कौन प्रभावित होंगे
X (ट्विटर), YouTube, फेसबुक, स्नैपचैट सहित सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स।

क्या नया नियम है

  • AI या सिंथेटिक कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य।

  • लेबल कम से कम विजुअल में 10% एरिया या ऑडियो में पहले 10% समय में दिखना/सुनाई देना चाहिए।

  • मेटाडेटा/यूनिक आइडेंटिफायर को कोई हाइड या डिलीट नहीं कर सकता।

  • डीपफेक वीडियो या फोटो 3 घंटे में हटाना होगा।

क्यों लागू किया गया
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 में संशोधन कर यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य है

  • मिस-इनफॉर्मेशन और फेक कंटेंट पर नियंत्रण।

  • चुनावी धोखाधड़ी और इम्पर्सनेशन रोकना।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना।

प्रधानमंत्री ने AI समिट में सुझाव दिया था कि जैसे खाद्य सामग्री पर “न्यूट्रिशन लेबल” होता है, वैसे डिजिटल कंटेंट पर भी “ऑथेंटिसिटी लेबल” होना चाहिए।

कैसे काम करेगा
नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि अपलोड से पहले ही जांच हो सके कि कंटेंट AI से बनाया गया है या नहीं। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को चेतावनी देना अनिवार्य है, जिसमें उल्लंघन पर कार्रवाई और जुर्माने की जानकारी दी जाएगी।

उदाहरण
नवंबर में रश्मिका मंदाना और सचिन तेंदुलकर के डीपफेक वीडियो वायरल हो चुके थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नियंत्रण के बिना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है।

यूजर्स और इंडस्ट्री पर असर

  • यूजर्स आसानी से फेक कंटेंट पहचान सकेंगे।

  • क्रिएटर्स को अतिरिक्त कदम उठाने होंगे, जैसे लेबलिंग और मेटाडेटा एम्बेड करना।

  • प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी निवेश करना होगा, जिससे ऑपरेशंस महंगे हो सकते हैं।

मंत्रालय का संदेश
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि यह कदम “ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट” बनाने के लिए है। AI से होने वाली मिस-इंफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और चुनावी मैनिपुलेशन जैसी जोखिमों को रोकने के लिए यह आवश्यक है।

डीपफेक क्या है
डीपफेक वह वीडियो या फोटो होता है जिसमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या एक्सप्रेशन AI के जरिए बदल दिया जाता है। तकनीक इतनी उन्नत है कि वास्तविक और फेक कंटेंट में फर्क करना मुश्किल होता है।

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20 Feb 2026 By Nitin Trivedi

आज से AI कंटेंट पर लेबल अनिवार्य, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक 3 घंटे में हटाने होंगे

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नई दिल्ली: 20 फ़रवरी 2026 से भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI कंटेंट यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गए वीडियो, फोटो और ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो या फोटो अपलोड होता है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी।

कौन प्रभावित होंगे
X (ट्विटर), YouTube, फेसबुक, स्नैपचैट सहित सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स।

क्या नया नियम है

  • AI या सिंथेटिक कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य।

  • लेबल कम से कम विजुअल में 10% एरिया या ऑडियो में पहले 10% समय में दिखना/सुनाई देना चाहिए।

  • मेटाडेटा/यूनिक आइडेंटिफायर को कोई हाइड या डिलीट नहीं कर सकता।

  • डीपफेक वीडियो या फोटो 3 घंटे में हटाना होगा।

क्यों लागू किया गया
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 में संशोधन कर यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य है

  • मिस-इनफॉर्मेशन और फेक कंटेंट पर नियंत्रण।

  • चुनावी धोखाधड़ी और इम्पर्सनेशन रोकना।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना।

प्रधानमंत्री ने AI समिट में सुझाव दिया था कि जैसे खाद्य सामग्री पर “न्यूट्रिशन लेबल” होता है, वैसे डिजिटल कंटेंट पर भी “ऑथेंटिसिटी लेबल” होना चाहिए।

कैसे काम करेगा
नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि अपलोड से पहले ही जांच हो सके कि कंटेंट AI से बनाया गया है या नहीं। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को चेतावनी देना अनिवार्य है, जिसमें उल्लंघन पर कार्रवाई और जुर्माने की जानकारी दी जाएगी।

उदाहरण
नवंबर में रश्मिका मंदाना और सचिन तेंदुलकर के डीपफेक वीडियो वायरल हो चुके थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नियंत्रण के बिना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है।

यूजर्स और इंडस्ट्री पर असर

  • यूजर्स आसानी से फेक कंटेंट पहचान सकेंगे।

  • क्रिएटर्स को अतिरिक्त कदम उठाने होंगे, जैसे लेबलिंग और मेटाडेटा एम्बेड करना।

  • प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी निवेश करना होगा, जिससे ऑपरेशंस महंगे हो सकते हैं।

मंत्रालय का संदेश
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि यह कदम “ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट” बनाने के लिए है। AI से होने वाली मिस-इंफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और चुनावी मैनिपुलेशन जैसी जोखिमों को रोकने के लिए यह आवश्यक है।

डीपफेक क्या है
डीपफेक वह वीडियो या फोटो होता है जिसमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या एक्सप्रेशन AI के जरिए बदल दिया जाता है। तकनीक इतनी उन्नत है कि वास्तविक और फेक कंटेंट में फर्क करना मुश्किल होता है।

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