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रेपो रेट 5.25% पर बरकरार: RBI ने EMI में राहत जारी रखी, ‘वेट एंड वॉच’ नीति कायम
बिजनेस न्यूज
मौद्रिक नीति समिति का फैसला; महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के बीच दरों में बदलाव नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इसका सीधा असर यह है कि फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और उपभोक्ताओं की EMI यथावत बनी रहेगी। यह निर्णय 8 अप्रैल को घोषित किया गया, जबकि बैठक 6 अप्रैल से शुरू हुई थी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपनाई है। उनका कहना है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन खाद्य कीमतों और वैश्विक कारकों के कारण जोखिम बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। RBI ने संकेत दिया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती हैं और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।
पिछले एक साल में RBI ने ब्याज दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। फरवरी 2025 से शुरू हुई यह कटौती जून और दिसंबर तक जारी रही, जिसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत तक आ गया। हालांकि फरवरी 2026 और अब अप्रैल की बैठक में दरों को स्थिर रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। यदि RBI इस समय दरों में कटौती करता, तो महंगाई बढ़ने का खतरा रहता। वहीं दरें बढ़ाने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता था। ऐसे में संतुलन बनाए रखने के लिए मौजूदा स्तर को बरकरार रखना बेहतर विकल्प माना गया।
RBI ने यह भी संकेत दिया है कि आगामी महीनों में नीतिगत फैसले पूरी तरह से महंगाई के रुख और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा गया है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलित माना जा रहा है।
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इसके विपरीत, दर बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं।
यह फैसला आज की ताज़ा खबरों में आम उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल EMI में राहत जारी रहने से मध्यम वर्ग को राहत मिली है, जबकि बाजार की नजर अब अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी है, जहां भविष्य की दिशा तय होगी।
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रेपो रेट 5.25% पर बरकरार: RBI ने EMI में राहत जारी रखी, ‘वेट एंड वॉच’ नीति कायम
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इसका सीधा असर यह है कि फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और उपभोक्ताओं की EMI यथावत बनी रहेगी। यह निर्णय 8 अप्रैल को घोषित किया गया, जबकि बैठक 6 अप्रैल से शुरू हुई थी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपनाई है। उनका कहना है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन खाद्य कीमतों और वैश्विक कारकों के कारण जोखिम बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। RBI ने संकेत दिया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती हैं और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।
पिछले एक साल में RBI ने ब्याज दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। फरवरी 2025 से शुरू हुई यह कटौती जून और दिसंबर तक जारी रही, जिसके बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत तक आ गया। हालांकि फरवरी 2026 और अब अप्रैल की बैठक में दरों को स्थिर रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। यदि RBI इस समय दरों में कटौती करता, तो महंगाई बढ़ने का खतरा रहता। वहीं दरें बढ़ाने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता था। ऐसे में संतुलन बनाए रखने के लिए मौजूदा स्तर को बरकरार रखना बेहतर विकल्प माना गया।
RBI ने यह भी संकेत दिया है कि आगामी महीनों में नीतिगत फैसले पूरी तरह से महंगाई के रुख और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा गया है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलित माना जा रहा है।
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इसके विपरीत, दर बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं।
यह फैसला आज की ताज़ा खबरों में आम उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल EMI में राहत जारी रहने से मध्यम वर्ग को राहत मिली है, जबकि बाजार की नजर अब अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी है, जहां भविष्य की दिशा तय होगी।
