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Sidhharrth S Kumaar on Budget 2026–27: खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन के ज़रिये भारत की सॉफ्ट पावर को मज़बूत करने की दिशा
ओपीनियन
बजट 2026–27 को केवल आर्थिक घोषणाओं का दस्तावेज़ मानना इसकी गहराई को कम करके देखना होगा। यह बजट संकेत देता है कि भारत अब अपनी सभ्यतागत ज्ञान परंपराओं को नीति, संस्थान और अवसंरचना के माध्यम से एक संगठित स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खगोल विज्ञान और एस्ट्रोफिजिक्स को लेकर दिखाई गई नीति-गत रुचि इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण संकेत है। राष्ट्रीय टेलीस्कोप अवसंरचना और वैज्ञानिक अध्ययन से जुड़े निवेश यह दर्शाते हैं कि भारत वैज्ञानिक जिज्ञासा और ब्रह्मांडीय चेतना को सार्वजनिक नीति का हिस्सा बना रहा है।
यह झुकाव अपने आप में Indic Wisdom की उस निरंतर परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें खगोल विज्ञान और Astrology एक ही ज्ञान प्रवाह का हिस्सा रहे हैं। बजट सीधे तौर पर Astrology का उल्लेख नहीं करता, लेकिन खगोल विज्ञान पर बढ़ता नीति फोकस यह संकेत देता है कि भारत अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक, संरचित और सम्मानित ढांचे में पुनः स्थापित करने की दिशा में सोच रहा है। जैसा कि Sidhharrth S Kumaar, Chief Astrologer, NumroVani कहते हैं, “खगोल विज्ञान पर नीति-स्तरीय ध्यान यह दर्शाता है कि भारत अपने प्राचीन ज्ञान को अब सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सॉफ्ट पावर के रूप में देखने लगा है।”
इस बजट में आयुर्वेद को लेकर दिखाई गई गंभीरता इस दृष्टिकोण को और मज़बूत करती है। नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, AYUSH प्रमाणन ढांचे का सुदृढ़ीकरण और जामनगर स्थित WHO पारंपरिक चिकित्सा केंद्र में निवेश यह दर्शाता है कि आयुर्वेद को वैश्विक, प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का स्पष्ट इरादा है। Sidhharrth S Kumaar, Chief Astrologer, NumroVani के अनुसार, “आयुर्वेद पर नीति समर्थन यह स्पष्ट करता है कि भारत अब अपने ज्ञान को वैश्विक स्वास्थ्य संवाद का हिस्सा बनाने के लिए तैयार है।”
आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी बजट एक व्यापक दृष्टि प्रस्तुत करता है। National Destination Digital Knowledge Grid और बौद्ध सर्किट जैसी पहलें आध्यात्मिक स्थलों को केवल यात्रा स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े संगठित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने का संकेत देती हैं। यह दृष्टि भारत की Spiritual Economy को गहराई और स्थायित्व प्रदान करती है।
इन सभी पहलों को समर्थन देने वाला आधारभूत ढांचा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, शहरों और मंदिर नगरों पर दिया गया ज़ोर यह सुनिश्चित करता है कि यह सॉफ्ट पावर केवल विचारों तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीन पर प्रभावी रूप से साकार हो सके। Sidhharrth S Kumaar, Chief Astrologer, NumroVani के शब्दों में, “जब ज्ञान, स्वास्थ्य, आस्था और अवसंरचना एक साथ नीति प्रवाह में आते हैं, तभी Spiritual Economy अपना पूर्ण स्वरूप लेती है।”
बजट 2026–27 को इस दृष्टि से एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। यह भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक नीति समर्थन, वैश्विक मानकों और आर्थिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक भरोसेमंद आधार तैयार करता है। यदि यह झुकाव आगे भी इसी स्पष्टता और संतुलन के साथ जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में Indic Wisdom आधारित सॉफ्ट पावर के रूप में वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकता है।
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