संसद परिसर में NDA और INDIA ब्लॉक आमने-सामने, नारेबाजी के बीच प्रियंका गांधी को सुरक्षाकर्मियों ने रोका

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NEET पेपर लीक और राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष का टकराव, संसद के भीतर भी हंगामा

संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन के भीतर शुरू होने वाली सियासी लड़ाई संसद भवन के बाहर तक पहुंच गई। एक तरफ NDA के सांसद विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर INDIA ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। कुछ देर में दोनों पक्ष एक-दूसरे के काफी करीब आ गए और नारेबाजी तेज हो गई। इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आगे बढ़ते हुए NDA सांसदों के नजदीक पहुंचीं। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी तुरंत बीच में आए और उन्हें आगे जाने से रोका। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।

संसद परिसर के बाहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई सांसद प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए। विपक्ष का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक, छात्रों का आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा। दूसरी तरफ INDIA सांसद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए धरने का विरोध करते नजर आए। संसद के बाहर दोनों खेमों के प्रदर्शन के साथ सदन के अंदर भी माहौल शांत नहीं रहा और हंगामे के कारण लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

संसद परिसर में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। विपक्षी सांसद एक साथ जुटे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उनके हाथों में छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले संदेश भी दिखाई दिए। विपक्ष का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले में केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही विपक्ष इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। सरकार की ओर से पहले कहा जा चुका है कि वह पेपर लीक समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन को व्यवस्थित तरीके से चलने दिया जाना चाहिए।

एक दिन पहले भी इसी मुद्दे पर दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ था। विपक्ष ने NEET पेपर लीक के साथ दिल्ली में छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि छात्रों की बात सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाया जा रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा था कि नोटिस मिलने के बाद मुद्दों पर चर्चा कराई जा सकती है, लेकिन प्रश्नकाल के बाद निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा होनी चाहिए। सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी NEET पेपर लीक सहित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही थी।

गुरुवार को स्थिति इसलिए अलग दिखी क्योंकि विरोध केवल विपक्ष की तरफ से नहीं था। NDA सांसद भी संसद परिसर में प्रदर्शन करने उतर आए। सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए। उनका विरोध 21 जुलाई को प्रधानमंत्री के आवास के बाहर हुए कांग्रेस के धरने को लेकर था। उस दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के मुद्दे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए कहा गया था, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर धरना जारी रखा।

सरकार से जुड़े नेताओं ने इस तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा था कि संसद सत्र चल रहा है और मुद्दों को सदन के भीतर उठाया जा सकता है। भाजपा और NDA नेताओं ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने को नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं बताया था। वहीं कांग्रेस का कहना था कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला गंभीर है और जब उनकी बात नहीं सुनी जा रही तो विरोध करना जरूरी है। 21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठी थी।

गुरुवार को संसद परिसर में इसी राजनीतिक टकराव की तस्वीर और साफ दिखाई दी। NDA और INDIA ब्लॉक के सांसद अलग-अलग स्थानों से नारेबाजी करते हुए आमने-सामने आ गए। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मी दोनों समूहों के बीच स्थिति संभालते रहे। इसी दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा NDA सांसदों की ओर बढ़ीं। वे विरोध कर रहे सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने बीच में आकर उन्हें रोक दिया। कुछ देर तक दोनों तरफ से नारे चलते रहे। घटना के दौरान किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं मिली, लेकिन संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों का इस तरह करीब आना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

कांग्रेस की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता भी विरोध में शामिल रहे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सरकार को घेरते रहे हैं। उन्होंने एक दिन पहले सवाल उठाया था कि सरकार शिक्षा मंत्री को पद से क्यों नहीं हटा रही और इस मामले में किस तरह का दबाव है।

NEET पेपर लीक का मुद्दा मानसून सत्र की शुरुआत से ही सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़े टकराव की वजह बना हुआ है। विपक्ष की मांग है कि मामले पर संसद में प्राथमिकता के साथ चर्चा हो और शिक्षा मंत्री जवाब दें। कांग्रेस इस मामले में इस्तीफे की मांग पर भी कायम है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। सरकार ने पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करने की घोषणा भी की है। इसके बावजूद विपक्ष का कहना है कि केवल कानूनी कार्रवाई की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बार-बार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की जवाबदेही किसकी है।

संसद में पिछले कुछ दिनों से इसी मुद्दे पर कामकाज बार-बार प्रभावित हो रहा है। एक दिन पहले लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने NEET पेपर लीक और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग की थी। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी। सरकार की तरफ से कहा गया कि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सदन को चलने दे, जबकि विपक्ष का आरोप है कि उसे अपनी शर्तों पर मुद्दा उठाने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी आरोप लगाया था कि संसद में विपक्षी नेताओं को छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए सरकार के रवैये पर सवाल उठाए थे। दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था और कहा था कि संसद को सुचारू रूप से चलने देना चाहिए।

