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सेंसेक्स 852 अंक गिरकर 77,664 पर बंद, निफ्टी 24,173 पर
बिजनेस न्यूज
शेयर बाजार गिरावट में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर दबाव में, सेंसेक्स में भारी बिकवाली शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्लोबल तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार दबाव में दिखा।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 852 अंकों यानी 1.09% की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 205 अंक फिसलकर 24,173 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, जिसमें खासकर ऑटो और सरकारी बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। हालांकि फार्मा और मीडिया सेक्टर में सीमित खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश की।
ग्लोबल असर बढ़ा
रिपोर्ट्स के अनुसार, Donald Trump द्वारा सीजफायर की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों को कब्जे में लिया है।
इस घटनाक्रम से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता घटी है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
सेक्टरवार स्थिति
आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा, जबकि सरकारी बैंकिंग शेयर भी गिरावट में रहे। इसके उलट फार्मा और मीडिया शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जहां कुछ इंडेक्स में तेजी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 22 अप्रैल को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।
बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 757 अंक और निफ्टी 199 अंक नीचे बंद हुए थे। लगातार दो दिन की गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अप्रैल को करीब 2,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं इस महीने अब तक कुल 44,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है।विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की चाल पर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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सेंसेक्स 852 अंक गिरकर 77,664 पर बंद, निफ्टी 24,173 पर
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 852 अंकों यानी 1.09% की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 205 अंक फिसलकर 24,173 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, जिसमें खासकर ऑटो और सरकारी बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। हालांकि फार्मा और मीडिया सेक्टर में सीमित खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश की।
ग्लोबल असर बढ़ा
रिपोर्ट्स के अनुसार, Donald Trump द्वारा सीजफायर की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों को कब्जे में लिया है।
इस घटनाक्रम से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता घटी है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
सेक्टरवार स्थिति
आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा, जबकि सरकारी बैंकिंग शेयर भी गिरावट में रहे। इसके उलट फार्मा और मीडिया शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जहां कुछ इंडेक्स में तेजी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 22 अप्रैल को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।
बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 757 अंक और निफ्टी 199 अंक नीचे बंद हुए थे। लगातार दो दिन की गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अप्रैल को करीब 2,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं इस महीने अब तक कुल 44,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है।विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की चाल पर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
