परमाणु समझौते पर बातचीत को तैयार ईरान, प्रतिबंध हटाने पर डील संभव

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संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जिनेवा में अगला दौर; मिसाइल कार्यक्रम पर अड़ा तेहरान, क्षेत्रीय तनाव बरकरार

मध्य पूर्व की कूटनीति में अहम मोड़ तब आया जब मजीद तख्त-रवांची ने संकेत दिया कि यदि अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो तेहरान परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर समझौते के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला चरण जिनेवा में प्रस्तावित है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है।

ईरानी पक्ष का कहना है कि बातचीत का दायरा केवल परमाणु गतिविधियों तक सीमित रहना चाहिए। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और इस पर किसी प्रकार की चर्चा स्वीकार नहीं की जाएगी। यह मुद्दा वार्ता की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने संकेत दिया है कि समझौते के लिए सख्त शर्तें लागू रहेंगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि तेहरान यूरेनियम संवर्धन को सीमित करता है और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नियंत्रण के संकेत देता है तो प्रतिबंधों में राहत पर विचार किया जा सकता है। हालांकि वाशिंगटन ने यह भी चेतावनी दी है कि वार्ता विफल होने की स्थिति में सैन्य विकल्प को पूरी तरह नकारा नहीं गया है।

ईरान ने हालिया प्रस्ताव में 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम के स्तर को कम करने की संभावना जताई है। यह स्तर हथियार-ग्रेड के करीब माना जाता है और इसी कारण अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियां लंबे समय से चिंतित रही हैं। तेहरान का दावा है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों के आर्थिक प्रभाव ने ईरान को वार्ता के लिए अधिक व्यावहारिक रुख अपनाने को प्रेरित किया है। वहीं अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु अप्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके बावजूद मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।

कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि वार्ता की सफलता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ेगा। फिलहाल दोनों पक्षों की आधिकारिक स्थिति सख्त है, लेकिन वार्ता जारी रहने से समाधान की संभावना बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब जिनेवा में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

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