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तेल कीमतों में गिरावट से शेयर बाजार को राहत, हरे निशान में खुलने के संकेत
बिजनेस डेस्क
अमेरिका-ईरान तनाव थमने से कच्चा तेल सस्ता, GIFT निफ्टी मजबूत; सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी की उम्मीद, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर
भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिलहाल थमने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आने से निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहते हैं तो सोमवार को घरेलू बाजार हरे निशान में खुल सकता है।
पिछले सप्ताह लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक गिरावट झेलने के बाद बाजार पर दबाव साफ दिखाई दिया था। निफ्टी 50 शुक्रवार को 102.15 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,767.45 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में लगभग 2.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें थीं।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक समय 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करती हैं। इसी वजह से ऑटोमोबाइल, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली थी।
हालांकि सप्ताहांत में हालात बदलते नजर आए। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई पर फिलहाल विराम लगने की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 88 से 91 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया। तेल की कीमतों में यह नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
कच्चा तेल सस्ता होने से महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर दबाव कम होगा। रुपये को भी मजबूती मिलने की संभावना बढ़ेगी। इन सभी कारणों से निवेशकों का विश्वास लौट सकता है और शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल बन सकता है।
ग्लोबल संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में भी अलग-अलग रुख दिखाई दिया। डाउ जोंस इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक पर दबाव बना रहा। इसके बावजूद अमेरिकी इंडेक्स फ्यूचर्स और नैस्डैक फ्यूचर्स में सुधार ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया है।
इसी बीच GIFT निफ्टी भी लगभग 100 से 110 अंकों की बढ़त के संकेत दे रहा है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूत हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती कारोबार में विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता है तो बाजार अपनी हालिया गिरावट से उबरने की कोशिश कर सकता है।
निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार कर स्थिर होता है तो बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद 24,200 से 24,300 तक की तेजी संभव है। वहीं नीचे की ओर 23,650 पहला महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो 23,450 तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाजार में अभी पूरी तरह स्थिरता नहीं आई है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से उन सेक्टरों पर नजर रखने की जरूरत होगी जो कच्चे तेल की कीमतों से सीधे प्रभावित होते हैं।
आईटी और मीडिया सेक्टर ने पिछले सप्ताह अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली और बैंक निफ्टी सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ। यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक रहता है तो बैंकिंग, एफएमसीजी, आईटी और चुनिंदा ऑटो शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधियां भी इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
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तेल कीमतों में गिरावट से शेयर बाजार को राहत, हरे निशान में खुलने के संकेत
बिजनेस डेस्क
भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिलहाल थमने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आने से निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहते हैं तो सोमवार को घरेलू बाजार हरे निशान में खुल सकता है।
पिछले सप्ताह लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक गिरावट झेलने के बाद बाजार पर दबाव साफ दिखाई दिया था। निफ्टी 50 शुक्रवार को 102.15 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,767.45 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में लगभग 2.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें थीं।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक समय 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पैदा करती हैं। इसी वजह से ऑटोमोबाइल, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली थी।
हालांकि सप्ताहांत में हालात बदलते नजर आए। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई पर फिलहाल विराम लगने की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 9 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 88 से 91 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया। तेल की कीमतों में यह नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
कच्चा तेल सस्ता होने से महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर दबाव कम होगा। रुपये को भी मजबूती मिलने की संभावना बढ़ेगी। इन सभी कारणों से निवेशकों का विश्वास लौट सकता है और शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल बन सकता है।
ग्लोबल संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में भी अलग-अलग रुख दिखाई दिया। डाउ जोंस इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी के कारण नैस्डैक पर दबाव बना रहा। इसके बावजूद अमेरिकी इंडेक्स फ्यूचर्स और नैस्डैक फ्यूचर्स में सुधार ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया है।
इसी बीच GIFT निफ्टी भी लगभग 100 से 110 अंकों की बढ़त के संकेत दे रहा है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूत हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती कारोबार में विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता है तो बाजार अपनी हालिया गिरावट से उबरने की कोशिश कर सकता है।
निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार कर स्थिर होता है तो बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद 24,200 से 24,300 तक की तेजी संभव है। वहीं नीचे की ओर 23,650 पहला महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो 23,450 तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाजार में अभी पूरी तरह स्थिरता नहीं आई है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से उन सेक्टरों पर नजर रखने की जरूरत होगी जो कच्चे तेल की कीमतों से सीधे प्रभावित होते हैं।
आईटी और मीडिया सेक्टर ने पिछले सप्ताह अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली और बैंक निफ्टी सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ। यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक रहता है तो बैंकिंग, एफएमसीजी, आईटी और चुनिंदा ऑटो शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधियां भी इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
