एमपी में 65 डीएसपी के तबादले, बालाघाट हॉक फोर्स में 18 अफसरों की तैनाती

मध्य प्रदेश

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ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर के सीएसपी बदले, कई जिलों में नई जिम्मेदारियां

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादले करते हुए शनिवार देर रात 65 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। गृह विभाग द्वारा जारी इस तबादला सूची में ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे प्रमुख शहरों के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) बदले गए हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद जारी हुई इस व्यापक तबादला सूची को पुलिस प्रशासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा जरूरत के अनुसार अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है। इस तबादला आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात बालाघाट जिले में हॉक फोर्स को लेकर की गई बड़ी नियुक्तियां हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बालाघाट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के रूप में हॉक फोर्स में पदस्थ किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों को देखते हुए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती जरूरी थी। इसी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में अधिकारियों को यहां भेजा गया है ताकि नक्सल विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।

जिन अधिकारियों को बालाघाट हॉक फोर्स में सहायक सेनानी की जिम्मेदारी दी गई है उनमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार अलावा, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी, अमन मिश्रा, रोहित राठौर और राकेश आर्य सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को जल्द ही अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इनकी तैनाती के बाद क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों को नई गति मिलेगी।केवल हॉक फोर्स ही नहीं, बल्कि बालाघाट जिले में एसडीओपी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों को भी नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती आवश्यक थी। उधर ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी नगर पुलिस अधीक्षकों के बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शहरों में कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को शहरी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी देकर पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इस तरह के तबादले किए जाते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बना रहता है, बल्कि विभिन्न जिलों में बेहतर पुलिसिंग भी सुनिश्चित होती है। खासकर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है। बालाघाट जैसे सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित जिले में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई पदस्थापना को इन अभियानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं जिन जिलों में नए सीएसपी और एसडीओपी की नियुक्ति हुई है, वहां स्थानीय पुलिस व्यवस्था में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में नई तैनाती के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से बालाघाट में हॉक फोर्स की मजबूती से नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 

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28 Jun 2026 By Vaishnavi.J

एमपी में 65 डीएसपी के तबादले, बालाघाट हॉक फोर्स में 18 अफसरों की तैनाती

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मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादले करते हुए शनिवार देर रात 65 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। गृह विभाग द्वारा जारी इस तबादला सूची में ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे प्रमुख शहरों के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) बदले गए हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद जारी हुई इस व्यापक तबादला सूची को पुलिस प्रशासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा जरूरत के अनुसार अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है। इस तबादला आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात बालाघाट जिले में हॉक फोर्स को लेकर की गई बड़ी नियुक्तियां हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बालाघाट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के रूप में हॉक फोर्स में पदस्थ किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों को देखते हुए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती जरूरी थी। इसी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में अधिकारियों को यहां भेजा गया है ताकि नक्सल विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।

जिन अधिकारियों को बालाघाट हॉक फोर्स में सहायक सेनानी की जिम्मेदारी दी गई है उनमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार अलावा, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी, अमन मिश्रा, रोहित राठौर और राकेश आर्य सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को जल्द ही अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इनकी तैनाती के बाद क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों को नई गति मिलेगी।केवल हॉक फोर्स ही नहीं, बल्कि बालाघाट जिले में एसडीओपी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों को भी नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती आवश्यक थी। उधर ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी नगर पुलिस अधीक्षकों के बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शहरों में कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को शहरी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी देकर पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इस तरह के तबादले किए जाते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बना रहता है, बल्कि विभिन्न जिलों में बेहतर पुलिसिंग भी सुनिश्चित होती है। खासकर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है। बालाघाट जैसे सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित जिले में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई पदस्थापना को इन अभियानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं जिन जिलों में नए सीएसपी और एसडीओपी की नियुक्ति हुई है, वहां स्थानीय पुलिस व्यवस्था में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में नई तैनाती के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से बालाघाट में हॉक फोर्स की मजबूती से नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/65-dsps-transferred-in-mp-18-officers-posted-in-balaghat/article-57197

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