इस सियासी टकराव का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। सुबह दोनों सदनों में कामकाज शुरू होने के साथ विपक्ष ने अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की। नारेबाजी और हंगामे के बीच सामान्य कार्यवाही चलाना मुश्किल हुआ और लोकसभा तथा राज्यसभा को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही NEET पेपर लीक, छात्रों के प्रदर्शन और अन्य राजनीतिक मुद्दों के कारण सदन में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहा है। सरकार विधायी कामकाज आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि विपक्ष पहले छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाब और चर्चा की मांग कर रहा है।

पेपर लीक का मामला अब केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन, पुलिस कार्रवाई के आरोप, राहुल गांधी के धरने और अब संसद परिसर में NDA-INDIA ब्लॉक के आमने-सामने आने से यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार कार्रवाई कर रही है और विपक्ष को संसद के भीतर चर्चा में भाग लेना चाहिए।

एक दिन पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर रास्ता निकालने की कोशिश भी हुई थी। लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से विपक्ष को नोटिस देकर चर्चा कराने का भरोसा दिया गया था। संसदीय कार्य मंत्री ने भी कहा था कि NEET पेपर लीक समेत महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही। इसके बावजूद चर्चा किस नियम के तहत हो, इस्तीफे की मांग पहले मानी जाए या बहस पहले हो, इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। यही गतिरोध गुरुवार को भी जारी रहा।

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर NDA का विरोध भी अब संसद की राजनीति का हिस्सा बन गया है। भाजपा और सहयोगी दल इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस इसे छात्रों के समर्थन में लोकतांत्रिक विरोध बता रही है। 21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि छात्रों और युवाओं को न्याय मिलने तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। जंतर-मंतर पर भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन जारी रहने की खबरें सामने आई हैं।

संसद के मानसून सत्र में सरकार के पास कई विधायी काम हैं, लेकिन लगातार हंगामे के कारण शुरुआती दिनों में कामकाज प्रभावित हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष NEET पेपर लीक पर जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा, जबकि सरकार चर्चा की बात कहते हुए इस्तीफे की मांग को राजनीतिक दबाव के रूप में देख रही है। गुरुवार को संसद परिसर के बाहर दिखाई दिया आमना-सामना इसी बढ़ते राजनीतिक तनाव की नई तस्वीर बन गया।

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23 Jul 2026 By Priyanka

संसद परिसर में NDA और INDIA ब्लॉक आमने-सामने, नारेबाजी के बीच प्रियंका गांधी को सुरक्षाकर्मियों ने रोका

Digital Desk

संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन के भीतर शुरू होने वाली सियासी लड़ाई संसद भवन के बाहर तक पहुंच गई। एक तरफ NDA के सांसद विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर INDIA ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। कुछ देर में दोनों पक्ष एक-दूसरे के काफी करीब आ गए और नारेबाजी तेज हो गई। इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आगे बढ़ते हुए NDA सांसदों के नजदीक पहुंचीं। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी तुरंत बीच में आए और उन्हें आगे जाने से रोका। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।

संसद परिसर के बाहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई सांसद प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए। विपक्ष का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक, छात्रों का आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा। दूसरी तरफ INDIA सांसद राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए धरने का विरोध करते नजर आए। संसद के बाहर दोनों खेमों के प्रदर्शन के साथ सदन के अंदर भी माहौल शांत नहीं रहा और हंगामे के कारण लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

संसद परिसर में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। विपक्षी सांसद एक साथ जुटे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उनके हाथों में छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले संदेश भी दिखाई दिए। विपक्ष का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले में केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही विपक्ष इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। सरकार की ओर से पहले कहा जा चुका है कि वह पेपर लीक समेत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन को व्यवस्थित तरीके से चलने दिया जाना चाहिए।

एक दिन पहले भी इसी मुद्दे पर दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ था। विपक्ष ने NEET पेपर लीक के साथ दिल्ली में छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि छात्रों की बात सुनने के बजाय उनके आंदोलन को दबाया जा रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा था कि नोटिस मिलने के बाद मुद्दों पर चर्चा कराई जा सकती है, लेकिन प्रश्नकाल के बाद निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत चर्चा होनी चाहिए। सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी NEET पेपर लीक सहित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही थी।

गुरुवार को स्थिति इसलिए अलग दिखी क्योंकि विरोध केवल विपक्ष की तरफ से नहीं था। NDA सांसद भी संसद परिसर में प्रदर्शन करने उतर आए। सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए। उनका विरोध 21 जुलाई को प्रधानमंत्री के आवास के बाहर हुए कांग्रेस के धरने को लेकर था। उस दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के मुद्दे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए कहा गया था, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर धरना जारी रखा।

