- Hindi News
- बिजनेस
- तेल की कीमतें 116 डॉलर पार, महंगाई और GDP पर दबाव बढ़ने की चेतावनी
तेल की कीमतें 116 डॉलर पार, महंगाई और GDP पर दबाव बढ़ने की चेतावनी
बिजनेस न्यूज
कच्चे तेल में हर 10 डॉलर बढ़ोतरी से रिटेल महंगाई 0.60% तक बढ़ सकती है; रुपए की वैल्यू और करंट अकाउंट डेफिसिट पर असर
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज रूट पर रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जो अब 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है।
महंगाई और आर्थिक असर
फरवरी में रिटेल महंगाई 3.21% पर पहुंची थी।
कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से पेट्रोल-डीजल, एलएनजी और फर्टिलाइजर की लागत बढ़ेगी।
तेल की ऊंची कीमतें GDP ग्रोथ और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव डाल सकती हैं।
रुपए की कमजोरी बढ़ने से आयात महंगा होगा और विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी डॉलर सुरक्षित विकल्प बन रहे हैं।
तेल आयात और खाड़ी पर निर्भरता
भारत के कुल तेल आयात का 51% हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
होर्मुज रूट पर रुकावट के कारण तेल, एल्यूमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में तेजी आई है।
उच्च कच्चा तेल लागत रेमिटेंस और लेबर मार्केट को प्रभावित कर सकती है, खासकर खाड़ी देशों से आने वाले पैसे पर।
उद्योग और उपभोक्ता प्रभावित
तेल कंपनियां शुरुआती दौर में कीमतों का बोझ खुद झेल सकती हैं।
लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर यह उपभोक्ताओं पर आएगा।
महंगे एलएनजी की वजह से फर्टिलाइजर की लागत बढ़ेगी, जिससे सब्सिडी का बजट बढ़ाना पड़ सकता है।
अगर तेल 120 डॉलर के ऊपर जाता है, तो दुनिया भर में मंदी आने का खतरा बढ़ सकता है।मार्च में तेल की कीमतों में करीब 60% उछाल आया, जो पिछले 36 साल में सबसे बड़ा महीना रिकॉर्ड है।उच्च कीमतों से मांग घट सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
तेल की कीमतें 116 डॉलर पार, महंगाई और GDP पर दबाव बढ़ने की चेतावनी
बिजनेस न्यूज
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज रूट पर रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जो अब 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है।
महंगाई और आर्थिक असर
फरवरी में रिटेल महंगाई 3.21% पर पहुंची थी।
कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से पेट्रोल-डीजल, एलएनजी और फर्टिलाइजर की लागत बढ़ेगी।
तेल की ऊंची कीमतें GDP ग्रोथ और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव डाल सकती हैं।
रुपए की कमजोरी बढ़ने से आयात महंगा होगा और विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी डॉलर सुरक्षित विकल्प बन रहे हैं।
तेल आयात और खाड़ी पर निर्भरता
भारत के कुल तेल आयात का 51% हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
होर्मुज रूट पर रुकावट के कारण तेल, एल्यूमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में तेजी आई है।
उच्च कच्चा तेल लागत रेमिटेंस और लेबर मार्केट को प्रभावित कर सकती है, खासकर खाड़ी देशों से आने वाले पैसे पर।
उद्योग और उपभोक्ता प्रभावित
तेल कंपनियां शुरुआती दौर में कीमतों का बोझ खुद झेल सकती हैं।
लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर यह उपभोक्ताओं पर आएगा।
महंगे एलएनजी की वजह से फर्टिलाइजर की लागत बढ़ेगी, जिससे सब्सिडी का बजट बढ़ाना पड़ सकता है।
अगर तेल 120 डॉलर के ऊपर जाता है, तो दुनिया भर में मंदी आने का खतरा बढ़ सकता है।मार्च में तेल की कीमतों में करीब 60% उछाल आया, जो पिछले 36 साल में सबसे बड़ा महीना रिकॉर्ड है।उच्च कीमतों से मांग घट सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
