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भोपाल में शराब दुकानों का विरोध तेज, स्कूल और मंदिर के पास ठेके पर बवाल
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल शराब दुकान विवाद में अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा में प्रदर्शन, नियम उल्लंघन के आरोप शहर में शराब दुकानों की शिफ्टिंग अब बड़ा जनमुद्दा बनती जा रही है। रहवासियों का आरोप—नियमों को नजरअंदाज कर खोले जा रहे ठेके।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की नई लोकेशन को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा इलाके में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अरेरा कॉलोनी में शराब दुकान मंदिर के पास संचालित हो रही है, जबकि शाहपुरा में स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी पर ठेका खोला गया है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रदर्शन में स्थानीय रहवासी, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए। लोगों ने बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
नियमों पर सवाल
अरेरा कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि जिस जगह शराब दुकान संचालित हो रही है, वह पूरी तरह आवासीय क्षेत्र है, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधि चलाई जा रही है। इसे मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर निगम अधिनियम 1956 का उल्लंघन बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस मामले में पिछले एक साल से जिला प्रशासन, नगर निगम और आबकारी विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं। यहां तक कि मानव अधिकार आयोग में भी मामला पहुंचा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सामाजिक असर की चिंता
रहवासियों ने आरोप लगाया कि शराब दुकान के कारण इलाके में भीड़, शोर-शराबा और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ गया है। इससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है और रोजमर्रा की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
शाहपुरा इलाके में भी स्थिति इसी तरह की बताई जा रही है, जहां स्कूल के पास शराब दुकान खोले जाने से अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बच्चों के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
भोपाल के कई इलाकों—जैसे अवधपुरी, कोलार रोड, सेमराकलां और ईंटखेड़ी—में भी शराब दुकानों के खिलाफ पिछले कुछ समय से विरोध प्रदर्शन जारी है। कई स्थानों पर लोग लगातार धरना दे रहे हैं और ठेकों को हटाने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार शिकायतों की जांच की जा रही है।
शहर में बढ़ते विरोध से यह साफ है कि शराब दुकानों की लोकेशन तय करने में स्थानीय संवेदनशीलता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मुद्दा अब पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन चुका है और स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसमें ठेकों की तालाबंदी तक शामिल हो सकती है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख और कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।
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भोपाल में शराब दुकानों का विरोध तेज, स्कूल और मंदिर के पास ठेके पर बवाल
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की नई लोकेशन को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा इलाके में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अरेरा कॉलोनी में शराब दुकान मंदिर के पास संचालित हो रही है, जबकि शाहपुरा में स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी पर ठेका खोला गया है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रदर्शन में स्थानीय रहवासी, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए। लोगों ने बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
नियमों पर सवाल
अरेरा कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि जिस जगह शराब दुकान संचालित हो रही है, वह पूरी तरह आवासीय क्षेत्र है, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधि चलाई जा रही है। इसे मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर निगम अधिनियम 1956 का उल्लंघन बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस मामले में पिछले एक साल से जिला प्रशासन, नगर निगम और आबकारी विभाग को शिकायतें दी जा चुकी हैं। यहां तक कि मानव अधिकार आयोग में भी मामला पहुंचा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सामाजिक असर की चिंता
रहवासियों ने आरोप लगाया कि शराब दुकान के कारण इलाके में भीड़, शोर-शराबा और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ गया है। इससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है और रोजमर्रा की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
शाहपुरा इलाके में भी स्थिति इसी तरह की बताई जा रही है, जहां स्कूल के पास शराब दुकान खोले जाने से अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बच्चों के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
भोपाल के कई इलाकों—जैसे अवधपुरी, कोलार रोड, सेमराकलां और ईंटखेड़ी—में भी शराब दुकानों के खिलाफ पिछले कुछ समय से विरोध प्रदर्शन जारी है। कई स्थानों पर लोग लगातार धरना दे रहे हैं और ठेकों को हटाने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार शिकायतों की जांच की जा रही है।
शहर में बढ़ते विरोध से यह साफ है कि शराब दुकानों की लोकेशन तय करने में स्थानीय संवेदनशीलता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मुद्दा अब पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी बन चुका है और स्थानीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसमें ठेकों की तालाबंदी तक शामिल हो सकती है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख और कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।
