किसान क्रेडिट कार्ड पर RBI का ड्राफ्ट: अब 6 साल में चुकाया जा सकेगा लोन

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मिट्टी जांच, जैविक खेती और मौसम पूर्वानुमान जैसी आधुनिक जरूरतों के लिए भी मिलेगा वित्तीय समर्थन; 6 मार्च 2026 तक मांगे गए सुझाव

नई दिल्ली। खेती को सस्ता और अधिक व्यावहारिक ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के संशोधित दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत किसान अब लोन को अधिकतम छह वर्ष में चुका सकेंगे और आधुनिक कृषि पद्धतियों—जैसे मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती प्रमाणन और रियल-टाइम मौसम जानकारी—पर होने वाले खर्च के लिए भी वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

क्या बदलेगा और क्यों
मसौदे के अनुसार फसल चक्र को मानकीकृत किया गया है—अल्पावधि फसलों के लिए 12 माह और दीर्घावधि फसलों के लिए 18 माह का चक्र निर्धारित होगा। इससे विभिन्न बैंकों में ऋण स्वीकृति और पुनर्भुगतान की प्रक्रिया एकरूप बनेगी। ऋण चुकाने की अवधि छह वर्ष तक बढ़ने से लंबी अवधि की फसलों वाले किसानों पर किस्तों का दबाव कम होगा और नकदी प्रवाह बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकेगा।

आधुनिक कृषि के लिए अतिरिक्त प्रावधान
फार्म एसेट्स की मरम्मत और रखरखाव हेतु उपलब्ध 20% अतिरिक्त प्रावधान के दायरे को विस्तारित कर तकनीकी हस्तक्षेपों को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत मिट्टी की जांच, मौसम पूर्वानुमान सेवाएं, जैविक या उत्तम कृषि पद्धतियों के लिए प्रमाणन जैसी गतिविधियां पात्र होंगी। नीति-निर्माताओं का मानना है कि इससे टिकाऊ खेती और लागत-प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

किसे मिलेगा लाभ
संशोधित दिशानिर्देश वाणिज्यिक बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों पर लागू होंगे। ड्रॉइंग लिमिट को “स्केल ऑफ फाइनेंस” यानी वास्तविक खेती लागत से जोड़ा गया है, जिससे किसानों को जरूरत के अनुरूप पर्याप्त क्रेडिट उपलब्ध हो सकेगा और अनौपचारिक महंगे कर्ज पर निर्भरता घटेगी।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य खेती, कटाई के बाद के खर्च, विपणन और संबद्ध गतिविधियों के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराना है। 2019 में इसे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन तक विस्तारित किया गया था। अब जारी मसौदे पर 6 मार्च 2026 तक आम जनता और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

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