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पिनराई विजयन पर ED की कार्रवाई से UDF के सामने दोहरी चुनौती, कदम उठाए तो भी राजनीतिक नुकसान
Digital Desk
CMRL-Exalogic मामले में ED ने भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस की मांग की है। केरल की UDF सरकार कानूनी राय ले रही है; कार्रवाई करने पर CPM के BJP-कांग्रेस गठजोड़ के आरोप और रोकने पर BJP के निशाने का खतरा है।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच की मांग ने राज्य की कांग्रेस नेतृत्व वाली UDF सरकार को राजनीतिक दुविधा में डाल दिया है। CMRL-Exalogic मामले में ED ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस को अपनी जांच के निष्कर्ष भेजे हैं। सरकार ने फिलहाल जल्दबाजी से बचते हुए कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं की समीक्षा शुरू की है।
ED की रिपोर्ट पर सरकार सीधे FIR दर्ज करने के बजाय यह देख रही है कि एजेंसी के निष्कर्षों में संज्ञेय अपराध का आधार बनता है या नहीं और क्या आगे की कार्रवाई के लिए ED से अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण की जरूरत है। गृह और कानून विभाग को इस संबंध में पहलुओं की जांच करने को कहा गया है।
सरकार के सामने राजनीतिक जोखिम
UDF के लिए मामला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि किसी भी फैसले का राजनीतिक असर हो सकता है। यदि सरकार ED की मांग पर मामला दर्ज करती है, तो CPM आरोप लगा सकती है कि कांग्रेस सरकार केंद्र की एजेंसी के दबाव में काम कर रही है। दूसरी ओर, यदि सरकार कार्रवाई रोकती है, तो BJP इसे कांग्रेस और CPM के बीच समझौते के तौर पर पेश कर सकती है।
कांग्रेस नेतृत्व पिछली घटनाओं को देखते हुए भी सावधानी बरत रहा है। पार्टी के भीतर यह चिंता है कि जल्दबाजी में जांच शुरू करने का फैसला बाद में राजनीतिक नुकसान में बदल सकता है। रिपोर्ट में 2021 में तत्कालीन LDF सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के खिलाफ CBI जांच की सिफारिश और बाद में उन्हें क्लीन चिट मिलने के घटनाक्रम का भी उल्लेख है।
ED ने क्या आरोप लगाए हैं?
ED के मुताबिक, कोच्चि स्थित Cochin Minerals and Rutile Ltd (CMRL) ने पिनराई विजयन की बेटी टी. वीणा से जुड़ी कंपनी Exalogic Solutions को कथित तौर पर 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। एजेंसी का आरोप है कि इन भुगतानों के बदले संबंधित सेवाएं नहीं दी गईं। ED ने आगे पिनराई विजयन को कथित अवैध भुगतान और कुछ हवाला लेनदेन से जोड़ने वाले दावे भी किए हैं।
ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत अपनी जांच में सामने आई जानकारी राज्य पुलिस को भेजी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह राज्य सरकार को FIR दर्ज करने का सीधा आदेश नहीं है। राज्य की सक्षम एजेंसी को ED की सामग्री का स्वतंत्र आकलन करना होगा। पिनराई विजयन ने आरोपों को खारिज किया है और ED की कार्रवाई को राजनीतिक निशाना बनाने का प्रयास बताया है। उन्होंने अपने और परिवार के खिलाफ लगाए गए हवाला संबंधी आरोपों से भी इनकार किया है।
CPM और BJP के लिए भी अहम घटनाक्रम
ED की कार्रवाई ने CPM को केंद्र की जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का मुद्दा उठाने का मौका दिया है। पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। वहीं BJP के लिए यह पिनराई विजयन और CPM के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दबाव बढ़ाने का अवसर है। अब निगाहें UDF सरकार की कानूनी समीक्षा पर हैं। यदि राज्य एजेंसी को अपराध का प्रथम दृष्टया आधार मिलता है तो FIR और आगे की जांच का रास्ता खुल सकता है। यदि FIR दर्ज नहीं होती, तब भी ED की PMLA जांच अपने आप समाप्त नहीं होगी, हालांकि उसके कानूनी आधार को चुनौती देने का विकल्प आरोपों का सामना कर रहे लोगों के पास रहेगा।
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