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बजट के बाद शेयर बाजार में तेज बिकवाली, सेंसेक्स 1,500 से ज्यादा अंक लुढ़का
बिजनेस न्यूज
फ्यूचर्स-ऑप्शंस पर STT बढ़ने से निवेशकों में घबराहट, सरकारी बैंक और हैवीवेट शेयर दबाव में
केंद्रीय बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रविवार, 1 फरवरी को कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1,546 अंक टूटकर 80,722 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 495 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,825 पर आ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, डेरिवेटिव्स से जुड़े टैक्स में बढ़ोतरी ने बाजार की धारणा को कमजोर किया।
बजट में सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस सौदों पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने का ऐलान किया। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर टैक्स दर 0.15% कर दी गई है। इसी फैसले को बाजार में तेज गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है।
सात साल की सबसे बड़ी बजट-डे गिरावट
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीते सात वर्षों में बजट वाले दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले 2020-21 के बजट के दिन सेंसेक्स करीब 987 अंक और निफ्टी 300 अंक तक गिरा था। इस बार गिरावट का दायरा उससे कहीं ज्यादा रहा।
दिनभर दबाव में रहा बाजार
कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया।
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बजट भाषण के दौरान सेंसेक्स करीब 1,600 अंक फिसलकर 80,600 के आसपास आ गया।
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भाषण के बाद गिरावट और तेज हुई और सेंसेक्स दिन के निचले स्तर 79,899 तक पहुंच गया।
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निफ्टी भी एक समय 750 अंक टूटकर 24,571 तक फिसल गया।
सरकारी बैंक और हैवीवेट शेयर सबसे ज्यादा टूटे
सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर लाल निशान में बंद हुए। सरकारी बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स में 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। BEL, SBI और अडाणी पोर्ट्स जैसे बड़े शेयरों में भी तेज बिकवाली रही। इसके अलावा मेटल, मीडिया, FMCG, फार्मा, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर भी नुकसान में बंद हुए।
STT क्या है और क्यों बढ़ा असर
STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स शेयर बाजार में हर खरीद-बिक्री पर लगाया जाने वाला टैक्स है। यह मुनाफा हो या घाटा, दोनों स्थितियों में देना होता है। टैक्स दर बढ़ने से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर सक्रिय ट्रेडर्स और ऑप्शंस निवेशकों पर पड़ेगा।
बाजार जानकारों का कहना है कि टैक्स बढ़ोतरी से शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग महंगी होगी और मुनाफे का मार्जिन घटेगा। हालांकि, लॉन्ग-टर्म निवेशकों पर इसका असर सीमित रह सकता है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशक नई टैक्स संरचना को कितनी जल्दी पचा पाते हैं और वैश्विक संकेत कैसे रहते हैं।
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