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दुर्ग के गांवों में जल संकट गहराया, अवैध शराब पर भी उठे सवाल
दुर्ग (छ.ग.)
दुर्ग जल संकट के बीच ग्रामीणों का आरोप—पानी की कमी, अवैध शराब से बिगड़ रहा माहौल गांवों में पानी की किल्लत ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं, जहां लोगों को पीने के पानी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात सबसे अधिक खराब बताए जा रहे हैं। यहां लगभग 3000 की आबादी के लिए सिर्फ एक बोरवेल ही पानी का सहारा है, जिससे बेहद कम क्षमता में पानी निकलता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए कतार लग जाती है, जो देर रात तक जारी रहती है। इसी बीच गांव में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की कमी के कारण उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं तक पानी के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि दिन का बड़ा हिस्सा पानी जुटाने में ही निकल जाता है।
पानी के लिए जंग
गांव में जल संकट इतना गंभीर है कि एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल 31 लाख रुपए की लागत से शिवनाथ नदी से पानी लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला और पैसा बेकार चला गया। कुछ लोगों का कहना है कि नदी का पानी केवल डेम में जमा किया जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है।
अवैध शराब पर नाराजगी
जल संकट के साथ-साथ गांव में अवैध शराब की बिक्री भी बड़ा मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, वहीं शराब आसानी से उपलब्ध है।
पूर्व सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में 8–10 लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं और इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि इससे गांव का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है और गश्त बढ़ाई गई है।
दुर्ग जिले के अन्य गांवों—जैसे पाटन क्षेत्र के औरी, उतई के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा और आसपास के इलाकों में भी पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर योजनाओं में तेजी लाने की बात कही है।
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दुर्ग के गांवों में जल संकट गहराया, अवैध शराब पर भी उठे सवाल
दुर्ग (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं, जहां लोगों को पीने के पानी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात सबसे अधिक खराब बताए जा रहे हैं। यहां लगभग 3000 की आबादी के लिए सिर्फ एक बोरवेल ही पानी का सहारा है, जिससे बेहद कम क्षमता में पानी निकलता है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए कतार लग जाती है, जो देर रात तक जारी रहती है। इसी बीच गांव में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की कमी के कारण उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं तक पानी के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। रोजगार और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि दिन का बड़ा हिस्सा पानी जुटाने में ही निकल जाता है।
पानी के लिए जंग
गांव में जल संकट इतना गंभीर है कि एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल 31 लाख रुपए की लागत से शिवनाथ नदी से पानी लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला और पैसा बेकार चला गया। कुछ लोगों का कहना है कि नदी का पानी केवल डेम में जमा किया जा रहा है, जो पीने योग्य नहीं है।
अवैध शराब पर नाराजगी
जल संकट के साथ-साथ गांव में अवैध शराब की बिक्री भी बड़ा मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, वहीं शराब आसानी से उपलब्ध है।
पूर्व सरपंच और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में 8–10 लोग अवैध शराब के कारोबार से जुड़े हैं और इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि इससे गांव का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवा पीढ़ी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है और गश्त बढ़ाई गई है।
दुर्ग जिले के अन्य गांवों—जैसे पाटन क्षेत्र के औरी, उतई के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा और आसपास के इलाकों में भी पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों ने जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर योजनाओं में तेजी लाने की बात कही है।