सरकार से जुड़े नेताओं ने इस तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा था कि संसद सत्र चल रहा है और मुद्दों को सदन के भीतर उठाया जा सकता है। भाजपा और NDA नेताओं ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने को नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं बताया था। वहीं कांग्रेस का कहना था कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला गंभीर है और जब उनकी बात नहीं सुनी जा रही तो विरोध करना जरूरी है। 21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठी थी।

गुरुवार को संसद परिसर में इसी राजनीतिक टकराव की तस्वीर और साफ दिखाई दी। NDA और INDIA ब्लॉक के सांसद अलग-अलग स्थानों से नारेबाजी करते हुए आमने-सामने आ गए। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मी दोनों समूहों के बीच स्थिति संभालते रहे। इसी दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा NDA सांसदों की ओर बढ़ीं। वे विरोध कर रहे सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने बीच में आकर उन्हें रोक दिया। कुछ देर तक दोनों तरफ से नारे चलते रहे। घटना के दौरान किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं मिली, लेकिन संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों का इस तरह करीब आना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

कांग्रेस की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता भी विरोध में शामिल रहे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सरकार को घेरते रहे हैं। उन्होंने एक दिन पहले सवाल उठाया था कि सरकार शिक्षा मंत्री को पद से क्यों नहीं हटा रही और इस मामले में किस तरह का दबाव है।

NEET पेपर लीक का मुद्दा मानसून सत्र की शुरुआत से ही सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़े टकराव की वजह बना हुआ है। विपक्ष की मांग है कि मामले पर संसद में प्राथमिकता के साथ चर्चा हो और शिक्षा मंत्री जवाब दें। कांग्रेस इस मामले में इस्तीफे की मांग पर भी कायम है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। सरकार ने पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करने की घोषणा भी की है। इसके बावजूद विपक्ष का कहना है कि केवल कानूनी कार्रवाई की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बार-बार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की जवाबदेही किसकी है।

संसद में पिछले कुछ दिनों से इसी मुद्दे पर कामकाज बार-बार प्रभावित हो रहा है। एक दिन पहले लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने NEET पेपर लीक और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग की थी। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी। सरकार की तरफ से कहा गया कि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सदन को चलने दे, जबकि विपक्ष का आरोप है कि उसे अपनी शर्तों पर मुद्दा उठाने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी आरोप लगाया था कि संसद में विपक्षी नेताओं को छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए सरकार के रवैये पर सवाल उठाए थे। दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था और कहा था कि संसद को सुचारू रूप से चलने देना चाहिए।

इस सियासी टकराव का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। सुबह दोनों सदनों में कामकाज शुरू होने के साथ विपक्ष ने अपने मुद्दे उठाने की कोशिश की। नारेबाजी और हंगामे के बीच सामान्य कार्यवाही चलाना मुश्किल हुआ और लोकसभा तथा राज्यसभा को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही NEET पेपर लीक, छात्रों के प्रदर्शन और अन्य राजनीतिक मुद्दों के कारण सदन में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहा है। सरकार विधायी कामकाज आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि विपक्ष पहले छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाब और चर्चा की मांग कर रहा है।

पेपर लीक का मामला अब केवल परीक्षा में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन, पुलिस कार्रवाई के आरोप, राहुल गांधी के धरने और अब संसद परिसर में NDA-INDIA ब्लॉक के आमने-सामने आने से यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार कार्रवाई कर रही है और विपक्ष को संसद के भीतर चर्चा में भाग लेना चाहिए।

एक दिन पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर रास्ता निकालने की कोशिश भी हुई थी। लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से विपक्ष को नोटिस देकर चर्चा कराने का भरोसा दिया गया था। संसदीय कार्य मंत्री ने भी कहा था कि NEET पेपर लीक समेत महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही। इसके बावजूद चर्चा किस नियम के तहत हो, इस्तीफे की मांग पहले मानी जाए या बहस पहले हो, इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। यही गतिरोध गुरुवार को भी जारी रहा।

राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर NDA का विरोध भी अब संसद की राजनीति का हिस्सा बन गया है। भाजपा और सहयोगी दल इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस इसे छात्रों के समर्थन में लोकतांत्रिक विरोध बता रही है। 21 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि छात्रों और युवाओं को न्याय मिलने तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। जंतर-मंतर पर भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन जारी रहने की खबरें सामने आई हैं।

संसद के मानसून सत्र में सरकार के पास कई विधायी काम हैं, लेकिन लगातार हंगामे के कारण शुरुआती दिनों में कामकाज प्रभावित हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष NEET पेपर लीक पर जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा, जबकि सरकार चर्चा की बात कहते हुए इस्तीफे की मांग को राजनीतिक दबाव के रूप में देख रही है। गुरुवार को संसद परिसर के बाहर दिखाई दिया आमना-सामना इसी बढ़ते राजनीतिक तनाव की नई तस्वीर बन गया।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/security-personnel-stopped-priyanka-gandhi-amid-sloganeering-nda-and-india/article-59562

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